राम लीला के सेट में दीपिका पादुकोण ने दी थी 50 गालियां, जयती भाटिया का खुलासा, कहा- 'फीयरलेस हो गई थी'
Jayati Bhatia on Deepika Padukone: बॉलीवुड की टॉप एक्ट्रेसेस में शामिल दीपिका पादुकोण ने अपनी एक्टिंग और अदाओं से लोगों के दिलों में खास जगह बनाई है. उन्होंने कड़ी मेहनत कर इंडस्ट्री में एक मुकाम हासिल किया है. वहीं, हाल ही में दीपिका को लेकर टीवी की जानी मानी एक्ट्रेस जयती भाटिया ने बड़ा खुलासा किया. उन्होंने बताया कि एक्ट्रेस ने राम लीला के सेट में 50 से ज्यादा गालियां दी थी. चलिए जानते हैं इस किस्से के बारे में-
Actress Jayati Bhatia EXPOSES abusive nature of Deepika Padukone ????
— Chota Don (@choga_don) August 4, 2026
There was a Bhel wala near to Sanjay Leela Bhansali's office, Deepika came and she started abusing him. She gave more than 50 non stop abuses, words which I never heard in my life. pic.twitter.com/0S4Z0JOQ8Q
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FSSAI का बड़ा एक्शन: भ्रामक 100 फीसदी दावों वाले उत्पादों की बिक्री पर रोक, डाबर को जारी हुआ आदेश
FSSAI Action: खाद्य उत्पादों की पैकेजिंग और विज्ञापनों में किए जाने वाले दावों को लेकर भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने सख्त कदम उठाया है. FSSAI ने डाबर इंडिया लिमिटेड को ऐसे खाद्य उत्पादों की बिक्री तत्काल बंद करने का निर्देश दिया है, जिन पर 100 फीसदी से जुड़े ऐसे दावे किए गए हैं जिन्हें भ्रामक, अस्पष्ट और सत्यापित नहीं माना गया.
FSSAI के अनुसार, कंपनी की वेबसाइट पर कुछ उत्पादों को 100 प्रतिशत Natural, 100 फीसदी प्योर, 100 प्रतिशत शुद्धता का दावा, 100 फीसदी ऑर्गेनिक और 100 प्रतिशत टेंडर कोकोनट वाटर जैसे दावों के साथ बेचा जा रहा था. नियामक संस्था का कहना है कि इस तरह के पूर्ण दावे उपभोक्ताओं को गलत धारणा दे सकते हैं और इनकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना भी संभव नहीं है.
विज्ञापन और दावों से जुड़े नियमों का उल्लंघन
FSSAI ने कहा कि 100 फीसदी जैसे दावे खाद्य सुरक्षा एवं मानक (विज्ञापन एवं दावे) विनियम, 2018 के प्रावधानों के अनुरूप नहीं पाए गए. नियामक के मुताबिक, किसी उत्पाद को पूरी तरह प्राकृतिक, शुद्ध या जैविक बताने के लिए पर्याप्त और वैध आधार होना जरूरी है.
प्राधिकरण ने स्पष्ट किया कि अस्पष्ट या सत्यापन से परे दावे उपभोक्ताओं को उत्पाद की गुणवत्ता और प्रकृति के बारे में भ्रमित कर सकते हैं. इसी वजह से कंपनी को ऐसे दावों वाले उत्पादों की बिक्री तत्काल रोकने के लिए निषेध आदेश जारी किया गया है.
FSSAI ने यह भी बताया कि इससे पहले कंपनी को 100 प्रतिशत से जुड़े भ्रामक दावों को हटाने या बंद करने के लिए नोटिस दिया गया था. हालांकि, नियामक के अनुसार संतोषजनक सुधारात्मक कार्रवाई नहीं किए जाने के बाद यह सख्त कदम उठाना पड़ा.
FSSAI has issued a Prohibition Order directing M/s Dabur India Limited to immediately cease the sale of food products carrying misleading "100%" claims.#FSSAINotice #FSSAIAction pic.twitter.com/7GdNRUJFyh
— FSSAI (@fssaiindia) August 3, 2026
ऑर्गेनिक उत्पादों पर भी उठे सवाल
यही नहीं FSSAI की जांच में डाबर, हिमालयन ऑर्गेनिक एप्पल साइडर विनेगर और डाबर ऑर्गेनिक हनी के लेबल पर ‘जैविक भारत’ लोगो के इस्तेमाल को लेकर भी आपत्ति दर्ज की गई. प्राधिकरण का कहना है कि इन उत्पादों पर वैध FSSAI ऑर्गेनिक समर्थन या अनुमोदन के बिना यह लोगो प्रदर्शित किया गया था.
इसे खाद्य सुरक्षा एवं मानक (ऑर्गेनिक फूड्स) विनियम, 2017 के प्रावधानों का उल्लंघन माना गया. ‘जैविक भारत’ लोगो का उद्देश्य उपभोक्ताओं को यह भरोसा दिलाना है कि संबंधित उत्पाद निर्धारित जैविक मानकों के अनुरूप है. ऐसे में लोगो के इस्तेमाल से जुड़े नियमों का पालन करना अनिवार्य है.
100 फीसदी प्योरिटी यानी शुद्धता वाले नारियल दूध पर भी आपत्ति
FSSAI ने डाबर होममेड कोकोनट मिल्क के प्रचार में इस्तेमाल किए गए 100 फीसदी प्योरिटी दावे को भी नियमों के विपरीत बताया. प्राधिकरण के अनुसार, मिश्रित या कंपाउंड खाद्य उत्पादों के लिए इस तरह का पूर्ण शुद्धता का दावा स्वीकार्य नहीं है.
नियामक का मानना है कि खाद्य उत्पादों की प्रकृति, सामग्री और निर्माण प्रक्रिया को देखते हुए ऐसे शब्द उपभोक्ताओं के मन में उत्पाद को लेकर एक ऐसी छवि बना सकते हैं, जो वास्तविक संरचना से अलग हो.
देश में हजारों खाद्य नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे
खाद्य सुरक्षा को लेकर सरकार ने संसद में भी अहम आंकड़े साझा किए हैं. वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान देशभर में 2,23,808 खाद्य नमूनों की जांच की गई। इनमें से 40,023 नमूने निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए.
इन नमूनों में पेय पदार्थ और कैफीनयुक्त ड्रिंक्स भी शामिल थे। सरकार के अनुसार, खाद्य सुरक्षा उल्लंघन से जुड़े मामलों में 31,878 सिविल मामलों का निपटारा करते हुए जुर्माना लगाया गया, जबकि 1,918 आपराधिक मामलों में दोषसिद्धि दर्ज की गई। हालांकि, इन आंकड़ों को अस्थायी बताया गया है और आगे की प्रयोगशाला जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के बाद इनमें बदलाव संभव है.
सरकार ने क्या कहा?
वहीं इस पूरे मामले पर सरकार ने बताया कि FSSAI खाद्य मिलावट को रोकने के लिए कई जागरूकता कार्यक्रम चला रहा है. इनमें '#NoToAdulteration' और 'How to Check for Adulteration' जैसे अभियान शामिल हैं.
इसके अलावा, मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब यानी ‘फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स’, फूड सेफ्टी मैजिक बॉक्स और त्वरित खाद्य जांच किट का भी उपयोग किया जा रहा है. FSSAI ने मिलावट की पहचान के लिए ‘डिटेक्ट एडलेरेशन विद रैपिड टेस्ट’ यानी DART पुस्तिका भी जारी की है.
सरकार के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 में लेबलिंग और डिस्प्ले नियमों के उल्लंघन को लेकर अब तक 15 खाद्य कारोबार संचालकों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं. यह कार्रवाई संकेत देती है कि खाद्य उत्पादों के विज्ञापन, पैकेजिंग और दावों पर नियामक की निगरानी लगातार सख्त हो रही है.
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