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जर्मन चांसलर मर्ज बोले- यूरोप की आजादी की गारंटी नहीं:अमेरिका से रिश्तों में गहरी दरार, नियमों से चलने वाली दुनिया खत्म

जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने कहा है कि यूरोप की आजादी की अब गारंटी नहीं है। मर्ज के मुताबिक यूरोप अब यह मानकर नहीं चल सकता कि उसे अपने-आप सुरक्षा मिलती रहेगी। म्यूनिख में सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मर्ज ने माना कि यूरोप और अमेरिका के रिश्तों में गहरी दरार आ गई है। उन्होंने कहा कि नियमों से चलने वाली दुनिया खत्म हो गई है, वैश्विक व्यवस्था अब उस रूप में मौजूद नहीं रही। मर्ज ने कहा कि दुनिया अब बड़ी शक्तियों की प्रतिस्पर्धा से चल रही है। सम्मेलन में कई यूरोपीय नेता और अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो भी मौजूद रहे। सेकेंड वर्ल्ड वॉर के बाद बनी व्यवस्था खत्म हुई मर्ज ने कहा कि सेकेंड वर्ल्ड वॉर के बाद जो वैश्विक व्यवस्था बनी थी, वह अब खत्म हो गई है। उन्होंने बताया कि उस समय देश आपसी नियमों और समझ के आधार पर काम करते थे, लेकिन अब हालात बदल गए हैं। मर्ज ने कहा कि ऐसे माहौल में यूरोप यह मानकर नहीं चल सकता कि उसकी सुरक्षा और आजादी अपने-आप बनी रहेगी। यूरोपीय देशों को अब ज्यादा जिम्मेदारी लेनी होगी। जरूरत पड़े तो त्याग भी करना होगा और अपनी रक्षा व अर्थव्यवस्था खुद मजबूत करनी होगी। मर्ज के मुताबिक, अब फैसले साझा नियमों से नहीं, बल्कि ताकत और अपने-अपने हितों के आधार पर लिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा, मर्ज बोले- अमेरिका भी अकेले नहीं चल सकता मर्ज ने कहा कि आज की दुनिया में अमेरिका भी अकेले नहीं चल सकता। उनके मुताबिक, अब हालात ऐसे हो गए हैं कि कोई भी बड़ी ताकत अपने दम पर हर चुनौती का सामना नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि महाशक्तियों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा के इस दौर में अमेरिका को भी सहयोगियों की जरूरत है। सुरक्षा, रक्षा, तकनीक और व्यापार जैसे बड़े मुद्दों पर साझेदारी जरूरी है। सिर्फ ताकत के भरोसे आगे बढ़ना अब संभव नहीं है। मर्ज ने साफ किया कि नाटो सिर्फ यूरोप के लिए नहीं, बल्कि अमेरिका के लिए भी फायदेमंद है। यह गठबंधन दोनों पक्षों को मजबूत बनाता है। इसलिए उन्होंने कहा, “आइए, हम मिलकर ट्रांस-अटलांटिक भरोसे को फिर से मजबूत करें। मर्ज के मुताबिक, यूरोप नाटो के भीतर ही एक मजबूत ताकत बनने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है, ताकि साझेदारी बराबरी की हो। उन्होंने यह भी माना कि मर्ज ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति वेंस को निशाना बनाया मर्ज ने पिछले साल म्यूनिख में अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के बयान का जिक्र करते हुए उन पर खुलकर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “MAGA आंदोलन की सांस्कृतिक लड़ाई हमारी नहीं है।” पिछले साल म्यूनिख सम्मेलन में जेडी वेंस ने यूरोप में अभिव्यक्ति की आजादी, आप्रवासन और पारंपरिक मूल्यों से जुड़े मुद्दों पर टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि यूरोप अपने मूल्यों से दूर जा रहा है और कुछ देशों में फ्री स्पीच सीमित हो रही है। उनके बयान को यूरोपीय नीतियों की आलोचना के तौर पर देखा गया था। मर्ज ने उसी पर जवाब देते हुए कहा कि अमेरिका की ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ (MAGA) राजनीति और उससे जुड़ी सांस्कृतिक बहसें यूरोप की नहीं हैं। उन्होंने साफ किया कि यूरोप में अभिव्यक्ति की आजादी है, लेकिन वह मानव गरिमा और संविधान के खिलाफ नहीं जा सकती। मर्ज के इस बयान को वेंस के बयान पर सीधा पलटवार माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि कि यूरोप अपनी राजनीतिक दिशा खुद तय करेगा और अमेरिका की घरेलू राजनीति से दूरी बनाए रखेगा। फ्रांसीसी राष्ट्रपति बोले- यूरोप को भू-राजनीतिक ताकत बनना होगा फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि अब समय आ गया है कि यूरोप सिर्फ आर्थिक ताकत न रहे, बल्कि रक्षा और तकनीक में भी मजबूत होकर एक भू-राजनीतिक ताकत बने। उनका मतलब था कि यूरोप को वैश्विक फैसलों में ज्यादा प्रभावी भूमिका निभानी होगी। नाटो के महासचिव मार्क रुटे ने भी कहा कि सोच बदल रही है। उनके मुताबिक, यूरोप अब अपनी सुरक्षा को लेकर ज्यादा गंभीर है और नाटो के भीतर नेतृत्व की बड़ी भूमिका निभाने के लिए आगे आ रहा है। सम्मेलन के दौरान मैक्रों ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर और अन्य यूरोपीय नेताओं ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की से मुलाकात की। 1963 से हो रही म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस (MSC) दुनिया की सबसे अहम सुरक्षा बैठकों में से एक है। यह हर साल जर्मनी के शहर म्यूनिख में आयोजित होती है। यहां दुनिया के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, विदेश और रक्षा मंत्री समेत बड़े रणनीतिक विशेषज्ञ शामिल होते हैं। इस सम्मेलन की शुरुआत 1963 में हुई थी। उस समय इसे “इंटरनेशनल डिफेंस कॉन्फ्रेंस” कहा जाता था और यह मुख्य रूप से नाटो देशों के बीच रक्षा सहयोग पर केंद्रित थी। धीरे-धीरे यह मंच वैश्विक स्तर पर सुरक्षा और विदेश नीति की बड़ी बैठक बन गया। इस सम्मेलन में अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन जैसे देशों के शीर्ष नेता हिस्सा लेते हैं। नाटो, यूरोपीय संघ (EU) और संयुक्त राष्ट्र (UN) जैसे संगठनों के प्रमुख भी इसमें शामिल होते हैं। इसके अलावा सुरक्षा विशेषज्ञ, सैन्य अधिकारी, थिंक टैंक और नीति-निर्माता भी यहां मौजूद रहते हैं। म्यूनिख कॉन्फ्रेंस में वैश्विक सुरक्षा से जुड़े बड़े मुद्दों पर चर्चा होती है। नेताओं के बीच आमने-सामने बातचीत, बैक-चैनल डिप्लोमेसी और रणनीतिक संवाद के लिए यह अहम मंच माना जाता है। यह बैठक आमतौर पर फरवरी में होती है और तीन दिन तक चलती है। इसका आयोजन म्यूनिख के होटल बायेरिशर होफ में किया जाता है।

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फाल्गुन मास में क्यों होता है सबसे ज्यादा सर्दी-जुकाम? जानें क्या खाएं और क्या नहीं

नई दिल्ली, 14 फरवरी (आईएएनएस)। बदलती ऋतु के साथ सिर्फ मौसम में ही बदलाव नहीं आता है, बल्कि आहार में भी परिवर्तन लाना जरूरी है।

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Vaibhav Suryavanshi: वैभव सूर्यवंशी नहीं देंगे 10वीं बोर्ड के एग्जाम, सामने आई चौंकाने वाली वजह

Vaibhav Sooryavanshi 10th Board Exam: 14 साल के स्टार बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को लेकर खबर है कि वह इस साल 10वीं बोर्ड के एग्जाम देने वाले हैं. उनका एडमिट कार्ड भी जारी हो चुका है. हालांकि, वह एग्जाम नहीं देंगे. Sat, 14 Feb 2026 15:09:15 +0530

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