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पायलटों की नो-एंट्री...मोदी के दोस्त मैक्रों के देश ने पाकिस्तानियों पर ले लिया होश उड़ाने वाला फैसला

एयर फ़्रांस ने बुधवार को पुष्टि की कि वह इज़राइल के नए प्रतिबंधों का पालन कर रहा है। इन प्रतिबंधों के तहत, उन देशों के पायलट और केबिन क्रू सदस्य इज़राइल के लिए या उसके ऊपर से उड़ान नहीं भर सकते, जिनके इज़राइल के साथ राजनयिक संबंध नहीं हैं। एयर फ़्रांस ने कहा कि उसने पाकिस्तानी पायलटों और क्रू सदस्यों को इज़राइल आने-जाने वाली उड़ानों का संचालन करने से रोक दिया है। इस नीति से पाकिस्तान सहित 31 देशों के नागरिक प्रभावित होते हैं, और इसने फ़्रांसीसी क़ानून के तहत एयरलाइन कर्मचारियों के साथ संभावित भेदभाव को लेकर चिंताएँ पैदा कर दी हैं।

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मुस्लिम-बहुसंख्यक देशों के नागरिकों पर पाबंदियां


अल जज़ीरा की रिपोर्ट के अनुसार, इज़राइली मीडिया और फ्रांसीसी खोजी प्रकाशन 'मीडियापार्ट' द्वारा बताई गई इन पाबंदियों में कई मुस्लिम-बहुसंख्यक देशों के नागरिक शामिल हैं, जिनमें अल्जीरिया, ट्यूनीशिया, ईरान, ओमान, सऊदी अरब, पाकिस्तान और नाइजर शामिल हैं। अल जज़ीरा ने एयर फ्रांस के एक बयान का हवाला देते हुए कहा सभी एयरलाइंस की तरह, एयर फ्रांस के लिए भी उन देशों के अधिकारियों द्वारा तय किए गए प्रवेश नियमों का पालन करना ज़रूरी है जहाँ वह सेवाएँ देती है; यह नियम उसके ग्राहकों और कर्मचारियों, दोनों पर लागू होते हैं। एयरलाइन ने आगे कहा तेल अवीव जाने वाली उड़ानों के लिए इज़राइली अधिकारियों द्वारा लागू किए गए नए नियमों के बारे में संबंधित कर्मचारियों को सूचित कर दिया गया है। यह कदम फ्लाईदुबई की उड़ान में ओमान के को-पायलट द्वारा किए गए हमले के बाद उठाया गया है यह कदम 30 सितंबर को फ्लाईदुबई की एक उड़ान में ओमान के को-पायलट द्वारा किए गए आतंकी हमले की कोशिश के बाद उठाया गया है। ओमान उन देशों में से एक है जिनके इज़राइल के साथ राजनयिक संबंध नहीं हैं। पाकिस्तान सहित 31 देशों के एयरलाइन क्रू पर एयर फ्रांस द्वारा प्रतिबंध लगाने के बाद, शिकागो स्थित यूनाइटेड एयरलाइंस ने अपने पायलटों और केबिन क्रू को इज़राइल आने-जाने वाली उड़ानों के लिए राष्ट्रीयता-आधारित नियमों के बारे में सूचित किया। गौरतलब है कि इन पाबंदियों ने अंतरराष्ट्रीय विमानन पर इनके असर और इस बात पर सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या इज़राइली नियमों का पालन करने के लिए अन्य एयरलाइंस भी ऐसा ही करेंगी। 

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किन देशों के नागरिकों पर इज़राइल की उड़ानों में काम करने पर रोक है?


ch-aviation के अनुसार, यूनाइटेड एयरलाइंस के इंटरनल शेड्यूलिंग मेमो में 29 देशों का ज़िक्र है जिनके नागरिकों को तेल अवीव आने-जाने वाली उड़ानों में काम करने से रोका जा सकता है। इन देशों में अफ़गानिस्तान, अल्जीरिया, बांग्लादेश, ब्रुनेई, कोमोरोस, क्यूबा, ​​जिबूती, इंडोनेशिया, ईरान, इराक, कुवैत, लेबनान, लीबिया, मलेशिया, मालदीव, माली, मॉरिटानिया, नाइजर, उत्तर कोरिया, ओमान, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, सोमालिया, सूडान, सीरिया, ट्यूनीशिया, वेनेजुएला और यमन शामिल हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, FlyDubai पर आतंकी हमले की कोशिश से पहले भी इज़राइल की पाबंदियां लागू थीं, लेकिन उन्हें सख्ती से लागू नहीं किया जाता था। इज़राइली अधिकारी मुख्य रूप से विदेशी एयरलाइंस पर निर्भर थे ताकि यह पक्का किया जा सके कि जिन देशों के साथ इज़राइल के राजनयिक संबंध नहीं हैं, वहां के क्रू मेंबर देश की उड़ानों में शामिल न हों; वे खुद उनकी राष्ट्रीयता की जांच नहीं करते थे।

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पिता Ziaur Rahman दिल्ली आ सकते हैं तो आप क्यों नहीं? BRICS और BIMSTEC बैठकों से बांग्लादेश के किनारा करने पर शेख हसीना के उठाया सवाल

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने नई दिल्ली में ब्रिक्स समिट में शामिल न होने के लिए तारिक रहमान की आलोचना की है और उनके इस फ़ैसले को नासमझ और बांग्लादेश के राष्ट्रीय हितों के ख़िलाफ़ बताया है। उन्होंने सवाल उठाया कि भारत में उनकी मौजूदगी तारिक रहमान को वहां जाने से क्यों रोकेगी, जबकि उनके पिता और बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति ज़ियाउर रहमान ने तब दिल्ली की यात्रा की थी जब वह खुद वहां निर्वासित जीवन जी रही थीं। उनकी यह आलोचना ऐसे समय में आई है जब बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने मंगलवार (13 अक्टूबर) को नई दिल्ली में हुई पहली BIMSTEC गृह मंत्रियों की बैठक में हिस्सा नहीं लिया। नई दिल्ली में हुई बैठकों से बांग्लादेश के दो वरिष्ठ नेताओं के नदारद रहने के कारण, भारत के साथ तनावपूर्ण रिश्तों के बीच ढाका के राजनयिक रुख पर नए सिरे से सवाल उठने लगे हैं।

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14 अक्टूबर को एक इंटरव्यू में हसीना ने पूछा तो दिल्ली में मेरी मौजूदगी ज़ियाउर रहमान के बेटे तारिक रहमान को आज भारत आने से क्यों रोकेगी? ऐसे फ़ैसले के पीछे असली वजह क्या है? उन्होंने नई दिल्ली में निर्वासित जीवन बिताते हुए लिखित सवालों के जवाब दिए। बांग्लादेश ने 12-13 सितंबर को हुए ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में हिस्सा नहीं लिया था। उनका तर्क था कि रहमान को BIMSTEC के अध्यक्ष के तौर पर बुलाया गया था, न कि खास तौर पर बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के तौर पर। ढाका ने भारत से हसीना के प्रत्यर्पण की मांग की है। बांग्लादेश की BNP के नेतृत्व वाली सरकार के मुताबिक, हसीना का नई दिल्ली में लगातार बने रहना दोनों देशों के रिश्तों को बेहतर बनाने में एक बड़ी बाधा है। तारिक रहमान का भारत का दौरा न करना, प्रधानमंत्री बनने के बाद उनके मलेशिया और चीन के दौरों से बिल्कुल अलग है। चीन की नज़र बांग्लादेश में अहम इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर रही है।

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अगस्त 2024 से भारत में रह रहीं शेख हसीना ने दिसंबर 2026 तक बांग्लादेश लौटने का संकल्प लिया है, भले ही उन्हें पता है कि उन्हें गिरफ़्तार किया जा सकता है, जेल हो सकती है या मौत की सज़ा भी मिल सकती है। बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने नवंबर 2025 में हसीना को उनकी गैर-मौजूदगी में मौत की सज़ा सुनाई थी। यह सज़ा जुलाई-अगस्त 2024 में विरोध-प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसक कार्रवाई से जुड़े मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए दी गई थी, जिसमें हिंसा भड़काना, जानलेवा बल प्रयोग का आदेश देना और हत्याओं को रोकने में नाकाम रहना शामिल था।
हसीना ने पूछा ब मैं भारत में थी तब आपके पिता ने भारत का दौरा किया था, तो आप क्यों नहीं आ सकते? हसीना ने लगभग पांच दशक पुरानी बात याद करते हुए रहमान के उस फ़ैसले के पीछे की वजह पर सवाल उठाया, जिसमें उन्होंने नई दिल्ली में अहम बैठकों में हिस्सा नहीं लिया था। अपने इंटरव्यू में हसीना ने याद किया कि ज़ियाउर रहमान (तारिक़ के पिता और बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति) ने 1979 में नई दिल्ली का दौरा किया था। उस समय वह भारत में रह रही थीं, क्योंकि अगस्त 1975 में उनके पिता शेख़ मुजीबुर रहमान और परिवार के कई सदस्यों की हत्या कर दी गई थी। जब उन्होंने 1979 में दिल्ली का दौरा किया, तब मैं दिल्ली में ही रह रही थी। जब उन्होंने 1980 में लंदन की यात्रा की, तब मैं भी लंदन में थी। उन शहरों में मेरी मौजूदगी ने उन्हें वहां जाने से नहीं रोका।

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6 बॉल पर 5 विकेट का बनाया रिकॉर्ड, लेकॉक की लाजवाब गेंदबाजी, 4 बॉलर कर चुके है कारनामा, लिस्ट में 1 भारतीय

chad laycock record: साउथ अफ्रीका के गेंदबाज चैड लेकॉक ने एक ओवर में 5 विकेट लेकर इतिहास रच दिया. लेकॉक ने ओवर की पहली गेंद पर विकेट लिया. दूसरी गेंद पर विकेट नहीं आया. ओवर की बाकी 4 गेंदों में उन्होंने लगातार 4 विकेट लेकर 'डबल हैट्रिक' पूरी कर ली. जैसे लगातार 3 विकेट एक हैट्रिक होती है, वैसे ही लगाार 4 विकेट को डबल हैट्रिक कहा जाता है. ऐसा कारनामा क्रिकेट इतिहास में चुनिंदा गेंदबाज ही कर पाएं है. Wed, 14 Oct 2026 19:05:01 +0530

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