आखिर इस आग में ऐसा क्या है? पूरी दुनिया मोदी-पुतिन के सामने झुक गई?
रूस में लगी आग ने अचानक पूरी दुनिया का ध्यान भारत की तरफ खींच दिया है। यह आग भारत के सबसे अच्छे मित्र देश रूस में लगी है। लेकिन इसी आग का फायदा पुतिन को मिला और ताकत पीएम मोदी को। बहरहाल अब सवाल यह है कि आखिर इस आग में ऐसा क्या है कि पूरी दुनिया पीएम मोदी और पुतिन के सामने झुक गई है? इस बड़े और पेचीदा सवाल का जवाब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद दे दिया है। अमेरिका ने भारत और रूस पर बहुत बड़े बयान दिए हैं। दरअसल यह आग यूक्रेन के हमले के बाद रूस की ऑयल रिफाइनरी में लगी है। यूक्रेन पिछले कई महीनों से लगातार रूस की ऑयल रिफाइनरीज पर ड्रोन से हमले कर रहा है। जिसकी वजह से रूस की डीजल उत्पादन क्षमता में लगभग 30 से 40% की गिरावट आ गई है। अभी तक तो अमेरिका भी यह देखकर हंस रहा था। लेकिन अचानक दुनिया में डीजल सप्लाई कम होने की वजह से सबसे बुरा असर भी अमेरिका पर पड़ गया। दुनिया में डीजल सप्लाई काफी कम हो गई है। रूस की रिफाइनरीज जल रही है तो दूसरी तरफ सऊदी अरब पिट रहा है। इसी बवाल के बीच अमेरिका में 3 नवंबर को मिड टर्म चुनावों के लिए वोटिंग होनी है। इसी वोटिंग से पहले अमेरिका में डीजल की कीमतें अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई हैं।
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अमेरिका में डीजल की औसत कीमत $6.2 से लेकर $6.27 प्रति गैलन के आसपास पहुंच गई है। जो पिछले साल के मुकाबले करीब 65% ज्यादा है। कैलिफोर्निया में तो डीजल की कीमत 8.21 प्रति गैलन है। डीजल के लिए इतना पैसा देना अमेरिका के मिडिल क्लास की हैसियत से बाहर हो गया है। ट्रंप ने कहा है कि यूक्रेन को अब नए राष्ट्रपति की जरूरत है। जेलस्की रूस की ऑयल रिफाइनरीज पर हमला नहीं कर सकते क्योंकि इसकी वजह से पूरी दुनिया परेशान हो रही है। नुकसान भले ही हो रहा है लेकिन जेलस्की के सत्ता परिवर्तन की तैयारी भी शुरू हो गई है। करवाने वाला भी अमेरिका है। यह रूस के लिए बहुत पॉजिटिव खबर है। रूस की ऑयल रिफाइनरीज में आग जरूर लग गई है, लेकिन रूस इसकी भरपाई भारत की मदद से कर रहा है। रूस ने भारत को जमकर कच्चा तेल देने के साथ ही भारत से डीजल लेना भी शुरू कर दिया है। ऑयल रिफाइनरीज ठप पड़ने के बावजूद रूस ने अपने डीजल स्टॉक को जबरदस्त तरीके से बढ़ा लिया है और यह सब कुछ भारत की मदद से हो रहा है। जलती हुई रिफाइनरीज के बावजूद रूस के पास अब इतना डीजल है कि ट्रंप को भी अब रूस से डीजल खरीदने के लिए डील करनी पड़ गई है।
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इस आग का फायदा भारत को क्या हुआ है। ऑयल रिफाइनरीज ठप होने के बाद रूस अपने ही कच्चे तेल को रिफाइन करके डीजल नहीं बना पा रहा। ऑयल रिफाइनरीज ठप होने के बाद रूस दुनिया को डीजल नहीं बेच पा रहा है। ऐसे में यह काम भारत की रिफाइनरीज ने शुरू कर दिया। आज भारत रूस को तो डीजल दे ही रहा है। लेकिन भारत पहली बार अमेरिका को पछाड़ते हुए यूरोप का भी सबसे बड़ा डीजल सप्लायर बन गया है। इसी को देखते हुए अमेरिका ने भारत पर बहुत बड़ा ऐलान किया है। अमेरिकी विदेश मंत्री भारत के दौरे पर आ रहे हैं और वह गुजरात के शहर जामनगर जाएंगे। आपको बता दें कि भारत की सबसे बड़ी ऑयल रिफाइनरीज जामनगर में ही हैं। जामनगर से ही भारत पूरी दुनिया को डीजल और पेट्रोल सप्लाई कर रहा है। यानी आग रूस में लगी। फायदा पुतिन को मिला और ताकत भारत को।
तो लश्कर लेकर घुस जाएगा ईरान! IRGC के प्लान से हिला अमेरिका
अगर अब के ईरान पर हमला हुआ तो ईरान की फौजी अपने पड़ोसी अरब देशों में घुस जाएंगी। यह थ्योरी पहले भी आती रही है, लेकिन इस बार खुद अमेरिकी मीडिया ने इसका आकलन किया है।अमेरिका में वॉलस्टेट जनरल की एक रिपोर्ट में साफ-साफ कहा गया है कि ईरान की 4 लाख की सेना घुस जाएगी और यह बेहद खतरनाक हालात होंगे। दरअसल इस वक्त अमेरिका में मिड टर्म इलेक्शंस की धूम है और कयास यह लग रहे हैं कि इलेक्शन के बाद ट्रंप और ज्यादा ताकत और आक्रामकता के साथ ईरान पर हमला करेंगे। ईरान ट्रंप के गले की फांस बन गया है। 8 माह बाद भी ईरान सिर पर सवार है और उनका इस्लामिक रेवोल्यूशन का नेतृत्व बरकरार है। ऐसे में अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जनरल का यह मानना है कि उनके पास यह रिपोर्ट है कि ईरान यह देखेगा कि मिड टर्म इलेक्शन के बाद प्रेसिडेंट ट्रंप ने ईरान पर अगर इसराइल के साथ मिलकर वापस से अटैक किया तो अबकी बार ईरान अपनी फोर्सेस लेकर पड़ोसी मुस्लिम देशों के अंदर एंटर कर जाएगा।
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अमेरिकी अखबार की ही खबर के मुताबिक इसके लिए ईरान में तैयारियां जबरदस्त है। वहां नौजवानों की फोर्स के लिए हायरिंग लगातार जारी है। जगह-जगह बिलबोर्ड लगाए गए हैं। माहौल बनाया जा रहा है कि लोग फोर्सेस में आए। यूथ को ट्रेनिंग देना भी शुरू कर दिया गया है। यानी ईरान का यह प्लान है कि जितने भी अरब मुल्क हैं और जो यूएस को सपोर्ट करते हैं, वहां ईरान अपनी सेना जमीन पर उतार देगा। 4,20,000 की विशाल आर्मी ईरान के पास ग्राउंड पर है। इसके अलावा रेजिस्टेंस के लाखों लड़ाके जो अलग-अलग देशों में मौजूद हैं एडवांस हथियार और तकनीक के साथ ही बसीजी का एक बहुत बड़ा नेटवर्क जो सुप्रीम लीडर के अंडर काम करते हैं। वॉलस्टेट जनरल की रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि इस बार ईरान बड़े अटैक करेगा। अमेरिकी वॉरशिप या जंगी बेड़ों पर जो ईरान के आसपास के समंदर में तैनात हैं। अखबार का दावा है कि मिड टर्म का इंतजार कर रहे हैं ट्रंप वो और ज्यादा एग्रेसिव मोड में आएंगे इसके बाद। अभी ट्रंप इसलिए थोड़ा शांत दिख रहे हैं कि चुनाव चल रहा है अमेरिका में। वहां उनकी ईरान पर अटैक की नीति का विरोध भी हो रहा है। यही वजह है कि वो एनर्जी क्राइसिस वगैरह को सुधारने में अपना ध्यान लगा रहे हैं ताकि लोगों को शांत कर पाएं।
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अमेरिकी अखबार की इस रिपोर्ट पर मिडिल ईस्ट एक्सपर्ट कहते हैं कि यह तो होना ही है। होर्मुज अब भी ईरान के कंट्रोल में है और ट्रंप खार खाए बैठे हैं कि कोई मुल्क अमेरिका को कैसे मात दे सकता है। यह उनकी अपनी इमेज पर भी दाग होगा। उन्हें अपने कार्यकाल में किसी भी कीमत पर ईरान से इस्लामिक रेवोल्यूशन का खात्मा करना है। अगर वह ना भी चाहें बातचीत से भी मामला सुलझाना चाहें तब भी इसराइल और अरब मुल्क अमेरिका को जाने नहीं देंगे खाली हाथ। ईरान उनके लिए बहुत बड़ा खतरा है। यही वजह है कि सब मिलकर बड़ा हमला कर सकते हैं। लेकिन ईरान भी पहले ही कह चुका है कि अगर हम पर हमला हुआ तो पलटवार दुनिया का भूगोल बदलने वाला होगा। एक्सपर्ट कहते हैं कि ईरान के हिमायती हूतियों के खिलाफ तो यमन में एक मोर्चा खोल भी दिया गया है। अब ईरान पर हमले के बहाने तलाशे जा रहे हैं। अमेरिका की तरफ से जो एक्शन हो रहा है उसे देखते हुए लगता है कि या तो अमेरिका ईरान को डराना चाह रहा है या फिर प्रेशर बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है। इससे ईरान अपनी शर्तों को छोड़कर अमेरिका के हिसाब से समझौते की मेज पर आ जाए। लेकिन जंग का बहाना तलाशने के लिए फ्लाई दुबई प्लेन कांड का सहारा भी लिया जा सकता है। हालांकि ईरान का नाम अमेरिका ले जरूर रहा है शुरू से लेकिन अभी तक पूरी तरह से ईरान को इस वारदात के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है। कहा जा रहा है कि जांच चल रही है। जांच जारी है। लेकिन हो सकता है कि आगे उसी रिपोर्ट के आधार पर ईरान पर हमला हो जाए। इस वारदात का जिम्मेदार ईरान था इसलिए अब हम इस पर अटैक कर रहे हैं। इस तरह का बहाना तलाश लिया जाए। मिडिल ईस्ट एक्सपर्ट कहते हैं कि अमेरिका के इशारों से यह तो दिख रहा है कि जंग के बादल छटे नहीं है और ईरान में आईआरजीसी भी पहले ही धमकी दे चुका है कि अगर इस बार हम पर हमला हुआ तो हमारा पलटवार ज्योग्राफी बदलने वाला होगा। यानी जंग सिर्फ मिडिल ईस्ट तक महदूद नहीं रहेगी बल्कि और आगे बढ़ेगी। सऊदी अरब और यमन के ईरान समर्पित हुती विद्रोहियों के बीच जारी संघर्ष अब एक खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है।
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