ड्रग एक्टिविस्ट की हत्या पर AAP सरकार पर बरसी Punjab BJP, CM के इस्तीफे की मांग
पंजाब के मानसा में ड्रग्स-विरोधी एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा की हत्या की शुरुआती जांच में निजी दुश्मनी को वजह माना जा रहा है। इसे देखते हुए पंजाब बीजेपी अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने गवर्नर गुलाब चंद कटारिया को पत्र लिखकर CBI जांच की मांग की है और सवाल उठाया है कि क्या राज्य सरकार निष्पक्ष जांच सुनिश्चित कर सकती है। बात में प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि आपने कल मानसा में हुई घटना देखी होगी। परमिंदर जोटा—जो नशीली दवाओं के खिलाफ़ काम करने वाले एक एक्टिविस्ट थे—की गोली मारकर हत्या कर दी गई।
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भाजपा नेता ने दावा किया कि पंजाब में शायद ही कोई ऐसा दिन गुज़रता हो जब लोगों की गोली मारकर हत्या की खबर न सुनने को मिले। कानून-व्यवस्था की हालत बहुत खराब है। पंजाब कई समस्याओं से जूझ रहा है, लेकिन सबसे बड़ी समस्या नशीली दवाओं का खतरा है; बीजेपी ने इससे निपटने के लिए एक बड़ा अभियान भी चलाया था... हमने चार अलग-अलग दिशाओं से यह अभियान शुरू किया और जालंधर में इसका समापन किया, जहाँ हमारे गृह मंत्री अमित शाह ने एक बड़ी जनसभा को संबोधित किया। उन्होंने लोगों को भरोसा दिलाया कि सिर्फ़ बीजेपी ही इस समस्या को जड़ से खत्म कर सकती है।
उन्होंने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री ने पिछले महीने और इस महीने भी अपने 'मन की बात' कार्यक्रम में बार-बार कहा है कि वे भारत से नशीली दवाओं को पूरी तरह खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध हैं... परमिंदर जोटा एक ऐसी केमिस्ट शॉप के बाहर खड़े थे जो नशीली दवाएं बेचने के लिए बदनाम थी—उन्होंने अभी-अभी किसी को नशीली दवाएं खरीदते हुए पकड़ा ही था—तभी उनकी हत्या कर दी गई... इसके लिए कौन ज़िम्मेदार है? आम आदमी पार्टी की सरकार।
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उन्होंने कहा कि हत्या के बाद उनके (परमिंदर जोटा के) पिता ने जो कहा, वह और भी चिंताजनक है: उन्होंने कहा कि यह सब स्थानीय विधायक की मिलीभगत से हो रहा है। मैंने तुरंत गवर्नर को पत्र लिखा... हमने मांग की कि इस पूरे मामले की जांच CBI को सौंपी जाए। आज हम पंजाब के हर जिले में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं... आज सुबह, BSF के जवानों ने पंजाब पुलिस के एक अधिकारी को 15 किलोग्राम हेरोइन के साथ पकड़ा। वह VIP काफिले में ड्यूटी पर था; पंजाब पुलिस के कर्मचारी ही ड्रग्स के कारोबार में मदद कर रहे हैं। इसके लिए कौन जिम्मेदार है? पंजाब के मुख्यमंत्री, जिनके पास गृह विभाग भी है। ड्रग्स से रोज़ हो रही मौतों और बिगड़ती कानून-व्यवस्था—जिसमें गैंगस्टरों का बोलबाला है—को देखते हुए मुख्यमंत्री को पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है, और हम उनके तुरंत इस्तीफे की मांग कर रहे हैं... कल अमृतसर में Yes बैंक के एक मैनेजर को गोली मार दी गई। फिर, आज सुबह मोहाली में एक घर के अंदर मुठभेड़ के दौरान गोलियां चलीं... पंजाब में हालात बहुत खराब हैं।
LAC पर अमन-चैन बिना China संग रिश्ते सामान्य होना मुश्किल: S Jaishankar
(फाइल फोटो के साथ जारी) नयी दिल्ली, 14 अक्टूबर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि भारत और चीन के बीच संबंध सामान्य बनाने के लिए वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर स्थिति का स्थिर रहना जरूरी है और सीमा पर किसी भी तरह की गड़बड़ी का असर दोनों देशों के संबंधों पर पड़ेगा। जयशंकर ने दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश संबंधों के विस्तार को भी सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने से जोड़ा। उन्होंने कहा, ‘‘हम चीन से यही कहते हैं कि यदि आप सामान्य संबंध चाहते हैं और अन्य क्षेत्रों में भी संबंधों को आगे बढ़ाना चाहते हैं, तो यह जाहिर सी बात है कि सीमा पर स्थिति स्थिर रहनी चाहिए और हमें सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति एवं स्थिरता की आवश्यकता है।’’ जयशंकर ने मंगलवार शाम ‘ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम’ में कहा कि 2024 के बाद से एलएसी पर स्थिति काफी हद तक सामान्य हुई है और ‘‘उसी के अनुरूप दोनों देशों के संबंध भी सामान्य होने की दिशा’’ में आगे बढ़ रहे हैं।
दोनों देशों ने आपसी संबंध सुधारने के लिए पिछले कुछ महीनों में विश्वास बहाली के कई कदम उठाए हैं। पूर्वी लद्दाख में साढ़े चार साल से अधिक समय तक बने रहे सैन्य गतिरोध के कारण दोनों देशों के संबंधों में तनाव आ गया था। यह गतिरोध 2024 के अंत में समाप्त हुआ था।
यह पूछे जाने पर कि सीमा विवाद से जुड़े कुछ मुद्दों पर शुरुआती समझौता (अर्ली हार्वेस्ट) होने की स्थिति में क्या भारत अधिक चीनी निवेश की अनुमति देगा, जयशंकर ने कहा कि विभिन्न संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘हम इन संभावनाओं पर फिलहाल विचार कर रहे हैं और देखना होगा कि बात कहां तक आगे बढ़ती है लेकिन हम इस बात पर जोर नहीं दे रहे कि व्यापार करने के लिए पहले सीमा विवाद का समाधान करना जरूरी है।’’ जयशंकर ने कहा, ‘‘हमारी अपेक्षा इतनी बड़ी नहीं है। हम केवल इतना चाहते हैं कि सीमा पर शांति और स्थिरता बनी रहे।
सीमा विवाद के कुछ मुद्दों पर शुरुआती समझौते को मैं इस विवाद के समाधान के अलावा किसी अन्य मुद्दे से नहीं जोड़ूंगा। व्यापार और बाजार तक पहुंच से जुड़ी नीतियों के बारे में अलग से फैसला किया जाएगा।’’ विदेश मंत्री ने चीन के साथ आर्थिक संबंधों को लेकर चिंताएं भी जताईं। उन्होंने कहा, ‘‘चीन के साथ हमारे सामने कई बड़ी आर्थिक समस्याएं भी हैं।
यदि आज आप दोनों देशों के बीच व्यापार संतुलन को देखें, तो यह पूरी तरह (चीन के पक्ष में) झुका हुआ है।’’ जयशंकर ने कहा, ‘‘यह असंतुलन बहुत अधिक है। कई ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें हमने दुनिया के अन्य देशों में अच्छा प्रदर्शन किया है, लेकिन चीन के बाजार में हमें प्रवेश नहीं मिला है और हम वहां उन क्षेत्रों में सफलतापूर्वक कारोबार भी नहीं कर पाए हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमारा मानना है कि हमने चीन को अपने यहां कारोबार के लिए जितने समान अवसर दिए हैं, उतने अवसर हमें चीन में नहीं मिल रहे हैं।’’ जयशंकर ने 2020 में गलवान घाटी में हुई झड़पों का भी जिक्र किया और बताया कि इनके कारण दोनों देशों के संबंधों में किस तरह गंभीर तनाव पैदा हो गया था। उन्होंने कहा, ‘‘1975 से 2020 तक, यानी पूरे 45 साल तक उस सीमा पर खून नहीं बहा।
इससे पहले आखिरी बार 1975 में सीमा पर लोगों की जान गई थी। इस दौरान भारत और चीन के संबंध आगे बढ़े थे।’’ जयशंकर ने कहा, ‘‘इसके बाद 2020 में जब कोविड महामारी के कारण लॉकडाउन लागू था, तब सीमा पर एक के बाद एक कई विवाद हुए और स्थिति ऐसी झड़प तक पहुंच गई, जिसमें दोनों पक्षों के कई सैनिक मारे गए।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमारे लिए यह 1975 से बरकरार स्थिति में एक बहुत बड़ा बदलाव था। यदि सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थिति बिगड़ती है, तो इसका असर दोनों देशों के संबंधों पर पड़ेगा।’’ जयशंकर ने कहा कि इसके बाद के कुछ वर्षों में दोनों देशों के संबंधों पर इसका असर साफ दिखाई दिया और सीमा पर शांति एवं स्थिरता बहाल होने तक यह स्थिति बनी रही।
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