Dollar की कमर टूटी! शुरुआती कारोबार में Rupee ने पकड़ी रफ्तार, 90.40 के स्तर पर पहुंचा।
रुपया बृहस्पतिवार को शुरुआती कारोबार में 38 पैसे चढ़कर 90.40 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। विदेशी निवेश प्रवाह और केंद्रीय बैंक के संभावित हस्तक्षेप से इसे समर्थन मिला है। विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने बताया कि विदेशी निवेश प्रवाह हालांकि बहुत अधिक नहीं है, लेकिन इसने एक मनोवैज्ञानिक स्थिरता प्रदान की है। इसके अलावा, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) चुपचाप यह सुनिश्चित कर रहा है कि बैंकों पर्याप्त नकदी बनी रहे। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 90.55 पर खुला।
फिर इसने गति पकड़ी और 90.40 तक पहुंच गया जो पिछले बंद भाव से 38 पैसे की वृद्धि दर्शाता है। रुपया प्रारंभिक कारोबार में अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले 90.56 तक भी पहुंचा। रुपया बंधवार को 22 पैसे की गिरावट के साथ 90.78 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। इस बीच, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.05 प्रतिशत की गिरावट के साथ 96.78 पर रहा। घरेलू शेयर बाजारों में सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 349.87 अंक टूटकर 83,883.77 अंक पर जबकि निफ्टी 106.60 अंक फिसलकर 25,847.25 अंक पर पहुंच गया।
अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड का भाव 0.42 प्रतिशत की बढ़त के साथ 69.69 डॉलर प्रति बैरल रहा। शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) बुधवार को लिवाल रहे थे और उन्होंने 943.81 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।
राज्यों के Tax Share पर Nirmala Sitharaman का विपक्ष को जवाब, एक भी रुपया कम नहीं किया
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्यों को केंद्र से उनकी कर हिस्सेदारी का हस्तांतरण नहीं होने संबंधी कुछ विपक्षी सांसदों के आरोपों को खारिज करते हुए बुधवार को कहा कि सरकार ने केंद्रीय करों के विभाज्य पूल में से किसी राज्य का हिस्सा नहीं घटाया है। सीतारमण ने लोकसभा में वित्त वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए यह भी कहा कि सरकार ने बजट में पांच मेडिकल क्लस्टर, पांच मेगा औद्योगिक पार्क, बुजुर्गों के देखभाल के लिए पेशेवरों को तैयार करने जैसी कई घोषणाएं की हैं जिनसे लाखों रोजगारों का सृजन होगा।
उन्होंने कहा, ‘‘हम पर आरोप लगता है कि हम राज्यों की 41 प्रतिशत कर हिस्सेदारी का हस्तांतरण नहीं करते। मैं सदन के माध्यम से आश्वासन देती हूं कि हमने केंद्रीय करों में राज्यों को मिलने वाली हिस्सेदारी में से किसी राज्य का हिस्सा नहीं घटाया है।’’ वित्त मंत्री ने कहा कि 16वें वित्त आयोग ने 2018-19 से 2022-23 तक राज्यों की कर हिस्सेदारी का विश्लेषण किया और निष्कर्ष निकाला कि केंद्र से राज्यों को मिलने वाला यह धन आयोग की सिफारिश से पूरी तरह मेल खाता है और इसमें कोई कमी नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि अगले वित्त वर्ष में राज्यों को कुल कर हस्तांतरण 25.44 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है जो चालू वित्त वर्ष की तुलना में 2.07 लाख करोड़ रुपये अधिक होगा। सीतारमण ने कहा कि संविधान ने केंद्र को उपकर और अधिशेष लगाने का अधिकार दिया है और विभाज्य पूल में वह शामिल नहीं होता है, इसलिए राज्यों की कुल कर हिस्सेदारी की बात करते समय उपकर और अधिशेष संबंधी आरोप अनुचित हैं।
उन्होंने कहा कि केंद्र जो उपकर वसूलता है उसमें से भी राज्यों को अस्पताल, स्कूल और सड़क आदि के निर्माण के लिए सहायता देता है। सीतारमण ने कहा कि सरकार ने अगले वित्त वर्ष के लिए कुल 53.47 लाख करोड़ रुपये के व्यय का अनुमान लगाया है, जो 31 मार्च को समाप्त हुए मौजूदा वित्तीय वर्ष की तुलना में 7.7 प्रतिशत अधिक है। संशोधित अनुमान के अनुसार, चालू वित्त वर्ष का बजट 49.64 लाख करोड़ रुपये है, जो फरवरी, 2025 में अनुमानित 50.65 लाख करोड़ रुपये से कम है। वित्त वर्ष 2024-25 का बजट 46.52 लाख करोड़ रुपये का था। वित्त मंत्री ने कहा कि अगले वित्त वर्ष में कुल व्यय 53.47 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जो कर राजस्व से कहीं अधिक है। सरकार का लक्ष्य 44.04 लाख करोड़ रुपये का कर राजस्व प्राप्त करना है, जो पिछले वर्ष की तुलना में आठ प्रतिशत अधिक है। उन्होंने पूंजीगत व्यय का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार ने 12.2 लाख करोड़ रुपये का अब तक का सबसे अधिक आवंटन किया है, जो जीडीपी का 4.4 प्रतिशत है।
सीतारमण ने कहा कि इसके अलावा, सरकार राजकोषीय अनुशासन का पालन कर रही है और वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.3 प्रतिशत यानी 16.95 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। राजकोषीय घाटे के वित्तपोषण के लिए, दिनांकित प्रतिभूतियों के जरिये शुद्ध बाजार उधारी 11.7 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। शेष वित्त पोषण लघु बचत और अन्य स्रोतों से आने की उम्मीद है। सकल बाजार उधारी 17.2 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि ऋण-जीडीपी अनुपात को कम करने पर ध्यान केंद्रित करना राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन (एफआरबीएम) का हिस्सा है। राजकोषीय प्रबंधन के स्वीकृत मानकों की ओर बढ़ने के लिए, 2025-26 के बजट में उन्होंने संकेत दिया था कि केंद्र सरकार 2030-31 तक ऋण-जीडीपी अनुपात को एक प्रतिशत घट-बढ़ के साथ 50 प्रतिशत तक लाने का लक्ष्य रखेगी।
इसी के अनुरूप, 2026-27 के बजट में ऋण-जीडीपी अनुपात जीडीपी का 55.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि 2025-26 के बजट में यह जीडीपी का 56.1 प्रतिशत था। ऋण-जीडीपी अनुपात में कमी से ब्याज भुगतान पर होने वाला खर्च कम होगा और प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के व्यय के लिए संसाधन उपलब्ध होंगे। उन्होंने देश में उर्वरकों की कमी के दावों का खंडन करते हुएकहा कि किसानों के लिए पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध है और सरकार ने किसानों की सहायता के लिए इसके आयात को 1.71 लाख करोड़ रुपये का बजटीय आवंटन किया है। सीतारमण ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी के इस दावे का भी खंडन किया कि भारत ने अमेरिका के साथ अंतरिम व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करते समय अमेरिकी दबाव के आगे घुटने टेक दिए। केंद्रीय मंत्री किरेन रीजीजू की बातों को दोहराते हुए वित्त मंत्री ने कहा, ‘‘कोई माई का लाल पैदा नहीं हुआ जो हमारे देश को बेच या खरीद सके।’’
वित्त मंत्री ने कहा कि वास्तव में कांग्रेस के नेतृत्व वाली संप्रग सरकार ने विश्व व्यापार संगठन के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था और गरीबों और किसानों को बेच दिया था। अपने जवाब में उन्होंने पश्चिम बंगाल की टीएमसी सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि राज्य में कानून नहीं, बम का राज है। राज्य में खराब कानून व्यवस्था पर अफसोस जताते हुए उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इसे सुधारने के बजाय महिलाओं को रात में घर के अंदर रहने के लिए कह रही हैं। पश्चिम बंगाल में अगले दो महीनों में चुनाव होने वाले हैं।
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