केरल : हाई कोर्ट ने डिपोर्ट किए गए भारतीय नागरिक की मौत की जांच जारी रखने का आदेश दिया
कोच्चि, 11 फरवरी (आईएएनएस)। केरल हाई कोर्ट ने बुधवार को कुवैत से डिपोर्ट किए गए भारतीय नागरिक सूरज लामा के लापता होने और मौत के संबंध में दायर हेबियस कॉर्पस याचिका को बंद करने से इनकार कर दिया।
जस्टिस देवन रामचन्द्रन और जस्टिस एम.बी. स्नेहलता की डिवीजन बेंच ने विशेष जांच दल (एसआईटी) को अपनी जांच जारी रखने का निर्देश दिया।
कोर्ट ने कहा कि लामा के भारत आने से लेकर उनकी बॉडी मिलने तक, पूरे घटनाक्रम की जांच की जानी चाहिए और उसे ठीक से डॉक्यूमेंट किया जाना चाहिए।
लामा को कुवैत से डिपोर्ट करके ऑफिशियल ऑर्डर पर कोच्चि भेजा गया।
कोर्ट ने कहा कि वह कमजोर लग रहा था और उसे सोचने-समझने या दूसरी दिक्कतें हो सकती थीं। इसके बावजूद, इमिग्रेशन और एयरपोर्ट अथॉरिटी ने उसे क्लियरेंस दे दिया और बिना किसी मदद के एयरपोर्ट से जाने दिया।
गुमशुदगी की शिकायत दर्ज होने के बाद, पुलिस ने उसे प्रोटेक्टिव कस्टडी में ले लिया और कलामस्सेरी मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में भर्ती कराया।
बाद में उसे छुट्टी दे दी गई क्योंकि डॉक्टरों को कथित तौर पर कोई मेडिकल दिक्कत नहीं मिली। इसके बाद, कलामस्सेरी से एक बॉडी मिली। एक फोरेंसिक रिपोर्ट ने कन्फर्म किया कि वह लामा ही था।
सरकारी वकील ने कोर्ट को बताया कि 1 दिसंबर, 2025 की अंतरिम पोस्ट-मॉर्टम रिपोर्ट में कहा गया है कि लाश के बहुत ज्यादा सड़ने की वजह से मौत का कारण पता नहीं चल सका।
कोर्ट ने कहा कि मामला अभी भी पूरी तरह खुला है क्योंकि मौत का कारण अभी भी पता नहीं है। सिर्फ इसलिए याचिका बंद नहीं की जा सकती क्योंकि लाश की पहचान हो गई है। बेंच ने जांच अधिकारी को गुम केस फाइल और पोस्ट-मॉर्टम रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया।
कोर्ट ने सिटी पुलिस कमिश्नर या उसके बराबर रैंक के अधिकारी की अगुवाई वाली एसआईटी से भी जांच जारी रखने को कहा।
कोर्ट ने इमिग्रेशन क्लियरेंस, पुलिस हैंडलिंग और मेडिकल केयर सहित कई स्टेज पर चूक के आरोपों पर ध्यान दिया।
कोर्ट ने याचिकाकर्ता के इस दावे को भी दर्ज किया कि हत्या की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने साफ किया, हम हत्या की जांच नहीं कर रहे हैं। हम लाश मिलने तक सीक्वेंस की जांच कर रहे हैं।
मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद तय की गई है।
--आईएएनएस
एससीएच
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
सीबीआई ने रिश्वत के मामले में दिल्ली जल बोर्ड के कर्मचारी को किया गिरफ्तार
नई दिल्ली, 11 फरवरी (आईएएनएस)। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने रिश्वतखोरी के मामले में दिल्ली जल बोर्ड सीलमपुर में तैनात एक चपरासी सह असिस्टेंट मीटर रीडर और एक अन्य व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपियों को शिकायतकर्ता से रिश्वत मांगते और लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया।
सीबीआई ने 8 फरवरी को एक लिखित शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि दिल्ली जल बोर्ड के कर्मचारी ने शिकायतकर्ता के घर के बकाया पानी के बिल को ठीक करने और माफ कराने के एवज में 12,000 रुपए की रिश्वत की मांग की। आरोप के अनुसार, आरोपी ने 3 फरवरी को शिकायतकर्ता से 5,500 रुपए ले लिए थे और शेष 6,500 रुपए की मांग की थी।
सीबीआई ने 9 फरवरी को जाल बिछाकर कार्रवाई की और आरोपी चपरासी सह असिस्टेंट मीटर रीडर विनोद कुमार तथा उसके साथ शामिल निजी व्यक्ति नितिन कुमार को शिकायतकर्ता से 6,500 रुपए की रिश्वत मांगते और स्वीकार करते हुए गिरफ्तार कर लिया। दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर आगे की पूछताछ की जा रही है।
सीबीआई ने कहा कि भ्रष्ट सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ यह कार्रवाई भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के उसके दृढ़ संकल्प को दर्शाती है। एजेंसी ने नागरिकों से अपील की है कि यदि कोई सरकारी अधिकारी उनसे रिश्वत मांगता है या भ्रष्टाचार से जुड़ा कोई मामला सामने आता है तो इसकी सूचना तत्काल दें।
शिकायत दर्ज कराने या आवश्यक जानकारी साझा करने के लिए नागरिक सीबीआई, एसीबी दिल्ली कार्यालय, पहली मंजिल, सीबीआई बिल्डिंग, सीजीओ कॉम्प्लेक्स, लोधी रोड, नई दिल्ली में संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा 011-24367887 और मोबाइल नंबर 9650394847 पर भी सूचना दी जा सकती है।
इससे पहले, सीबीआई ने दिल्ली पुलिस के एक सहायक उप-निरीक्षक (एएसआई) को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोपी एएसआई पर आरोप है कि उसने एक मामले को निपटाने के एवज में शिकायतकर्ता से मोटी रकम की मांग की थी, जिसमें से कुछ हिस्सा एडवांस में लेते हुए वह पकड़ा गया।
--आईएएनएस
एएसएच/एबीएम
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