जिम्बाब्वे में इतिहास रचकर लौटे भारत अंडर-19 टीम के कप्तान आयुष म्हात्रे अब मुंबई में हैं और उनकी यह वापसी यादगार पलों से भरी रही। बता दें कि उनकी अगुवाई में भारतीय टीम ने इंग्लैंड को फाइनल में सात विकेट से हराकर आईसीसी अंडर-19 विश्व कप का खिताब रिकॉर्ड छठी बार जीता है।
स्वदेश लौटने के बाद आयुष ने भारतीय क्रिकेट के सबसे बड़े नाम सचिन तेंदुलकर से मुलाकात की। यह मुलाकात युवा कप्तान के लिए खास बन गई, जब मास्टर ब्लास्टर ने उन्हें अपनी टेस्ट जर्सी भेंट की। जर्सी पर सचिन तेंदुलकर ने हाथ से लिखा संदेश भी दिया, जिसमें उन्होंने आयुष के उज्ज्वल करियर की कामना की।
आयुष म्हात्रे ने इस पल को सोशल मीडिया पर साझा करते हुए भावुक शब्दों में लिखा कि वह बचपन में सचिन को स्क्रीन पर देखा करते थे और आज उनके घर पर खड़े होकर उनके सफर का एक हिस्सा हाथ में पकड़े हैं। उन्होंने इस सम्मान को जीवन भर संजोकर रखने की बात कही।
गौरतलब है कि विश्व कप जीत के बाद आयुष और उनके साथी खिलाड़ी उधव मोहन का अपने-अपने घरों में जोरदार स्वागत किया गया। मुंबई के विरार में आयुष को स्थानीय नायक की तरह सम्मान मिला, जहां परिवार, दोस्त और पड़ोसी बड़ी संख्या में जुटे। वहीं, उधव मोहन को नई दिल्ली में गर्मजोशी से स्वागत मिला।
मौजूद जानकारी के अनुसार आयुष म्हात्रे ने नॉकआउट मुकाबलों में टीम को आगे से लीड किया। उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ फाइनल में 51 गेंदों पर 53 रन बनाए, जबकि अफगानिस्तान के खिलाफ सेमीफाइनल में 59 गेंदों पर 62 रन की अहम पारी खेली। पूरे टूर्नामेंट में उन्होंने सात पारियों में 214 रन बनाए और भारत के चौथे सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज रहे।
हालांकि, टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा चर्चा वैभव सूर्यवंशी के प्रदर्शन की रही। उन्होंने 439 रन बनाकर प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट का पुरस्कार जीता। फाइनल में उनकी 175 रन की विस्फोटक पारी ने कई अंडर-19 विश्व कप रिकॉर्ड तोड़े, जिसमें 15 चौके और 15 छक्के शामिल रहे।
कुल मिलाकर यह जीत सिर्फ एक ट्रॉफी नहीं, बल्कि भारतीय क्रिकेट के भविष्य की मजबूत झलक मानी जा रही है, जिसमें आयुष म्हात्रे जैसे युवा नेतृत्वकर्ता अहम भूमिका निभाते नजर आ रहे हैं।
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दिल्ली में इन दिनों क्रिकेट का बड़ा आयोजन चल रहा है, लेकिन हर मैच के साथ उत्साह वैसा नहीं दिख रहा। दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ इस हफ्ते एक अजीब स्थिति से जूझ रहा है, क्योंकि अरुण जेटली स्टेडियम में खेले जा रहे आईसीसी टी20 विश्व कप 2026 के पांच मैचों में दर्शकों की मौजूदगी असमान नजर आ रही है।
बता दें कि सबसे बड़ी चुनौती हमेशा की तरह भारत का मुकाबला ही है, लेकिन इस बार वजह उलट है। 12 फरवरी को भारत और नामीबिया के बीच खेले जाने वाले टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच के लिए टिकटों की जबरदस्त मांग देखने को मिली है। टिकट पहले ही बिक चुके हैं और मान्यता पास की मांग उम्मीद से कहीं ज्यादा पहुंच गई है।
इसके उलट गैर-भारत मुकाबलों के लिए तस्वीर बिल्कुल अलग है। मौजूद जानकारी के अनुसार DDCA अधिकारियों को स्कूलों से संपर्क कर छात्रों को मुफ्त प्रवेश देने की जिम्मेदारी दी गई थी, ताकि स्टेडियम में खाली सीटों से बचा जा सके। शर्त यह रखी गई थी कि छात्र स्कूल यूनिफॉर्म में हों और शिक्षकों के साथ आएं।
हालांकि यह योजना ज्यादा सफल नहीं हो सकी। गौरतलब है कि अगले हफ्ते से कक्षा 10 और 12 की सीबीएसई बोर्ड परीक्षाएं शुरू हो रही हैं और कई स्कूलों में इस समय वार्षिक परीक्षाएं भी चल रही हैं। ऐसे में ज्यादातर स्कूलों ने छात्रों को मैच दिखाने से साफ इनकार कर दिया।
DDCA से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक भारत के मैच को छोड़ दें तो बाकी मुकाबलों के लिए टिकटों की कोई खास मांग नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में नेपाल जैसे देशों के समर्थकों की भारी मौजूदगी देखी गई थी, लेकिन दिल्ली में वैसा माहौल बनने की उम्मीद कम है।
समस्या को और बढ़ा रहा है मैचों का शेड्यूल। गैर-भारत मुकाबले लगभग सभी वीकडे पर रखे गए हैं और उनमें से ज्यादातर सुबह 11 बजे या दोपहर 3 बजे शुरू हो रहे हैं। ऐसे समय में कामकाजी लोग और युवा दर्शक स्टेडियम तक पहुंचने में रुचि नहीं दिखा रहे।
आयोजकों की चिंता यह भी है कि खाली स्टैंड्स टीवी प्रसारण के लिहाज से अच्छी तस्वीर पेश नहीं करते। यही वजह है कि स्कूलों के छात्रों को लाने का विचार सामने आया था, लेकिन मौजूदा परीक्षा सत्र ने इस योजना पर पानी फेर दिया।
कुल मिलाकर दिल्ली में एक बार फिर यह सच्चाई सामने आई है कि वैश्विक टूर्नामेंट में मेजबान देश के बिना दर्शकों की रुचि बनाए रखना आसान नहीं होता, और यही चुनौती इस समय DDCA के सामने खड़ी है।
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