पाकिस्तान में आईएसआईएस-के की संभावित पुनर्सक्रियता से क्षेत्रीय सुरक्षा पर खतरा: रिपोर्ट
इस्लामाबाद, 11 फरवरी (आईएएनएस)। पाकिस्तान में इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत (आईएसआईएस-के/आईएसकेपी) की गतिविधियों में संभावित पुनरुत्थान से व्यापक क्षेत्रीय सुरक्षा को खतरा पैदा हो सकता है, जिसमें भारत भी शामिल है। एक रिपोर्ट में बुधवार को यह चिंता जताई गई।
‘इंडिया नैरेटिव’ में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, आईएसआईएस-के पारंपरिक प्रभाव क्षेत्र से बाहर अपनी मौजूदगी दोबारा स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि पाकिस्तान गुप्त रूप से आईएसकेपी के साथ फिर से समझौता करने और उसकी गतिविधियों को कश्मीर की ओर मोड़कर भारत के खिलाफ इस्तेमाल करने की कोशिश करता है, तो जोखिम और बढ़ सकता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत को आईएसकेपी की गतिविधियों का आकलन करते समय पूरी सतर्कता बरतनी चाहिए, क्योंकि पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा अस्थिरता सीमा-पार आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा दे सकती है और भारत के खिलाफ नए आतंकी नेटवर्क के उभरने में सहायक हो सकती है।
रिपोर्ट में उल्लेख किया गया कि लगभग पांच साल बाद आईएसआईएस ने उपमहाद्वीप में एक बड़े हमले को अंजाम दिया, जिसमें पाकिस्तान की एक शिया मस्जिद को निशाना बनाया गया। इस हमले में 30 से अधिक लोगों की मौत हुई और करीब 170 लोग घायल हुए। इससे पहले 2023 में खार बम धमाके, 2022 में पेशावर मस्जिद हमला (जिसमें 60 से अधिक लोग मारे गए थे) और 2021 में अमेरिका की अफगानिस्तान से वापसी के दौरान एबी गेट बम धमाका (जिसमें 170 से अधिक लोग मारे गए थे) जैसे हमले हुए थे।
रिपोर्ट के मुताबिक, दो साल बाद आईएसआईएस-के ने इतना बड़ा आत्मघाती हमला किया, वह भी उस समय जब उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति पाकिस्तान के दौरे पर थे। रिपोर्ट में कहा गया कि इसे केवल एक अलग-थलग आतंकी घटना मानना उचित नहीं होगा, बल्कि दक्षिण एशिया में अपनी पकड़ मजबूत करने की आईएसआईएस-के की कोशिशें क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चेतावनी हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि हालिया इस्लामाबाद मस्जिद हमला ऐसे समय हुआ जब बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने 31 जनवरी से 8 फरवरी तक ‘ऑपरेशन हेरोफ’ का दूसरा चरण शुरू किया था। इसे पाकिस्तान में सुरक्षा शून्य का फायदा उठाने का उदाहरण बताया गया है।
रिपोर्ट में विभिन्न स्रोतों का हवाला देते हुए दावा किया गया कि 2017 में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने आईएसआईएस के साथ एक गुप्त समझौता किया था, जिसके तहत आतंकी संगठन ने पाकिस्तान में हमला न करने और अपनी गतिविधियों को अफगानिस्तान तक सीमित रखने पर सहमति जताई थी। इसके बावजूद आईएसकेपी ने बलूचिस्तान के मस्तुंग जिले में बलूच अवामी पार्टी (बीएपी) की एक राजनीतिक रैली में आत्मघाती हमला किया।
रिपोर्ट में कहा गया कि 2020 तक आईएसकेपी ने सीधे तौर पर पाकिस्तानी प्रतिष्ठानों को निशाना नहीं बनाया, लेकिन यह तर्क दिया गया कि गुप्त संपर्कों के माध्यम से पाकिस्तान ने आईएसकेपी को तालिबान और बलूच समूहों के खिलाफ एक प्रॉक्सी के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिश की। अफगानिस्तान में आईएसकेपी की गतिविधियों को सहन करना पाकिस्तान के लिए दोहरे रणनीतिक लाभ का माध्यम बताया गया—पहला, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) और बीएलए के खिलाफ परोक्ष युद्ध, और दूसरा, आईएसकेपी सदस्यों की गिरफ्तारी व प्रत्यर्पण के जरिए कूटनीतिक लाभ हासिल करना।
रिपोर्ट में मार्च 2025 में आईएसकेपी कमांडर मोहम्मद शरीफुल्लाह की गिरफ्तारी और अमेरिका को प्रत्यर्पण का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि रिपोर्ट के अनुसार, आईएसकेपी के साथ इस तरह के गुप्त सहयोग से पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था को उल्टा नुकसान हुआ है और यह दांव विफल साबित हो रहा है।
रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला गया कि आईएसआईएस-के की संभावित पुनर्सक्रियता न केवल पाकिस्तान बल्कि पूरे दक्षिण एशियाई क्षेत्र की सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है।
--आईएएनएस
डीएससी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
ट्रंप प्रशासन का बड़ा फैसला: ओबामा की क्लाइमेट पॉलिसी को करेगा रद्द, अमेरिका में बढ़ी हलचल
नई दिल्ली, 11 फरवरी (आईएएनएस)। मेक अमेरिका ग्रेट अगेन की बात करने वाले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर्यावरण संबंधी चुनौतियों को भी दरकिनार करने से पिछड़ नहीं रहे हैं। ट्रंप प्रशासन ने ऐलान किया है कि वह इस सप्ताह एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए 2009 में स्थापित ‘एंडेंजर्मेंट फाइंडिंग’ को रद्द करने जा रहा है, जो दशकों से अमेरिकी क्लाइमेट नियमों का मूल कानूनी आधार रहा है।
2009 का यह वैज्ञानिक निर्णय, जिसे एंडेंजर्मेंट फाइंडिंग कहा जाता है, इस बात का औपचारिक सरकारी निर्धारण था कि कार्बन डाइऑक्साइड (सीओ2) और अन्य ग्रीनहाउस गैसें सार्वजनिक स्वास्थ्य और सामान्य कल्याण के लिए खतरा हैं। इसी आधार पर पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (ईपीए) को यह अधिकार मिला कि वह क्लीन एयर एक्ट के तहत वाहनों, उद्योगों और पावर प्लांटों के लिए उत्सर्जन-नियमन और ग्रीनहाउस गैस नियंत्रण नियम बनाए।
ट्रंप प्रशासन का कहना है कि इस फाइंडिंग को हटाने से व्यवसायों और आम जनता पर नियमों के आर्थिक बोझ में राहत मिलेगी और ऊर्जा-उत्पादन को मुक्त कर अमेरिकी ऊर्जा क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा।
व्हाइट हाउस प्रेस सचिव कैरोलाइन लेविट ने इसे “इतिहास की सबसे बड़ी डिरेगुलेटरी (नियम हटाने वाली) कार्रवाई” बताया है, जिसका उद्देश्य “अमेरिकी ऊर्जा प्रभुत्व” को मजबूत करना है और ये अमेरिकियों को 1.3 ट्रिलियन डॉलर की रेगुलेटरी लागत से बचाएगा।
वैज्ञानिकों और पर्यावरण विशेषज्ञों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है। नेशनल रिसोर्सेस डिफेंस काउंसिल के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया है कि एंडेंजर्मेंट फाइंडिंग को रद्द करने से गैर-प्राकृतिक आपदाओं के बढ़ते जोखिमों का सामना करने वाले लाखों अमेरिकियों के लिए परिणाम “विनाशकारी” हो सकते हैं।
ट्रंप की इस घोषणा के आलोचक मानते हैं कि यह निर्णय केवल एक नियम को बदलने जैसा नहीं है बल्कि पूरे अमेरिकी जलवायु नियमों की नींव को ही कमजोर करता है, क्योंकि इससे वह कानूनी आधार मिट जाएगा जिस पर कई उत्सर्जन मानक और पर्यावरण नियम आधारित हैं। इसका असर वाहन उत्सर्जन, औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण और पावर प्लांटों के नियमों पर भी पड़ेगा। कई पर्यावरण समूह इस बदलाव को इतिहास में सबसे बड़े हमलों में से एक बताते हुए संभावित कानूनी चुनौतियों की चेतावनी दे रहे हैं।
ट्रंप प्रशासन का यह निर्णय ओबामा-युग के नियामक विज्ञान-आधारित दृष्टिकोण को समाप्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम है, जो अमेरिका की जलवायु कार्रवाई की दिशा और लंबी अवधि की योजनाओं को पुनः परिभाषित कर सकता है।
--आईएएनएस
केआर/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others
News Nation


















