केंद्रीय बजट 2026-27 ऐतिहासिक और भविष्योन्मुखी; पूर्वोत्तर क्षेत्र को मजबूत प्रोत्साहन: शिवराज सिंह चौहान
गुवाहाटी, 11 फरवरी (आईएएनएस)। केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को कहा कि केंद्रीय बजट 2026-27 ऐतिहासिक और भविष्योन्मुखी है और इससे पूरे देश के साथ ही पूर्वोत्तर क्षेत्र में भी सकारात्मक बदलाव आएगा।
यहां संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए चौहान ने कहा कि बजट विकसित भारत की परिकल्पना को परिलक्षित करने के साथ ही 2047 तक आत्मनिर्भर, सशक्त और समृद्ध भारत के लिए मजबूत आधार स्थापित करता है। उन्होंने बल दिया कि बजट समावेशी विकास और सामाजिक समृद्धि पर केंद्रित है, जिससे समाज का हर वर्ग लाभान्वित हो।
केंद्रीय कृषि मंत्री ने पूर्वोत्तर क्षेत्र के प्रति केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता का उल्लेख करते हुए बताया कि बजट में पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय को 6,812 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं, जो पिछले बजट की तुलना में 897 करोड़ रुपए अधिक है। उन्होंने कहा कि बढ़ी हुई राशि पूर्वोत्तर में विकास को गति देने की केंद्र सरकार की प्राथमिकता स्पष्ट तौर पर दर्शाती है।
चौहान ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए केंद्र सरकार द्वारा एकत्र किए गए कुल कर राजस्व संग्रह में से एक निश्चित हिस्सा राज्य सरकारों को सौंपने संबंधी कर हस्तांतरण हेतु असम के लिए 49,725 करोड़ रुपए का बजट निर्धारित किया गया है । उन्होंने कहा कि 2014 से अब तक असम को कर हस्तांतरण द्वारा लगभग 3.12 लाख करोड़ रुपए प्राप्त हुए हैं।
उन्होंने कहा कि बजट में घोषित स्वास्थ्य सेवा पहल में बायोफार्मा शक्ति (ज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के माध्यम से स्वास्थ्य सेवा उन्नति की रणनीति) भी शामिल है, जिसके लिए पांच वर्ष में 10 हजार करोड़ रुपए का परिव्यय होगा।
इसका उद्देश्य गैर-संचारी रोगों के बढ़ते बोझ से निपटने के लिए बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर्स में घरेलू क्षमता मजबूत करना है। बायोलॉजिक्स जीवित कोशिकाओं (जैसे प्रोटीन, ऊतक) से बनी जटिल दवाएं हैं, जिनका उपयोग कैंसर और ऑटोइम्यून बीमारियों के लिए किया जाता है। बायोसिमिलर, किसी मौजूदा (रेफरेंस) बायोलॉजिक के अत्यंत समान और सुरक्षित संस्करण हैं, जो समान प्रभावकारिता देते हैं पर आमतौर पर कम खर्चीले होते हैं। इस पहल के अंतर्गत, गुवाहाटी के राष्ट्रीय औषध विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (एनआईपीआर) जैसे मौजूदा संस्थानों को उन्नत बनाया जाएगा , जिससे क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार और कुशल मानव संसाधन विकास हो।
केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि इस वर्ष कृषि बजट बढ़ाकर 1 लाख 32 हजार 561 करोड़ रुपए किया गया है, जो किसानों के कल्याण के प्रति सरकार की मजबूत प्रतिबद्धता दर्शाती है। उन्होंने कहा कि नवाचार और वैज्ञानिक प्रगति को बढ़ावा देने के लिए कृषि शिक्षा और अनुसंधान हेतु 9 हजार 967 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। किसानों को सस्ते दर पर उर्वरक उपलब्ध कराने और कृषि उत्पादन लागत कम करने के लिए 1 लाख, 70 हजार 944 करोड़ रुपए की उर्वरक सब्सिडी भी निर्धारित की गई है।
--आईएएनएस
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डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
पाकिस्तान: पीएम शरीफ संसद 23वें सत्र की एक भी बैठक में नहीं रहे मौजूद, रिपोर्ट में खुलासा
इस्लामाबाद, 11 फरवरी (आईएएनएस)। पाकिस्तान में चुने हुए सांसद, संसद में जाने की अपनी सबसे बुनियादी जिम्मेदारी से कोसों दूर भागते दिख रहे हैं। वो भी तब जब देश आर्थिक सुधार और राजनीतिक ध्रुवीकरण की समस्या से जूझ रहा है। एक रिपोर्ट में बताया गया है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो-जरदारी नेशनल असेंबली के 23वें सेशन के दौरान एक भी सिटिंग में शामिल नहीं हुए।
पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के 23वें सत्र में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एक भी बैठक में हिस्सा नहीं लिया। फ्री एंड फेयर इलेक्शन नेटवर्क (एफएएफईएन) की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह सत्र 12 जनवरी से 22 जनवरी तक चला, जिसमें कुल 332 सदस्यों में से 276 कम से कम एक बैठक से अनुपस्थित रहे, जबकि 56 सदस्य (17 फीसदी) पूरे सत्र से अनुपस्थित रहे।
रिपोर्ट में प्रमुख नेताओं की गैरमौजूदगी पर चिंता जताई गई है। पीएम शहबाज शरीफ के अलावा, पूर्व पीएम नवाज शरीफ और पीपीपी चेयरमैन बिलावल भुट्टो-जरदारी भी पूरे सत्र से गायब रहे। कैबिनेट सदस्यों में से केवल एक संघीय मंत्री, बालोचिस्तान अवामी पार्टी के खालिद हुसैन मगसी ने सभी बैठकों में हिस्सा लिया, जबकि सात मंत्रियों ने कोई बैठक नहीं की।
द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने कहा, लगातार गैरहाजिरी इस प्रक्रिया को खोखला कर रही है और ये लोकतंत्र का मजाक उड़ाती है। पीएम शहबाज शरीफ एक भी बैठक में शामिल नहीं हुए। न ही पीपीपी अध्यक्ष बिलावल भुट्टो-जरदारी मौजूद रहे। जब सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोग संसद को विकल्प मान लें तो इसका अधीनस्थों पर नकारात्मक असर पड़ना तय है।
इसमें एक बिल का जिक्र है जिस पर सबसे ज्यादा 222 सदस्य इकट्ठा हुए थे। ये बिल सांसद सदस्यों के हित में था। द ट्रिब्यून के संपादकीय में आगे कटाक्ष करते हुए लिखा गया कि ऐसा लगता है कि कानून बनाने वाले, जब उनके अपने फायदे के हिसाब से कानून बन रहे होते हैं, तब असेंबली में मौजूद रहने के लिए प्रेरित होते हैं, न कि तब जब रूटीन गवर्नेंस या एग्जीक्यूटिव की निगरानी दांव पर लगी हो।
एफएएफईएन के अनुसार, इससे पहले के सत्रों में भी इसी तरह की अनुपस्थिति देखी गई है, जैसे सितंबर 2025 के 19वें सत्र में एक चौथाई सदस्य पूरे सत्र से गायब रहे। यह स्थिति पाकिस्तान की संसदीय प्रक्रिया पर सवाल उठा रही है, जहां शीर्ष नेता संसद से दूरी बनाए रखते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे लोकतंत्र की विश्वसनीयता प्रभावित हो रही है।
--आईएएनएस
केआर/
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