BBC Inside Iran: as Trump threatens “something very tough” if talks fail | BBC News
Donald Trump is threatening Iran with further military attacks if it does not meet his demands on issues including nuclear enrichment. The US President said Iran would face “something very tough” if negotiations do not succeed. He said he is considering sending a second aircraft carrier strike group to the Middle East to prepare for military action. The US and Iran resumed negotiations last week, for the first time since the 12 days of conflict in June 2025, when the US carried out airstrikes on Iran’s nuclear facilities. Alongside the new talks, the US has begun a massive military build-up in the region. The USS Abraham Lincoln and its strike group has already been deployed. Donald Trump has claimed that Iran "wants to make a deal very badly”. However Tehran has said it won't negotiate on any issues other than its nuclear program and won't give up its right to enrich uranium. It’s accused of attempting to build a nuclear weapons but insists the enrichment programme is only intended for civil nuclear power. The BBC is reporting from inside Iran for the first time since mass protests there were crushed in an authoritarian crackdown in which thousands of people were killed by the authoritiies. Clive Myrie presents BBC News at Ten reporting by Lyse Doucet in Tehran and Sarah Smith in Washington. Subscribe here: http://bit.ly/1rbfUog For more news, analysis and features visit: www.bbc.com/news #BBCNews
रिलेशनशिप एडवाइज- बॉयफ्रेंड रखता हर चीज का हिसाब:प्यार में किसने ज्यादा किया, किसने कम, मुहब्बत स्कोरकार्ड बन गई है, मैं क्या करूं
सवाल- मैं तीन साल से एक रिलेशनशिप में हूं। हमने एक-दूसरे को करियर और पर्सनल लाइफ में जीरो से आगे बढ़ते देखा है। शुरू में हमारा रिलेशनशिप बहुत अच्छा था। लेकिन पिछले कुछ समय से पार्टनर हर चीज को गिनने लगा है कि, कौन कितना करता है, किसने ज्यादा समझौता किया, कौन ज्यादा एफर्ट्स देता है। प्यार अब कंपैरिजन में बदलने लगा है। इससे मुझे अजीब और अनकंफर्टेबल महसूस होने लगा है। मैं रिश्ते में कोई हिसाब-किताब नहीं चाहती। क्या प्यार का इस तरह स्कोरकार्ड में बदलना सही है? मुझे क्या करना चाहिए? एक्सपर्ट: डॉ. जया सुकुल, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, नोएडा जवाब- आप जो समस्या बता रही हैं, कई रिश्ते इसी मोड़ पर आकर उलझ जाते हैं। कुछ समय बाद प्यार धीरे-धीरे हिसाब-किताब में बदलने लगता है। आपने बताया कि तीन साल के रिलेशनशिप में आपने एक-दूसरे को जीरो से आगे बढ़ते देखा है। यह बहुत बड़ी बात है। रिश्तों में आमतौर पर भावनात्मक निवेश ज्यादा होता है और जब निवेश ज्यादा होता है, तो चोट भी गहरी लगती है। आपके सवाल पूछने के तरीके से लगता है कि आप एक समझदार इंसान हैं, जो रिश्ता बचाने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन खुद को भी दर्द नहीं देना चाहतीं। ये अच्छी बात है। चलिए, धीरे-धीरे समझते हैं कि आपके रिश्ते में क्या हो रहा है और ऐसी स्थिति में आपको क्या करना चाहिए। दुनिया में सिर्फ एक रिश्ता है, जिसमें बिना किसी उम्मीद के सिर्फ दिया जाता है, वो है पेरेंटिंग। मां-बाप बच्चे को किसी शर्त के बिना प्यार, परवरिश, सुरक्षा, खुशी सबकुछ देते हैं। लेकिन दो वयस्कों के रिश्ते में ऐसा नहीं होता है। रिलेशनशिप में न कोई गिवर होता है, न कोई रिसीवर। इसमें साझेदारी होती है, जहां दोनों एक-दूसरे को प्यार-सपोर्ट देते भी हैं और पाते भी हैं। आपका पार्टनर अगर हर चीज गिन रहा है, तो शायद वो म्यूचुअल शेयरिंग की बात को भूल रहा है। क्या रिश्ते में हिसाब होना गलत है? कई लोग सोचते हैं कि हिसाब की बात आ गई मतलब प्यार खत्म, लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। हिसाब दो तरह का होता है- हेल्दी और टॉक्सिक। आपके सवाल से लगता है कि आप टॉक्सिक हिसाब से परेशान हैं। चलिए, दोनों को समझते हैं। हेल्दी हिसाब क्या होता है? हेल्दी हिसाब का मतलब यह नहीं है कि डायरी में नोट किया जाए- “मैंने 4 दिन झाड़ू लगाई, तुमने 3 दिन या मैंने इस महीने इतना खर्च किया, तुमने कम किया।” हेल्दी हिसाब बहुत बेसिक होता है। जैसे- घर के काम, खर्च, जिम्मेदारियां मोटे तौर पर बंटी हुई हैं या नहीं? यह हिसाब-किताब रिश्ते को बचाने के लिए होता है, न कि किसी को नीचा दिखाने के लिए। ये रिश्ते को बैलेंस रखता है, जैसे दोस्तों के बीच बिल शेयरिंग होती है। टॉक्सिक हिसाब क्या होता है? टॉक्सिक हिसाब तब शुरू होता है, जब हर बात में गिनती आने लगे, हर बहस में पुराने रिकॉर्ड खुल जाएं। बहस में ये कहा जाए कि “मैंने ज्यादा एफर्ट्स किए, तुमने कम एफर्ट्स किए हैं।” समझौते की बात पर कहा जाए कि “मुझसे ज्यादा किसने समझौता किया है?” अगर ऐसा है तो यह प्यार नहीं, यह अविश्वास है। ये रिश्ते को धीरे-धीरे बर्बाद कर देता है, क्योंकि इससे अनकंफर्टेबल फीलिंग आती है। अगर यह कुछ दिन तक बना रहे तो लोग रिश्ते से भागने की कोशिश करने लगते हैं। रिश्ते में अविश्वास की पहचान क्या है? रिश्ते में अविश्वास का मतलब है, एक-दूसरे पर भरोसा न करना। इसके कारण चीजें हिसाब-किताब में बदलने लगती हैं। मनोविज्ञान के अनुसार, जब किसी व्यक्ति को रिश्ते में सुरक्षित महसूस नहीं होता, तो वह खुद को बचाने के लिए हर चीज में तुलना और कंट्रोल करने लगता है। ऐसे में इंसान चाहता है कि दोनों के एफर्ट बराबर दिखें। तभी बार-बार भरोसा दिलाने की जरूरत महसूस होती है। यह स्थिति अंदर की असुरक्षा, ठुकराए जाने के डर और आत्मविश्वास की कमी से जुड़ी होती है। अगर यह लंबे समय तक चलता रहे, तो रिश्ते की नजदीकी कम होने लगती है और रिश्ता साथ निभाने की बजाय मुकाबले जैसा महसूस होने लगता है। क्या रिश्ते में हिसाब जरूरी होता है? हां, कुछ कंडीशंस में यह जरूरी होता है। जैसे- अगर एक ही इंसान पूरा घर चला रहा हो, अगर एक ही व्यक्ति इमोशंस का बोझ भी उठा रहा हो। दूसरा सिर्फ डिमांड कर रहा हो, खुद कोई एफर्ट नहीं कर रहा है हो, तो यहां हिसाब करना गलत नहीं है। यहां हिसाब जरूरी है, क्योंकि एक इंसान का लगातार 4 कदम आगे बढ़ना और दूसरे का जीरो पर खड़े रहना लंबे समय में रिश्ते को कमजोर कर देता है। लेकिन आपके सवाल में एक अहम बात है- वो हर चीज गिनने लगा है। यह लाइन बहुत कुछ कहती है। यह सिर्फ जिम्मेदारी का हिसाब नहीं लग रहा। यह तुलना है। यह कम्पैरिजन है। यह भावनात्मक दबाव है और यह रिलेशनशिप के लिए हेल्दी नहीं होता। खुद से पूछें सवाल यहां आपको खुद से ईमानदारी से कुछ सवाल पूछने होंगे- कई बार ऐसा होता है कि एक पार्टनर का एफर्ट दिखता है, दूसरे का सिर्फ महसूस होता है। कई बार इमोशंस को वैल्यू नहीं मिलती, तो गिनती शुरू हो जाती है। आप तीन साल से साथ हैं, तो शायद आपके एफर्ट्स इमोशनल हैं, जैसे पार्टनर को सुनना, सपोर्ट करना, जो नजर नहीं आते हैं। लेकिन वो महत्वपूर्ण हैं। बात कैसे करें? इस स्थिति में सबसे जरूरी चीज है- कम्युनिकेशन। इसमें लड़ाई-झगड़ा नहीं करना है। शांत होकर अपनी बात कहनी है कि जैसे- आरोप लगाने की बजाय सिर्फ अपनी फीलिंग्स शेयर करें। जैसे- “जब तुम कहते हो कि मैंने ज्यादा समझौता किया, तो मुझे दुख होता है।” इस तरीके से बात करने पर रिश्ते में सुधार हो सकता है। बातचीत के बाद तीन चीजें देखें कि क्या वो आपकी बात समझने की कोशिश करता है? क्या वो अपने व्यवहार पर सोचता है? क्या वो बदलाव के लिए तैयार है? अगर हां तो रिश्ता संभल सकता है। आप दोनों मिलकर काउंसलिंग ले सकते हैं। अगर नहीं, तो यह रेड फ्लैग है। आखिर में सबसे जरूरी बात रिलेशनशिप में बराबरी जरूरी है, अकाउंटिंग नहीं। देना और लेना चलता रहता है। कभी आप चार कदम चलते हैं, कभी वो चार कदम चलता है। लेकिन अगर कोई हमेशा चार कदम चल रहा है और दूसरा जीरो पर है- तो वह रिश्ता टिकता नहीं और अगर कोई बराबरी के नाम पर आपको छोटा महसूस करवा रहा है तो वह प्यार नहीं, कंट्रोल है। प्यार प्रतियोगिता नहीं है। यह मैनेजमेंट की एक्सेल शीट नहीं है। अगर रिश्ता आपको सुरक्षित और सम्मानित महसूस कराता है- तो वह रिश्ता सही दिशा में है। अगर रिश्ते में रहकर आप खुद को कमतर, दोषी या थका हुआ महसूस करने लगें- तो सवाल उठाना बिल्कुल सही है। आप स्वयं समझदार हैं। इन सभी बातों की मदद से अपने रिश्ते का आकलन कर सकती हैं, खुद एक सही फैसला ले सकती हैं। ……………… ये खबर भी पढ़िए रिलेशनशिप एडवाइज- बॉयफ्रेंड की जिंदगी में बहुत केऑस है: उसका कमरा कबाड़खाना है, एक सामान जगह पर नहीं रखता, परेशान हूं, क्या करूं अब ये समझिए कि रिलेशनशिप के शुरुआती दिनों में इमोशंस ज्यादा हावी होते हैं तो लोग पार्टनर के व्यवहार को नजरअंदाज कर देते हैं। इसे ‘हनीमून फेज’ कहते हैं। आगे पढ़िए…
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