'इतनी मोटी रकम मिलती है...' 2026 में टीम इंडिया के फ्लॉप शो पर पूर्व कोच का बयान वायरल, जानें फील्डिंग कल्चर पर क्या कहा?
Team India : भारतीय क्रिकेट टीम अपने मुकाबले जीत रही और लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रही है. टीम इंडिया को उनके बल्लेबाज और गेंदबाज अपने दम पर जीत दिला लेते हैं. लेकिन कई मौकों पर टीम इंडिया की फील्डिंग उनकी कमजोरी उजागर कर देती है. भारतीय टीम का 2026 में फील्डिंग में फ्लॉप शो जारी रहा है. इसी महीन में भारत को न्यूजीलैंड का दौरान शुरू करना है. न्यूजीलैंड के मौसम में भारतीय फील्डिंग यूनिट की परीक्षा होगी. रेड बॉल क्रिकेट में भारतीय फील्डिंग की कलाई खुल सकती है.
ऐसे में भारतीय मेंस क्रिकेट टीम के पूर्व फील्डिंग कोच आर. श्रीधर ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने 'सोनी स्पोर्ट्स नेटवर्क' द्वारा आयोजित एक वर्चुअल बातचीत में आईएएनएस के साथ में बात करते हुए भारतीय क्रिकेट टीम की फील्डिंग की कमियों को उजागर किया है. इसके साथ ही उन्होंने 22 अक्टूबर से शुरू होने वाले न्यूजीलैंड दौरे से पहले टीम इंडिया के फील्डिंग कोच को भी सचेत किया है. उन्होंने ऐसा क्या कहा है, आइए जानते हैं.
A pat on the back from the Captain ????????
— BCCI (@BCCI) October 11, 2026
Nitish Kumar Reddy strikes as #TeamIndia pick wicket no.5⃣ ????
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2026 में टीम इंडिया का फील्डिंग में फ्लॉप शो
दरअसल, आंकड़ों के मुताबिक, साल 2026 में टी20 मुकाबलों में भारतीय क्रिकेट टीम की फील्डिंग का स्तर गिरा है. कैच पकड़ने की क्षमता के मामले में टीम इंडिया टॉप 10 देशों में दूसरे-आखिरी स्थान पर है. उनके कैच का प्रतिशत 73.4 है. टीम ने चौंकाने वाले 58 कैच छोड़े हैं. भारतीय फील्डरों ने भले ही 129 रन बचाए हों, लेकिन कैच छोड़ने और ग्राउंड-फील्डिंग की गलतियों के कारण 226 रन अतिरिक्त बने है, जिससे कुल मिलाकर 97 रनों का नुकसान हुआ है. वहीं भारतीय क्रिकेट टीम रनआउट के मौके चूकने के मामले में सभी टीमों में सबसे आगे है. टीम इंडिया ने रन आउट के 19 मौके चूके हैं, जबकि टीम ने 14 रनआउट किए भी हैं. भारतीय विकेटकीपरों ने स्टंपिंग के पांच मौकों में से दो मौके गंवाए.
टीम इंडिया की फील्डिंग पर पूर्व कोच ने उठाए सवाल
आर. श्रीधर ने कहा कि, 'भारतीय टीम की फील्डिंग का फॉर्म अच्छा नहीं है. न सिर्फ पिछले कुछ मुकाबलों में बल्कि पिछले कुछ महीनों में भी अच्छा नहीं रहा है. हमने टी20 वर्ल्ड कप जीता, लेकिन उस टूर्नामेंट में भी हम एक अच्छी फील्डिंग यूनिट के आसपास भी नहीं थे. उस सेमीफाइनल में शायद अक्षर पटेल ने ही हमें हारने से बचाया था. इसलिए हमें अपनी फील्डिंग में सुधार करने की जरूरत है'.
उन्होंने आगे कहा कि, 'मुझे लगता है फील्डिंग के मामले में और एक खास संस्कृति बनाने के मामले में अब फील्डिंग को निश्चित रूप से कम प्राथमिकता दी जा रही है. जैसा कि हम देख सकते हैं, भारतीय टीम की बैटिंग में एक कल्चर नजर आता है. इसी तरह, तेज गेंदबाजों के इस्तेमाल में भी एक साफ कल्चर है, खासकर वनडे में, जहां शुभमन गिल पिच पर जोरदार गेंदें फेंकना पसंद करते हैं, लेकिन फील्डिंग में ऐसा कल्चर नहीं दिखता. चिंता की बात यह है कि टीम में आने वाले नए खिलाड़ियों की फील्डिंग क्षमता उतनी अच्छी नहीं है. कुछ तेज गेंदबाज हैं, कुछ बल्लेबाज हैं, लेकिन जो भी आ रहा है, वह कोहली, सूर्यकुमार या श्रेयस जैसा फील्डर नहीं लगता, उस पीढ़ी की बात कर रहा हूं, क्योंकि ऐसा लगता है कि उन्हें सिर्फ एक ही स्किल, यानी बैटिंग, पर तैयार किया गया है'.
गंभीर और सुभादीप घोष को दिया खास मैसेज
श्रीधर ने आगे कहा कि, 'यह थोड़ी चिंता की बात है, लेकिन भारतीय टीम की चिंता का विषय नहीं है. यह पूरे सिस्टम के लिए जागने और सच्चाई को समझने का समय है. तो बहुत कुछ किया जाना बाकी है, लेकिन फील्डिंग कोच के सामने इन युवा खिलाड़ियों को तुरंत मैच प्रैक्टिस के लिए तैयार करने की चुनौती होगी. मुझे लगता है कि वे 18 तारीख को भारत से निकलेंगे और 19 तारीख को पहुंचेंगे और 22 तारीख को उनका (टी20) मैच है, जो बहुत चुनौतीपूर्ण है. लेकिन आज के दौर में क्रिकेट तो हालात के हिसाब से ढलने के बारे में ही है, है ना? इसीलिए तो आपको इतनी मोटी रकम मिलती है. मैं यह देखने के लिए बहुत उत्साहित हूं कि भारतीय टीम कैसे हालात के हिसाब से खुद को ढालती है. हो सकता है कि वे टी20 फॉर्मेट में बहुत अच्छी तरह ढल जाएं, लेकिन जब रेड बॉल की बात आएगी, तो मामला बिल्कुल अलग होगा'.
Shardiya Navratri 2026: आज शारदीय नवरात्रि का तृतीया व्रत, पढ़ें मां चंद्रघंटा की पौराणिक कथा
Shardiya Navratri 2026: नवरात्रि के तीसरे दिन मां दुर्गा के तृतीय स्वरूप माता चंद्रघंटा की पूजा की जाती है. यह दिन उनको समर्पित होता है. चंद्रघंटा माता की उपासना करने से हर प्रकार के भय दूर हो जाते हैं. देवी दुर्गा का यह स्वरूप भक्तों का कल्याण करता है. आज 13 अक्टूबर को जो भी साधक चंद्रघंटा माता की आराधना करने से देवी मां सदैव उनकी रक्षा करती हैं. बता दें कि देवी चंद्रघंटा के माथे पर अर्धचंद्र सुशोभित होता है. इसलिए, उन्हें यह नाम दिया गया था.
माता चंद्रघंटा का दिव्य स्वरूप (Shardiya Navratri 2026 Day 3)
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माता चंद्रघंटा को देवी दुर्गा का उग्र रूप माना जाता है. चंद्रघंटा मां का वाहन सिंह यानी शेर होता है. उनके दस हाथ होते हैं और चार दाहिनी हाथों में कमल का फूल, धनुष, जप माला और तीर होता है. वहीं, पांचवा हाथ अभय मुद्रा में रहता है जबकि चार बाएं हाथों में त्रिशूल, गदा, कमंडल और तलवार है और पांचवां हाथ वरद मुद्रा में रहता है. मान्यताओं के अनुसार, देवी चन्द्रघण्टा शुक्र ग्रह को शासित करती हैं. आइए जानते हैं कि दुर्गा मां के तीसरे स्वरूप की पौराणिक कथा क्या है.
नवरात्रि के तीसरे दिन कौन से रंग के वस्त्र पहनें? (Today's Navratri Colour)
आज यानी 13 अक्टूबर 2026, मंगलवार को शारदीय नवरात्रि का तीसरा दिन है. इस दिन चंद्रघंटा माता को प्रसन्न करने के लिए उपासना की जाती है. आज के दिन भक्तों को लाल रंग के वस्त्र पहनने चाहिए. दरअसल, लाल रंग प्रेम और जुनून का होता है. देवी चंद्रघंटा को लाल रंग की चुनरी अर्पित करनी चाहिए.
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पढ़ें चंद्रघंटा माता की कथा (Read Chandraghanta Mata Ki Kahani in Hindi)
मां चंद्रघंटा की पौराणिक कथा के अनुसार, माता पार्वती का भगवान शिव से विवाह के बाद के स्वरूप से संबंधित माना जाता है. नवदुर्गा की परंपरा में मां चंद्रघंटा को माता पार्वती का विवाहित रूप माना गया है. धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान शिव से विवाह के बाद माता पार्वती ने अपने मस्तक पर अर्धचंद्र धारण किया और यह अर्धचंद्र घंटे के समान दिखाई देता था. इसी कारण उनका नाम चंद्रघंटा प्रसिद्ध हुआ. द्रिक पंचांग भी मां चंद्रघंटा को देवी पार्वती का विवाहित स्वरूप बताते हुए उनके मस्तक पर अर्धचंद्र धारण करने की परंपरा का उल्लेख करता है.
मां चंद्रघाट का वीर स्वरूप
मां चंद्रघंटा के स्वरूप में सिर्फ सौम्यता नहीं, बल्कि वीरता और शक्ति का भी विशेष भाव दिखाई पड़ता है. उन्हें दस भुजाओं वाली देवी के रूप में दर्शाया गया है और उनके हाथों में त्रिशूल, गदा, तलवार, कमंडल, कमल, धनुष, बाण तथा जपमाला जैसे विभिन्न आयुध और प्रतीक होते हैं. उनके दो हाथ अभय और वरद मुद्रा में माने जाते हैं. इस स्वरूप का धार्मिक अर्थ यह है कि माता पार्वती केवल करुणा और मातृत्व की शक्ति ही नहीं हैं, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर धर्म और भक्तों की रक्षा करने वाली पराक्रमी शक्ति भी हैं.
शांत मुख और युद्ध के लिए तैयार देवी चंद्रघंटा
मां चंद्रघंटा की कथा में उनका शांत मुख और युद्ध के लिए तैयार स्वरूप विशेष महत्व रखता है. धार्मिक परंपरा में उनका वाहन बाघिन बताया गया है और वे अनेक अस्त्र-शस्त्र धारण करती हैं, लेकिन उनके चेहरे पर शांति और करुणा का भाव रहता है. इससे यह आध्यात्मिक संदेश लिया जाता है कि वास्तविक शक्ति केवल क्रोध या आक्रामकता में नहीं होती, बल्कि शक्ति के साथ विवेक, धैर्य और करुणा का संतुलन भी आवश्यक है. इसलिए मां चंद्रघंटा का स्वरूप भक्तों के लिए साहस और संतुलन दोनों का प्रतीक माना जाता है.
पौराणिक परंपरा में मां चंद्रघंटा के मस्तक पर स्थित अर्धचंद्र और घंटे को उनके नाम और स्वरूप की प्रमुख पहचान माना गया है. अर्धचंद्र का आकार घंटे के समान दिखाई देने के कारण उन्हें चंद्रघंटा कहा गया. धार्मिक मान्यता में घंटा-ध्वनि को जागृति तथा नकारात्मकता से दूरी के भाव से जोड़ा जाता है. इसी कारण देवी के इस स्वरूप की आराधना में मन के भय और अस्थिरता को दूर करके साहस, जागरूकता और सकारात्मकता अपनाने का भाव रखा जाता है. यह धार्मिक प्रतीकात्मक व्याख्या है, जिसे आस्था और परंपरा के संदर्भ में समझना चाहिए.
इस प्रकार मां चंद्रघंटा की पौराणिक कथा मुख्य रूप से माता पार्वती के विवाहित स्वरूप, शिव-शक्ति के मिलन और देवी की रक्षक शक्ति से जुड़ी हुई है. उनके मस्तक का अर्धचंद्र उन्हें चंद्रघंटा नाम देता है, जबकि दस भुजाओं और अस्त्र-शस्त्रों से युक्त स्वरूप उनकी शक्ति और पराक्रम का प्रतीक माना जाता है. नवरात्रि के तीसरे दिन उनकी पूजा करते हुए भक्त देवी के इसी संतुलित स्वरूप का स्मरण करते हैं, जिसमें एक ओर माता की करुणा और शांति है तथा दूसरी ओर धर्म और भक्तों की रक्षा करने का अदम्य साहस है.
चंद्रघंटा मां के जन्म का माता पार्वती से संबंध
मां चंद्रघंटा को माता पार्वती का ही विवाहित स्वरूप माना जाता है. नवदुर्गा की परंपरा में मां शैलपुत्री से शुरू होने वाली देवी की यात्रा के बाद ब्रह्मचारिणी स्वरूप में तपस्या और साधना का चरण आता है, जबकि चंद्रघंटा स्वरूप में माता पार्वती के भगवान शिव से विवाह के बाद का रूप सामने आता है. द्रिक पंचांग के अनुसार देवी चंद्रघंटा को देवी पार्वती का विवाहित रूप माना गया है और भगवान शिव से विवाह के पश्चात माता ने अपने मस्तक पर अर्धचंद्र धारण करना आरंभ किया, जिसके कारण उन्हें चंद्रघंटा के नाम से जाना गया.
शारदीय नवरात्रि पर तीसरे दिन का शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat 2026)
तृतीया प्रारंभ तिथि- 12 अक्टूबर रात 10 बजकर 13 मिनट
तृतीया तिथि समाप्त- 13 अक्टूबर रात 11 बजकर 27 मिनट
अभिजीत मुहूर्त- सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक
वहीं, अमृत काल शाम 4 बजकर 14 मिनट से शुरू होकर शाम 5 बजकर 57 मिनट तक रहेगा. इस मुहूर्त में संध्या पूजन किया जा सकता है.
चंद्रघंटा माता के शक्तिशाली मंत्र (Chandraghanta Mata ke Mantra)
चंद्रघंटा माता का ध्यान मंत्र
पिण्डजप्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यं चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥
मां चंद्रघंटा का बीज मंत्र
ॐ ऐं श्रीं शक्तयै नमः।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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