निफ्टी आईटी में 5.51 प्रतिशत की गिरावट, मार्केट कैप 1.6 लाख करोड़ रुपए घटा
मुंबई, 12 फरवरी (आईएएनएस)। गुरुवार के कारोबारी सत्र में शेयर बाजार में आईटी सेक्टर में भारी बिकवाली देखी गई, जिससे निफ्टी आईटी इंडेक्स 5.51 प्रतिशत गिरकर चार महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया। निवेशक एआई के बढ़ते प्रभाव और अमेरिका में जल्द ब्याज दर कटौती की उम्मीद कम होने से चिंतित दिखे।
निफ्टी आईटी कंपनियों की कुल बाजार पूंजी (मार्केट कैप) घटकर 27,32,579 करोड़ रुपए रह गई, यानी लगभग 1.6 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनियों के शेयरों में 5.5 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) का शेयर 5.48 प्रतिशत गिरकर 2,750 रुपए पर आ गया, जो 52 हफ्तों का सबसे निचला स्तर है। इंफोसिस में भी 5.48 प्रतिशत की गिरावट आई, टेक महिंद्रा 6.40 प्रतिशत गिरा, जबकि एचसीएल टेक, एमफैसिस और विप्रो के शेयरों में 4.5 से 5 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई।
बाजार के जानकारों का कहना है कि उन्नत एआई तकनीक के आने से पारंपरिक आईटी सेवाओं पर असर पड़ सकता है, जिनसे भारतीय आईटी कंपनियां बड़ी कमाई करती हैं। हाल ही में एंथ्रोपिक नामक कंपनी ने क्लॉड कोवर्क नाम का एक नया एआई टूल लॉन्च किया है, जो पूरे व्यावसायिक काम को अपने आप करने में सक्षम बताया जा रहा है।
कहा जा रहा है कि इस एआई सिस्टम में ऐसे ऑटोमेशन टूल्स हैं जो कई चरणों वाले काम खुद कर सकते हैं। इससे पहले जिन कामों के लिए अलग-अलग सॉफ्टवेयर की जरूरत होती थी, वे अब एक ही प्लेटफॉर्म से हो सकते हैं। इससे पारंपरिक सॉफ्टवेयर कंपनियों की मांग कम हो सकती है।
अंतरराष्ट्रीय ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने इस स्थिति को सासपोकैलिप्स नाम दिया है, जिसका मतलब है कि एआई पारंपरिक सॉफ्टवेयर कंपनियों की जगह ले सकता है।
कुछ विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर एआई ने पारंपरिक सेवाओं की जगह ले ली, तो कंपनियों की आय में 40 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है।
इसके अलावा अमेरिका से आए मजबूत रोजगार आंकड़ों ने भी बाजार को प्रभावित किया। पिछले महीने अमेरिका में 1.3 लाख नई नौकरियां जुड़ीं और बेरोजगारी दर घटकर 4.3 प्रतिशत हो गई। इससे यह संकेत मिला कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व जल्द ब्याज दरें कम नहीं करेगा, जिससे आईटी शेयरों पर दबाव बढ़ा।
ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल ने भी कहा कि एआई आने वाले समय में पुराने सॉफ्टवेयर और टेस्टिंग सेवाओं की जरूरत कम कर सकता है। नया एआई सिस्टम पूरे काम को खुद करने में सक्षम है, जिससे पारंपरिक सॉफ्टवेयर सेवाओं पर निर्भरता घट सकती है।
--आईएएनएस
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डनकुनी-सूरत फ्रेट कॉरिडोर पर रेलवे बोर्ड ने दबाया एक्सीलेरेटर, मालगाड़ियां अब दौड़ेंगी सुपरफास्ट!
केंद्र सरकार ने बजट 2026 में जिस डनकुनी-सूरत डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) का ऐलान किया था, उस पर अब काम तेज़ करने के निर्देश दे दिए गए हैं। रेलवे बोर्ड ने इस प्रोजेक्ट को फास्ट-ट्रैक मोड में लागू करने को कहा है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अधिकारियों को साफ कहा है कि यह कॉरिडोर देश के लिए रणनीतिक तौर पर बहुत अहम है, इसलिए इसे तय समय में पूरा किया जाए।
भारत के बीच माल ढुलाई हुई तेज
करीब 2100 किलोमीटर लंबा ये नया फ्रेट कॉरिडोर डनकुनी से सूरत तक जाएगा। यह पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और गुजरात से होकर गुजरेगा। इसके बन जाने से पूर्वी और पश्चिमी भारत के बीच माल ढुलाई बहुत तेज और सस्ती होगी। मालगाड़ियों का समय बचेगा और मौजूदा रेलवे लाइनों पर भी भीड़ कम होगी। इस प्रोजेक्ट में आधुनिक तकनीक इस्तेमाल की जाएगी। जैसे ज्यादा ताकतवर बिजली सिस्टम।
'कवच’ जैसे एडवांस सेफ्टी सिग्नल सिस्टम
डनकुनी-सूरत कॉरिडोर की डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) को नए खर्च और समयसीमा के हिसाब से अपडेट किया जाएगा। पूरे कॉरिडोर को अलग-अलग हिस्सों में बाँटकर एक साथ काम शुरू होगा, ताकि देरी न हो। रेलवे बोर्ड ने साफ कहा है कि ज़मीन, डिजाइन और टेंडर जैसे सारे प्री-कंस्ट्रक्शन काम तुरंत शुरू किए जाएं। हर सेक्शन के लिए अलग टीम बनाई जाएगी जो मौके पर रहकर काम की निगरानी करेगी। हर हफ्ते रेलवे बोर्ड को प्रगति रिपोर्ट दी जाएगी, ताकि यह बड़ा प्रोजेक्ट बिना रुकावट और तेजी से पूरा हो सके।
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