दिल्ली सरकार का बड़ा ऐलान, लाडली योजना बंद कर ‘लखपति बिटिया योजना’ होगी लागू, मिलेगा 1 लाख रुपये का लाभ
नई दिल्ली: दिल्ली सरकार ने अपनी पहली वर्षगांठ के अवसर पर राजधानी की बेटियों के लिए एक बड़ी घोषणा की है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने ‘लखपति बिटिया योजना’ नाम से एक नई स्कीम का ऐलान किया है, जिसका उद्देश्य बेटियों की शिक्षा को बढ़ावा देना और उनके भविष्य को आर्थिक रूप से सुरक्षित करना है। …
अमेरिकी जांच एजेंसी से बात कर रही अडाणी एंटरप्राइजेज:घूसखोरी की जांच में अमेरिकी सरकार ने जानकारी मांगी; ₹2,029 करोड़ की रिश्वत देने का आरोप
अडाणी ग्रुप की कंपनी अडाणी एंटरप्राइजेज ने मंगलवार को बताया कि वह अमेरिकी जांच एजेंसी 'ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स' (OFAC) के साथ बातचीत कर रही है। यह मामला पिछले साल जून में 'वॉल स्ट्रीट जर्नल' (WSJ) में छपी एक रिपोर्ट से जुड़ा है। जिसमें दावा किया गया था कि अरबपति गौतम अडाणी अपने ऊपर लगे घूसखोरी के आरोपों को खत्म कराने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन से संपर्क करने की कोशिश कर रहे थे। दरअसल अडाणी ग्रुप पर अमेरिका में 2,029 करोड़ रुपए की रिश्वत देने का आरोप है। अमेरिका में धोखाधड़ी के आरोप पिछले साल अमेरिका में अडाणी समेत 8 लोगों पर अरबों रुपए की धोखाधड़ी के आरोप लगे थे।अटॉर्नी ऑफिस आरोप पत्र के मुताबिक, अडाणी की कंपनी ने भारत में रिन्यूएबल एनर्जी के प्रोजेक्ट गलत तरीके से हासिल किए थे। इसके लिए सरकारी अधिकारियों को 250 मिलियन डॉलर यानी करीब 2,029 करोड़ रुपए की रिश्वत देने का आरोप अडाणी पर लगाया गया था।आरोपियों ने अमेरिकी इन्वेस्टर्स और बैंकों से झूठ बोलकर पैसा इकट्ठा किया। यह पूरा मामला अडाणी ग्रुप की कंपनी अडाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड और एक अन्य फर्म से जुड़ा हुआ था। 24 अक्टूबर 2024 को न्यूयॉर्क की फेडरल कोर्ट में यह केस दर्ज हुआ था। अमेरिकी एजेंसी ने 4 फरवरी को मांगी जानकारी अडाणी एंटरप्राइजेज ने बताया कि उसे 4 फरवरी को अमेरिकी ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स से एक 'रिक्वेस्ट फॉर इंफॉर्मेशन' (RFI) यानी जानकारी मांगने का पत्र मिला है। कंपनी ने स्पष्ट किया कि जांच एजेंसी के साथ उनकी बातचीत चल रही है। हालांकि, कंपनी ने यह भी कहा कि अब तक की बातचीत या पत्रों में उनके खिलाफ किसी भी तरह की अनियमितता या नियमों के उल्लंघन की बात सामने नहीं आई है। रिश्वतखोरी के आरोपों को हटवाने की कोशिश इस विवाद की जड़ पिछले साल जून में छपी वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट है। इस रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि गौतम अडाणी अमेरिकी प्रशासन के साथ मिलकर उन रिश्वतखोरी के आरोपों को हटवाने की कोशिश कर रहे हैं, जो अमेरिका में उनके खिलाफ दर्ज हुए थे। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि ग्रुप की कोशिश थी कि डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन इन आरोपों को खारिज करने में मदद करे। अब अमेरिकी एजेंसियां इसी सिलसिले में कंपनी से डेटा और जानकारी इकट्ठा कर रही हैं। कंपनी का पक्ष- कोई गलती नहीं पाई गई अडाणी एंटरप्राइजेज ने BSE को बताया कि अमेरिकी एजेंसी के साथ उनका कम्युनिकेशन सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। कंपनी ने बयान में कहा, जांच एजेंसी की ओर से जो पत्र मिला है, उसमें अब तक किसी भी तरह के नियमों के उल्लंघन या किसी गलत काम की पुष्टि नहीं हुई है। कंपनी का कहना है कि वे अधिकारियों के साथ पूरा सहयोग कर रहे हैं और पारदर्शिता बरत रहे हैं। जैसे ही कंपनी ने अमेरिकी एजेंसी के साथ हो रही इस बातचीत का खुलासा किया, बाजार में अडाणी एंटरप्राइजेज के शेयर इंट्रा-डे ट्रेडिंग के दौरान 3.5% तक गिर गए।
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