भारत-अमेरिका ट्रेड डील से फार्मा सेक्टर में भारत की पकड़ होगी और मजबूत: एक्सपर्ट
नई दिल्ली, 10 फरवरी (आईएएनएस)। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील को लेकर जहां कई सेक्टरों में अनिश्चितता बनी हुई है, वहीं फार्मा सेक्टर ऐसा क्षेत्र रहा है जो पूरी तरह आश्वस्त नजर आया। कम लेबर कॉस्ट और सस्ती दवा निर्माण क्षमता की वजह से भारत अमेरिकी बाजार के लिए एक अहम सप्लायर बना हुआ है। ऐसे में अमेरिका की भारत पर निर्भरता पहले से ही मजबूत रही है, जो इस ट्रेड डील के बाद और बढ़ने की उम्मीद है।
जोटा हेल्थकेयर के चेयरमैन केतन जोटा ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि अमेरिका के बाद सबसे ज्यादा एफडीए-अप्रूव्ड प्लांट भारत में हैं। भारत से बड़ी मात्रा में जेनरिक दवाएं, लाइफ सेविंग और क्रॉनिक बीमारियों की दवाएं अमेरिका को निर्यात की जाती हैं। उन्होंने कहा कि ट्रेड डील के तहत भारत को एक बड़ी कूटनीतिक और आर्थिक जीत मिली है, क्योंकि अब तक टैरिफ के मामलों में अमेरिका शायद ही कभी झुका हो, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रोटोकॉल के जरिए संतुलित और लाभकारी समझौता संभव हुआ है। इस डील से दोनों देशों को फायदा मिलेगा।
केतन जोटा ने आगे बताया कि भारत से अमेरिका को मुख्य रूप से लाइफस्टाइल और क्रॉनिक बीमारियों से जुड़ी दवाओं का निर्यात होता है। इनमें डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, थायराइड जैसी बीमारियों की दवाएं शामिल हैं, जिनकी मांग अमेरिकी बाजार में लगातार बनी हुई है।
उन्होंने आगे कहा कि यूरोपीय संघ के साथ हुई ट्रेड डील से भी भारत को बड़ा फायदा होने वाला है। इस समझौते के तहत एक्सपोर्ट पर ड्यूटी शून्य प्रतिशत कर दी गई है। इससे न सिर्फ दवाओं का निर्यात बढ़ेगा, बल्कि टेक्नोलॉजी और व्यापार का ट्रांसफर भी भारत में होगा। इसके परिणामस्वरूप भारत में दवा निर्माण और सस्ता होगा, जिससे भारतीय मरीजों को भी किफायती दवाएं उपलब्ध हो सकेंगी।
इस तरह, भारत-यूएस ट्रेड डील और यूरोपीय संघ के साथ हुए समझौतों से भारतीय फार्मा सेक्टर की वैश्विक पकड़ और मजबूत होने की संभावना है। इससे न सिर्फ एक्सपोर्ट बढ़ेगा, बल्कि घरेलू बाजार और मरीजों को भी इसका सीधा लाभ मिलेगा।
--आईएएनएस
डीबीपी/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
नेपाल: यात्रियों को ले जा रही बस नदी में गिरी, 12 की मौत
काठमांडू, 10 फरवरी (आईएएनएस)। मध्य नेपाल के रामेछाप जिले के माचानेतार में एक यात्री बस तामाकोशी नदी में गिर गई। इस हादसे में 12 लोगों की मौत हो गई।
रामेछाप जिला के पुलिस उपाधीक्षक भोला कुमार भट्टा ने आईएएनएस को बताया कि सुबह करीब 11 बजे हुए इस हादसे में 12 लोगों की जान चली गई। उन्होंने कहा, आठ लोग घायल हुए हैं, और उनमें से सात को गंभीर चोटों के कारण आगे के इलाज के लिए काठमांडू भेजा गया है।
भट्टा के मुताबिक, ड्राइवर ने बस से नियंत्रण खो दिया और गाड़ी सड़क से करीब 100 मीटर नीचे नदी में जा गिरी। बस, जो काठमांडू से ओखलढुंगा के पोकली के लिए निकली थी, तामाकोशी नदी में गिर गई।
रामेछाप के जिला प्रशासन कार्यालय ने बताया कि घटनास्थल से छह शव बरामद किए गए हैं, जबकि छह अन्य की इलाज के दौरान मौत हो गई।
पुलिस ने कहा कि यह तुरंत साफ नहीं है कि बस में कितने यात्री सवार थे, लेकिन भट्टा ने कहा कि अधिकारियों का मानना है कि इस बस में करीब 24 लोग सफर कर रहे थे।
हादसे के बाद, स्थानीय पुलिस इकाइयों, सशस्त्र पुलिस बल और आपदा प्रबंधन विभाग की मदद से एक रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। सड़कों पर गाड़ियों की संख्या बढ़ने और देश भर में रोड कनेक्टिविटी बेहतर होने से, हाल के वर्षों में नेपाल में सड़क हादसों में भी लगातार बढ़ोतरी देखी गई है।
ट्रैफिक पुलिस ऑफिस के मुताबिक, एक दशक पहले 4,999 सड़क हादसे रिपोर्ट हुए थे। वहीं, 2024-25 में 7,669 सड़क हादसों में 190 मौतें रिपोर्ट की गईं, इनमें से 278 हादसे गंभीर माने गए।
जन हानि के अलावा, इसका आर्थिक तौर पर भी असर पड़ता है। 2020 में वर्ल्ड बैंक की एक स्टडी से पता चला कि नेपाल में रोड ट्रैफिक में लगने वाली चोटों की इकोनॉमिक कॉस्ट 2007 से तीन गुना बढ़ गई है और यह सकल राष्ट्रीय उत्पाद के 1.5 प्रतिशत के बराबर है। हादसों की सबसे ज्यादा मार गरीब जनता पर पड़ती है।
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
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