मोनालिसा की लव स्टोरी के बहाने उठाया 'आदिवासी-धर्म परिवर्तन-आरक्षण' का मुद्दा, 'द डायरी ऑफ मणिपुर' का ट्रेलर रिलीज
महाकुंभ से चर्चा में आईं मोनालिसा की पहली फिल्म 'द डायरी ऑफ मणिपुर' का ट्रेलर रिलीज कर दिया गया है. सनोज मिश्रा द्वारा निर्देशित यह फिल्म दिल्ली और मणिपुर को जोड़ने वाली एक लव स्टोरी है, जो अप्रैल के पहले हफ्ते में रिलीज होगी. फिल्म के जरिये डायरेक्टर ने हाशिये में रह रहे लोगों की धार्मिक, सामाजिक समस्याओं को दिखाने-बताने की कोशिश की है. लगभग 10 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म की शूटिंग मणिपुर, नेपाल और उत्तराखंड में हुई है. मोनालिसा ने इस प्रोजेक्ट के लिए कड़ी मेहनत की है. वे अभिनय के साथ अपने गांव में स्कूल खोलने और अपनी बहन को कलेक्टर बनाने का सपना भी रखती हैं.
एईएल आपराधिक मानहानि मामले में पत्रकार रवि नायर दोषी करार, एक साल की सजा और जुर्माना
गांधीनगर, 10 फरवरी (आईएएनएस)। गांधीनगर की एक अदालत ने अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (एईएल) द्वारा दायर आपराधिक मानहानि मामले में पत्रकार रवि नायर को दोषी ठहराते हुए एक वर्ष की कारावास की सजा और जुर्माना लगाया है।
यह मामला अदाणी समूह की प्रमुख कंपनी एईएल की ओर से दायर शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया था। कंपनी ने आरोप लगाया था कि रवि नायर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर झूठे और मानहानिकारक कई पोस्ट प्रकाशित और प्रसारित की, जिनका उद्देश्य एईएल और अदाणी समूह की छवि को नुकसान पहुंचाना था।
एईएल की ओर से दलील दी गई कि विवादित ट्वीट्स न तो निष्पक्ष टिप्पणी की श्रेणी में आते हैं और न ही वैध आलोचना माने जा सकते हैं, बल्कि वे कंपनी की साख को आम जनता और निवेशकों की नजर में कमजोर करने के इरादे से किए गए थे।
मामले की विस्तृत सुनवाई के बाद मनसा मजिस्ट्रेट कोर्ट ने माना कि एईएल अपने आरोपों को साबित करने में सफल रहा है। अदालत ने रवि नायर को आपराधिक मानहानि का दोषी करार देते हुए एक साल की सजा के साथ जुर्माना भी लगाया।
अदालत के फैसले को सार्वजनिक विमर्श में जवाबदेही की अहमियत दोहराने वाला बताया गया है।
एक वरिष्ठ वकील ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत संरक्षित प्रतिष्ठा के अधिकार को खत्म नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि मानहानि अनुच्छेद 19(2) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर एक मान्य प्रतिबंध है।
उन्होंने सुब्रमण्यम स्वामी बनाम भारत संघ (2016) के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि प्रतिष्ठा को मौलिक अधिकार माना गया है। वकील के अनुसार, बार-बार बिना पुष्टि के लगाए गए आरोप “मीडिया ट्रायल” की श्रेणी में आते हैं, जिसके खिलाफ अदालतें पहले भी चेतावनी देती रही हैं।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि सुप्रीम कोर्ट ने हिंडनबर्ग रिसर्च से जुड़े मामलों में जांच के आदेश दिए थे, जहां संस्था ने अदाणी शेयरों की शॉर्ट सेलिंग की बात स्वीकार की थी। इस पृष्ठभूमि से यह स्पष्ट होता है कि झूठे दावों से किस तरह नुकसान हो सकता है।
--आईएएनएस
डीएससी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News18
News Nation


















