जापान: एलडीपी की ऐतिहासिक जीत के बाद 18 फरवरी को प्रधानमंत्री पद का फैसला
टोक्यो, 10 फरवरी (आईएएनएस)। जापान में हाल ही में हुए सामान्य चुनाव के बाद, संसद का विशेष सत्र 18 फरवरी को बुलाया जाएगा, जहां औपचारिक रूप से प्रधानमंत्री का चुनाव होगा।
स्थानीय मीडिया ने इसकी जानकारी दी। जिजी प्रेस के अनुसार, जापानी संविधान में यह नियम है कि प्रधानमंत्री को नॉमिनेट करने के लिए हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स (प्रतिनिधि सभा) चुनाव के 30 दिनों के अंदर एक खास डाइट सेशन बुलाया जाना चाहिए।
सेशन के पहले दिन, मौजूदा कैबिनेट मिलकर इस्तीफा दे देगी। फिर नई चुनी गई हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और मौजूदा हाउस ऑफ काउंसिलर्स अलग-अलग वोट करके नया प्रधानमंत्री नॉमिनेट करेंगे, जो बाद में एक नई कैबिनेट बनाएगा।
प्रधानमंत्री पद के नॉमिनेशन चुनाव में, हर चैंबर में पहले राउंड की वोटिंग में बहुमत पाने वाला उम्मीदवार सीधे जीत जाता है। अगर किसी भी उम्मीदवार को बहुमत नहीं मिलता है, तो सबसे ज्यादा वोट पाने वाले दो उम्मीदवार इस दौड़ में आगे बढ़ते हैं। इसमें जीतने वाले का फैसला बहुमत से होता है। अगर दोनों चैंबर अलग-अलग उम्मीदवारों को नॉमिनेट करते हैं और सलाह-मशविरे के बाद भी सहमत नहीं होते हैं, तो संविधान में यह नियम है कि ताकतवर हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स का फैसला ही मान्य होगा।
सिन्हुआ न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, यह देखते हुए कि लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी) के पास अभी लोअर हाउस में दो-तिहाई से ज्यादा सीटें हैं, जापानी मीडिया का मानना है कि एलडीपी अध्यक्ष और प्रधानमंत्री साने ताकाइची की जीत लगभग पक्की है।
रविवार के निचले सदन के चुनाव बाद, जापान की रूलिंग लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी) को सीटों में काफी बढ़त मिली और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में अकेले दो-तिहाई का बहुमत हासिल किया।
विशेषज्ञों की राय है कि एलडीपी अध्यक्ष और प्रधानमंत्री ताकाइची ने अपनी नीतियों के नकारात्मक नतीजों के पूरी तरह सामने आने से पहले ही मौके का लाभ उठाया, और बिजली की तेजी वाले और एंटरटेनमेंट-ओरिएंटेड इलेक्शन के जरिए अपनी स्थिति को मजबूत किया।
हालांकि, ताकाइची के दक्षिणपंथी रुख को लेकर चिंताएं भी कम नहीं हैं। आर्थिक मोर्चे पर जापान की चुनौतियां अभी भी अनसुलझी हैं। ताकाइची प्रशासन की असली परीक्षा शायद अभी शुरू ही हुई है।
सत्ताधारी एलडीपी ने हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की 465 सीटों में से 316 सीटें जीतीं, जो दो-तिहाई की तय सीमा से ज्यादा थीं। इसके गठबंधन पार्टनर, जापान इनोवेशन पार्टी (जेआईपी) को 36 सीटें मिलीं, जिससे उनकी कुल सीटें 352 हो गईं।
विपक्ष की तरफ, सेंट्रिस्ट रिफॉर्म अलायंस (सीआरए), जिसे चुनाव से पहले कॉन्स्टिट्यूशनल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ़ जापान (सीडीपीजे) और कोमेइतो पार्टी ने मिलकर बनाया था- को काफी नुकसान पहुंचा। चुनाव पूर्व अनुमान था कि उसे 172 सीटें मिलेंगी, लेकिन नतीजे काफी निराशाजनक रहे, इस गठबंधन को महज 49 सीट मिली।
--आईएएनएस
केआर/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
रक्षा मंत्रालय द्वारा फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने की मंजूरी इस सप्ताह मिलने की संभावना
नई दिल्ली, 10 फरवरी (आईएएनएस)। भारत का रक्षा मंत्रालय इस सप्ताह फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने की एक बड़ी डील को मंजूरी दे सकता है। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, यह सौदा भारतीय वायुसेना के लिए किया जा रहा है, जिसकी कुल कीमत लगभग 3.25 लाख करोड़ रुपए बताई जा रही है।
यह मंजूरी फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की भारत यात्रा से पहले दी जा सकती है। इसके बाद इस सौदे को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी से भी मंजूरी लेनी होगी।
इस प्रस्ताव के अनुसार, भारत फ्रांस की कंपनी डसॉल्ट एविएशन से 18 राफेल विमान सीधे खरीदेगा। बाकी 96 विमान भारत में ही बनाए जाएंगे। इनमें से कुछ विमान दो सीट वाले होंगे, जिनका उपयोग पायलटों को ट्रेनिंग देने के लिए किया जाएगा। इस डील में आधुनिक तकनीक भारत को देने और मेक इन इंडिया को बढ़ावा देने की बात भी शामिल है।
भारतीय वायुसेना के के बेड़े में पहले से ही दो स्क्वाड्रनों में 36 राफेल विमान शामिल हैं, जिनमें से सी वेरिएंट की अंतिम डिलीवरी दिसंबर 2024 में हुई थी। इसके अलावा भारतीय नौसेना ने भी एम वेरिएंट के 26 राफेल विमानों का ऑर्डर भी दिया गया है, जिनकी कीमत करीब 63,000 करोड़ रुपए है।
नौसेना के ये राफेल विमान आईएनएस विक्रांत और आईएनएस विक्रमादित्य विमानवाहक पोत से उड़ान भरेंगे। इस सौदे में विमानों की मरम्मत, रखरखाव, जरूरी सामान और कर्मचारियों की ट्रेनिंग की व्यवस्था भी शामिल है।
राफेल विमानों का इस्तेमाल भारत ने पिछले साल मई में हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद ऑपरेशन सिंदूर में किया था, जिसमें पाकिस्तान के ठिकानों पर सटीक हमले किए गए थे।
राफेल विमानों का इस्तेमाल स्कैल्प (एससीएएलपी) मिसाइल को लॉन्च करने के लिए किया गया था, जो 250 किलोमीटर से ज्यादा दूर तक बहुत सटीक हमला कर सकती है। इसके अलावा यह मेटियोर हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल, हैमर हथियार, स्पेक्ट्रा इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली और आधुनिक रडार से भी लैस है।
पिछले साल जून में भारत और फ्रांस ने डसॉल्ट एविएशन और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड के बीच चार बड़े समझौतों की घोषणा की थी, जिससे भारत को राफेल विमानों की डिलीवरी तेजी से मिलने में मदद मिलेगी।
टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स हैदराबाद में एक आधुनिक फैक्ट्री लगाएगी, जहां राफेल विमान के अहम हिस्से बनाए जाएंगे, जिनमें विमान का पिछला हिस्सा, बीच का ढांचा और आगे का हिस्सा शामिल होगा।
इन विमानों के हिस्सों का उत्पादन साल 2028 से शुरू होने की उम्मीद है।
--आईएएनएस
डीबीपी/
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