आजकल के समय में खराब खानपान और अनहेल्दी लाइफस्टाइल की वजह से लोगों में कई तरह की बीमारियों का खतरा बना रहता है। मोटापे से लेकर डायबिटीज और हार्ट डिजीज के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। वहीं आज के समय में हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या भी आम हो गई है। इस बीमारी के पीछे कम फिजिकल एक्टिविटी, गलत खानपान और अधिक स्ट्रेस लेने से शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ जाता है।
जिसका सीधा असर ब्लड सर्कुलेशन, दिल और लिवर पर पड़ता है। अगर आप समय रहते इस पर ध्यान नहीं देते हैं, तो आपके लिए बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है। वहीं आप इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए एक देसी ड्रिंक का सेवन कर सकते हैं, जो LDL की छुट्टी कर सकता है।
ऐसे बनाएं ये ड्रिंक
गुनगुना पानी- एक लीटर
दालचीनी का टुकड़ा- एक इंच
नींबू- आधा कटा हुआ
अदरक- दो स्लाइस
इन सभी चीजों को मिक्स करके रोजाना सुबह खाली पेट पिएं।
दालचीनी का काम
बैड कॉलेस्ट्रॉल को कम करने के लिए दालचीनी काफी सहायक होती है। यह बॉडी में फैट मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाती है और खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने का काम करती है। रोजाना इसका सेवन करने से आपका दिल हेल्दी रहता है।
नींबू का काम
लिवर हेल्थ के लिए नींबू अच्छा होता है। लिवर ही बॉडी में कोलेस्ट्रॉल को प्रोसेस करता है। ऐसे में अगर आप नींबू पानी का सेवन करती हैं, तो लिवर एक्टिव रहता है। इसके सेवन से शरीर में जमा एक्स्ट्रा फैट और बैड कोलेस्ट्रॉल आसानी से बाहर निकल जाते हैं।
अदरक का रोल
अदरक ब्लड सर्कुलेशन को सुधारने में मदद करता है। अगर ब्लड फ्लो सही रहता है, तो कोलेस्ट्रॉल के जमने की संभावना काफी कम हो जाती है। वहीं अदरक आपके डाइजेशन को भी बेहतर बनाता है।
गुनगुने पानी के फायदे
अगर आप रोज गुनगुना पानी पीती हैं, तो यह डाइजेस्टिव सिस्टम को एक्टिव रखता है। रोजाना सुबह गुनगुना पानी पीने से डाइजेशन बेहतर होता है और फैट नहीं जमा हो पाता है। ऐसे में जब आपका डाइजेशन बेहतर होगा, तो कोलेस्ट्रॉल लेवल को कंट्रोल में रखने में आसानी होगी।
पीने का सही तरीका
बता दें कि इस ड्रिंक को आप एक बार में भी पी सकते हैं। या फिर चाहें, तो दिनभर में थोड़ा-थोड़ा सिप लें। इसको लगातार एक से डेढ़ महीने तक के लिए पिया जा सकता है।
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हर एक महिला की जीवन का सबसे अच्छा पल प्रेग्नेंसी के दौरान होता है। प्रत्येक महिला का मां बनने का सपना जरुर देखती है। लेकिन प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को कई तरह की परेशनियों से भी गुजरना पड़ता है। प्रेग्नेंसी के दौरान मूड स्विंग्स से लेकर वजन बढ़ने और बॉडी पेन तक, कई सारी परेशानियां सामने आती हैं। इन सभी तकलीफों के बाद वे रोजाना अपना काम जरुर करती हैं। आजकल ज्यादातर महिलाएं वर्किंग हैं,तो ऐसे में उन्हें ऑफिस तो जाना ही पड़ता है। कुछ महिलाएं ऐसी है जो ऑफिस और घर के काम के लिए कहीं जाने पर ड्राइविंग करती हैं। हालांकि, जैसे-जैसे प्रेग्नेंसी आखिरी महीने में पहुंची है, तो लोगों के मन में डर बना रहता है कि प्रेग्रेंसी के लास्ट मंथ में कार चलाना सेफ है या नहीं। आइए आपको इस लेख में बताते हैं कि प्रेग्नेंसी के आखिरी महीने में ड्राइविंग करना सेफ है या नहीं।
क्या प्रेग्नेंसी के आखिरी महीने में ड्राइव करना सेफ है?
गायनेकोलॉजिस्ट बताते हैं कि प्रेग्नेसी के लास्ट मंथ में कार ड्राइव करना सेफ नहीं माना जाता है। क्योंकि इस समय शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं। इस दौरान पेट काफी हैवी हो जाता है, चलने-फिरने और उठने-बैठने में परेशानी बढ़ जाती है।
इन चीजों का बढ़ सकता है खतरा
अगर आप ड्राइविंग करेंगी तो जल्दी थकान आना, पेट में खिंचाव, अचानक दर्द या कभी भी लेबर पेन शुरु होने का खतरा ज्यादा रहता है। ऐसे में ड्राइव करना रिस्क भरा हो सकता है। डॉक्टर ने बताया है कि यदि आप किसी वजह से ड्राइव करना बहुत जरुरी होता है, तो आपको कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए।
- छोटी दूरी पर ही ड्राइव करें।
-सीट को थोड़ा पीछे रखें ताकि पेट पर दबाव न पड़े।
- ध्यान रखें कि सीट बेल्ट को सही तरीके से लगाएं।
- अकेले ड्राइव करने से बचें।
- किसी भी तरह की परेशानी आए तो तुरंत डॉक्टर के पास जरुर जाएं। क्योंकि एक छोटी-सी लापरवाही बड़ी परेशानी बन सकती हैं।
क्या प्रेग्नेंसी के शुरुआती महीनों में ड्राइव कर सकते हैं?
डॉक्टर ने बताया है कि प्रेग्नेंसी की शुरुआत के महीनों में ड्राइव करना सेफ माना जाता है। हालांकि तब भी सावधानी जरुरी है।
ड्राइव करते समय इन बातों का ध्यान रखें
- जब आप ड्राइव करें तो सीट बेल्ट हमेशा लगाएं।
- लैप बेल्ट पेट के नीचे रहे।
- शोल्डर बेल्ट कंधे के ऊपर से जाए।
- सीट और पेट के बीच थोड़ा गैप रखें।
- लंबी ड्राइव करने से बचें।
- यदि आप थकान, चक्कर या कमजोरी लगे ड्राइव बिल्कुल भी न करें।
हाई-रिस्क प्रेग्रेंसी में क्या करें
यदि आपकी प्रेग्नेंसी हाई-रिस्क है, जैसे
- ब्लड प्रेशर की समस्या
- डायबिटीज
- पहले से कोई कॉम्पिकेशन
इन सभी कंडीशनों के बाद डॉक्टर करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना बहुत जरुरी है। दरअसल, हर महिला की कंडीशन अलग होती है इसलिए किसी के कहने पर ड्राइव बिल्कुल न करें। तो आप प्रेग्नेंसी के आखिरी महीने में ड्राइव करती हैं तो यह जोखिम हो सकता है।
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