Responsive Scrollable Menu

Explainer: जंतर-मंतर अब विरोध प्रदर्शनों का केंद्र नहीं? De-notification से क्या बदलेगा, समझें पूरा मामला

Jantar Mantar De-notification: दिल्ली का जंतर-मंतर दशकों से विरोधप्रदर्शन और अपनी आवाज सत्ता तक पहुंचाने की कोशिश का अहम केंद्र रहा है. भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन हो, निर्भया मामले में न्याय की मांग या फिर NEET परीक्षा में कथित पेपर लीक का विरोध, इस जगह ने कई बड़े आंदोलनों को करीब से देखा है. लेकिन अब दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटा दिया है. इसके बदले रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली के CBD ग्राउंड को प्रदर्शन के लिए तय किया गया है. यह बदलाव 11 अक्टूबर 2026 के पुलिस आदेश के बाद लागू हुआ.

इस फैसले के बाद सबसे बड़ा सवाल है कि Denotification का मतलब क्या है? क्या अब जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करना पूरी तरह बंद हो जाएगा? क्या लोगों के विरोध करने के अधिकार पर असर पड़ेगा? और नए प्रदर्शन स्थलों पर जाने से आंदोलन का तरीका कैसे बदल सकता है? आइए, बुलेट पॉइंट्स के साथ पूरा मामला समझते हैं.

1. Denotification का मतलब क्या है?

Denotification का आसान मतलब है किसी जगह को आधिकारिक रूप से तय दर्जे या सूची से हटा देना. इस मामले में जंतर-मंतर को उस सूची से हटा दिया गया है, जहां प्रदर्शन और धरना आयोजित करने के लिए निर्धारित स्थल के रूप में उसकी पहचान थी.

दिल्ली पुलिस के 11 अक्टूबर के आदेश के मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से गठित समिति ने प्रदर्शन के लिए वैकल्पिक जगहों पर विचार किया था. उसकी सिफारिशों के आधार पर जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाकर तीन नए स्थान तय किए गए.

इसका सीधा मतलब यह है कि अब प्रदर्शन आयोजित करने के लिए जंतर-मंतर को पहले की तरह आधिकारिक निर्धारित स्थल नहीं माना जाएगा.

इस फैसले से क्या बदलेगा?

  • जंतर-मंतर पर प्रदर्शन आयोजित करने की पहले जैसी व्यवस्था खत्म हो गई है.
  • प्रदर्शन के लिए रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और CBD ग्राउंड को निर्धारित किया गया है.
  • नए स्थलों पर प्रदर्शन के लिए लागू होने वाली विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया यानी SOP अलग से जारी की जानी है.
  • प्रदर्शन की अनुमति, सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन को लेकर नई व्यवस्था की भूमिका अहम होगी.

हालांकि, Denotification का अर्थ यह नहीं है कि संविधान में शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार खत्म हो गया है. इसका संबंध मुख्य रूप से प्रदर्शन आयोजित करने के लिए निर्धारित स्थल की व्यवस्था से है.

2. जंतर-मंतर इतना खास क्यों रहा है?

जंतर-मंतर की पहचान सिर्फ एक ऐतिहासिक जगह के तौर पर नहीं है. संसद, राष्ट्रपति भवन और केंद्र सरकार के प्रमुख कार्यालयों के नजदीक होने के कारण यह लंबे समय तक विरोध दर्ज कराने का एक अहम केंद्र रहा है.

यहां अलगअलग मुद्दों पर आम नागरिकों, सामाजिक संगठनों, छात्रों, किसानों और राजनीतिक समूहों ने प्रदर्शन किए. कई बार यहां शुरू हुआ विरोध देशव्यापी चर्चा का हिस्सा बन गया.

जंतर-मंतर पर हुए कुछ प्रमुख आंदोलनों पर नजर डालिए:

  • 1993 का प्रदर्शन: आर्थिक नीतियों और सांप्रदायिकता के विरोध में कई संगठनों ने यहां जुटान किया था.
  • 2011 का अन्ना आंदोलन: अन्ना हजारे ने मजबूत जन लोकपाल कानून की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की.
  • 2012 का निर्भया आंदोलन: दिल्ली में सामूहिक दुष्कर्म की घटना के बाद महिला सुरक्षा और न्याय की मांग को लेकर प्रदर्शन हुए.
  • 2016 का विरोध: अरुणाचल प्रदेश के छात्र नीडो तानिया की मौत और जेएनयू से जुड़े मुद्दों पर प्रदर्शन हुए.
  • 2017 का किसान आंदोलन: तमिलनाडु के किसानों ने कृषि संकट की ओर ध्यान खींचने के लिए धरना दिया.
  • 2023 का पहलवानों का प्रदर्शन: महिला पहलवानों ने भारतीय कुश्ती महासंघ के तत्कालीन अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया.
  • 2024 और 2026 में NEET विवाद: परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक को लेकर छात्रों ने विरोध दर्ज कराया.

इन आंदोलनों ने जंतर-मंतर को ऐसी जगह बना दिया, जहां किसी मुद्दे को लेकर लोग इकट्ठा होकर मीडिया और सरकार का ध्यान खींचने की कोशिश करते थे.

3. जंतर-मंतर को हटाने के पीछे क्या वजह बताई गई?

दिल्ली पुलिस और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े लोगों की दलील है कि जंतर-मंतर मध्य दिल्ली के संवेदनशील क्षेत्र में स्थित है. यहां बड़े प्रदर्शन होने पर यातायात, भीड़ नियंत्रण और महत्वपूर्ण व्यक्तियों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है.

पूर्व CRPF अधिकारी आर.के. यादव ने भी सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिहाज से इस फैसले के संभावित प्रभावों पर बात की. वहीं, वरिष्ठ सुरक्षा योजनाकार आनंद निंबाडिया ने कहा कि किसी भी प्रदर्शन की व्यवस्था में केवल जगह चुनना ही पर्याप्त नहीं है. इसके लिए पुलिस, खुफिया एजेंसियों और यातायात अधिकारियों के बीच तालमेल जरूरी होता है.

उनके मुताबिक, वैकल्पिक स्थलों पर प्रदर्शन आयोजित करने से भीड़ को व्यवस्थित करने और यातायात की योजना बनाने में मदद मिल सकती है. हालांकि, यह भी जरूरी है कि प्रदर्शनकारियों को उन जगहों तक पहुंचने में अनावश्यक परेशानी न हो और वहां पर्याप्त परिवहन व सुरक्षा सुविधाएं मौजूद हों.

यानी प्रशासन का तर्क है कि प्रदर्शन की जगहों को व्यवस्थित करने से राजधानी के संवेदनशील हिस्सों पर दबाव कम किया जा सकता है. लेकिन यह भी देखना होगा कि नई व्यवस्था में लोगों के लिए विरोध दर्ज कराना कितना आसान रहता है.

4. नए प्रदर्शन स्थल कौनकौन से हैं?

जंतर-मंतर की जगह तीन वैकल्पिक स्थल निर्धारित किए गए हैं. इनका उद्देश्य दिल्ली में प्रदर्शन और धरने आयोजित करने के लिए दूसरी जगहें उपलब्ध कराना है.

नए निर्धारित प्रदर्शन स्थल:

  • रामलीला मैदान: पुरानी दिल्ली के इलाके में स्थित यह मैदान पहले भी बड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों और आंदोलनों का केंद्र रहा है.
  • बुराड़ी मैदान: उत्तरी दिल्ली में स्थित यह जगह प्रदर्शन आयोजित करने के लिए तय की गई है.
  • CBD ग्राउंड: पूर्वी दिल्ली का यह मैदान भी नए निर्धारित प्रदर्शन स्थलों में शामिल है.

दिल्ली पुलिस के आदेश में कहा गया है कि इन तीनों स्थलों पर प्रदर्शन आयोजित करने के लिए विस्तृत और संशोधित SOP अलग से जारी की जाएगी. इसलिए अनुमति की प्रक्रिया, भीड़ की सीमा, समय और दूसरी व्यवस्थाओं के बारे में अंतिम जानकारी संबंधित दिशानिर्देशों से ही स्पष्ट होगी.

5. प्रदर्शनकारियों के लिए क्या बदलेगा?

सबसे बड़ा बदलाव प्रदर्शन की जगह और उससे जुड़ी तैयारी में आएगा. जंतर-मंतर की केंद्रीय स्थिति के कारण प्रदर्शनकारियों के लिए मीडिया तक पहुंचना और सरकारी संस्थानों के नजदीक अपनी बात रखना अपेक्षाकृत आसान था. अब कई संगठनों को नए स्थलों के हिसाब से अपनी योजना बनानी होगी.

इसका असर कई तरह से पड़ सकता है:

  • यात्रा और खर्च: कुछ प्रदर्शनकारियों को नए स्थलों तक पहुंचने के लिए ज्यादा समय या पैसा खर्च करना पड़ सकता है.
  • मीडिया की पहुंच: प्रदर्शन की खबर कितनी तेजी से और कितने बड़े स्तर पर सामने आती है, इस पर स्थान का असर पड़ सकता है.
  • आयोजन की तैयारी: संगठनों को स्थल की उपलब्धता, अनुमति और सुरक्षा संबंधी शर्तों को पहले से समझना होगा.
  • भीड़ प्रबंधन: अलगअलग स्थानों पर प्रदर्शन होने से कुछ इलाकों में भीड़ और यातायात का दबाव कम हो सकता है.
  • सुविधाओं की जरूरत: पानी, शौचालय, सार्वजनिक परिवहन और आपातकालीन चिकित्सा जैसी सुविधाएं उपलब्ध होना जरूरी होगा.

हालांकि, इन बदलावों का वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि नए स्थलों पर अनुमति की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी है और प्रदर्शनकारियों को कितनी सुविधाएं मिलती हैं.

6. क्या शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार खत्म हो गया?

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19(1)(a) नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है और अनुच्छेद 19(1)(b) शांतिपूर्वक तथा बिना हथियार इकट्ठा होने का अधिकार देता है. इन अधिकारों पर संविधान में निर्धारित आधारों पर उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं.

इसका मतलब है कि लोगों को अपनी बात रखने और शांतिपूर्ण विरोध करने का अधिकार है, लेकिन किसी भी स्थान पर किसी भी तरह का प्रदर्शन करने की असीमित छूट नहीं है. प्रशासन सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था और यातायात को ध्यान में रखते हुए प्रदर्शन के लिए नियम बना सकता है.

दूसरी ओर, किसी प्रदर्शन को नियंत्रित करने की व्यवस्था ऐसी भी नहीं होनी चाहिए कि शांतिपूर्ण विरोध करना व्यवहार में बेहद कठिन हो जाए. इसलिए किसी स्थान को बदलने के फैसले का आकलन इस आधार पर भी होगा कि वैकल्पिक जगहें लोगों के लिए वास्तव में सुलभ हैं या नहीं.

याद रखने वाली बात: जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाना और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के संवैधानिक अधिकार को खत्म करना दो अलग बातें हैं.

7. लोकतंत्र के लिए यह फैसला क्यों महत्वपूर्ण है?

लोकतंत्र में चुनाव और संसद की भूमिका जितनी अहम है, उतनी ही अहम नागरिकों की आवाज भी है. जब लोग किसी फैसले, नीति या व्यवस्था से असहमत होते हैं, तो शांतिपूर्ण प्रदर्शन उनके लिए अपनी बात सामने रखने का एक माध्यम होता है.

जंतर-मंतर जैसे स्थल इसलिए महत्वपूर्ण रहे हैं, क्योंकि यहां अलगअलग पृष्ठभूमि के लोग अपने मुद्दे लेकर एक जगह जुट सकते थे. अब चुनौती यह होगी कि वैकल्पिक स्थलों पर भी लोगों को अपनी बात रखने का प्रभावी अवसर मिले.

एक तरफ प्रशासन को सुरक्षा और यातायात की जिम्मेदारी निभानी है. दूसरी तरफ यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि व्यवस्था के नाम पर शांतिपूर्ण विरोध करने वालों के लिए अनावश्यक बाधाएं न खड़ी हों.

 जगह बदली है, लेकिन सवाल अधिकारों और पहुंच का है

जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाकर रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और CBD ग्राउंड को विकल्प बनाना दिल्ली में विरोधप्रदर्शन की व्यवस्था में बड़ा बदलाव है. प्रशासन इसे सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन से जोड़कर देख रहा है, जबकि चिंता यह है कि इससे लोगों के लिए सत्ता तक अपनी आवाज पहुंचाना कितना आसान या मुश्किल होगा.

आखिरकार, इस फैसले का वास्तविक असर नई SOP, अनुमति की प्रक्रिया, परिवहन सुविधाओं और प्रदर्शनकारियों के साथ प्रशासन के व्यवहार से तय होगा. सवाल सिर्फ यह नहीं है कि प्रदर्शन कहां होंगे, बल्कि यह भी है कि क्या लोग बिना अनावश्यक परेशानी के अपनी बात रख पाएंगे.

यह भी पढ़ें: जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन की जगह के तौर पर डी-नोटिफाई करने की CJP ने की निंदा, उठाए कई सवाल

Continue reading on the app

Breaking News Today Live Updates: उत्तर-पूर्वी दिल्ली के सोनिया विहार इलाके में गोलीबारी, एक व्यक्ति घायल

Breaking News Today Live Updates: आज 14 अक्टूबर 2026 और दिन बुधवार है. दिल्ली समेत उत्तर भारत में ठंड की शुरुआत हो गई है. रात और सुबह के समय लोगों को हल्की ठंड का अहसास होने लगा है. हालांकि देश के कई इलाकों में अभी भी बारिश का दौर जारी है. इस बीच मौसम विभाग ने आज भी देश के कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आज केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक हो सकती है, जिसमें रेलवे के करीब 11 लाख कर्मचारियों के लिए वित्त वर्ष 2025-26 के बोनस पर फैसला हो सकता है. वहीं समाजवादी पार्टी से निष्कासित किए गए तीन बागी विधायक राकेश प्रताप सिंह (गौरीगंज), अभय सिंह (गोसाईंगंज), और विनोद चतुर्वेदी (कालपी) आज औपचारिक रूप से बीजेपी का दामन थामेंगे.

उधर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज से दो दिवसीय दौरे पर वाराणसी पहुंचेंगे. वहीं यूपी बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष एवं केन्द्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी आज अमेठी के प्रवास पर रहेंगे. उधर पंचायती राज मंत्रालय विशेष अभियान 6.0 के तहत आज देश भर में स्वच्छता अभियान चलाएगा. साथ ही लंबित मामलों का निपटारा भी करेगा. वहीं भारतीय निर्यात संगठन महासंघ (FIEO) की ग्वांगझोऊ सोर्सिंग मेले में अंतरराष्ट्रीय भागीदारी आज से शुरू होगी. ऐसी ही तमाम खबरों के लिए जुड़े रहें न्यूज नेशन के साथ… हमें फॉलो कीजिए हमारे X हैंडल @NewsNationTV  इंस्टाग्राम- @newsnationtv फेसबुक- @NewsNationChannel यूट्यूब- @NewsNationTV

Continue reading on the app

  Sports

Suryakumar Yadav, Dubai Home: सूर्यकुमार यादव ने दुबई में क्यों खरीदा घर? ये है बड़ी वजह

Suryakumar Yadav new house in Dubai: सूर्यकुमार यादव ने दुबई में घर खरीदा है. घर आलीशान है और खूबियों से भरा भी. लेकिन, सवाल ये कि सूर्यकुमार यादव के दुबई में घर खरीदने के फैसले की वजह क्या है. Wed, 14 Oct 2026 07:35:30 +0530

  Videos
See all

AAJTAK 2 | WEATHER UPDATE | ठंड की दस्तक, आंधी-बारिश की चेतावनी! | AT2 #tmktech #vivo #v29pro
2026-10-14T00:35:00+00:00

Casual look में दिखीं Soha Ali Khan, फैंस हुए फिदा! | #viralvideo #viralnews #shorts #tmktech #vivo #v29pro
2026-10-14T00:10:33+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers