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ड्रीम बजट 2026-27: विकसित भारत के निमित्त शहरी विकास आवंटन में दृष्टिगोचर हुआ व्यापक बदलाव

भारत के बजट 2026-27 में शहरी विकास के लिए प्रस्तावित ₹20,000 करोड़ का आवंटन वास्तव में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देता है, लेकिन उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह सीधे तौर पर ₹20,000 करोड़ का एकमुश्त खर्च शहरी विकास के लिए नहीं है। दरअसल, यह राशि मुख्य रूप से औद्योगिक क्षेत्रों में कार्बन कैप्चर प्रोजेक्ट्स से जुड़ी हो सकती है, जबकि शहरी विकास के लिए City Economic Regions (CER) पर 5 वर्षों में ₹5,000 करोड़ का निवेश प्रस्तावित है।

हालांकि, इस व्यापक बदलाव का स्वरूप उल्लेखनीय है क्योंकि यह आवंटन पिछले बजटों से अलग है। चूंकि यह अब बड़े महानगरों से हटकर टियर-2 और टियर-3 शहरों (5 लाख से अधिक आबादी वाले) पर फोकस करता है, जहां बुनियादी ढांचे, पुनर्विकास और आर्थिक क्षेत्रों का विकास होगा। इससे छोटे शहरों में रियल एस्टेट, लॉजिस्टिक्स हब और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

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देखा जाए तो पिछले बजटों से तुलना में यह विशेष कदम है, क्योंकि पिछले वर्षों में शहरी विकास के लिए AMRUT जैसी योजनाओं पर जोर था, लेकिन 2026-27 में CER मॉडल के तहत विशिष्ट ग्रोथ ड्राइवर्स पर आधारित योजना बनेगी, जो  ₹1 लाख करोड़ के बड़े फंड का हिस्सा है (2025-26 के लिए ₹10,000 करोड़)। ₹20,000 करोड़ का यह आंकड़ा सस्टेनेबल इंफ्रास्ट्रक्चर और एसेट रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देगा।

इसका सकारात्मक प्रभाव शहरी विकास पर पड़ेगा। लिहाजा यह बदलाव विकसित भारत@2047 के लक्ष्य को मजबूत करेगा, छोटे शहरों को विकास केंद्र बनाएगा और निजी निवेश को आकर्षित करेगा, जिससे शहरीकरण अधिक समावेशी होगा। हालांकि, सटीक ₹20,000 करोड़ शहरी विकास के लिए स्पष्ट नहीं मिला—यह कार्बन प्रोजेक्ट्स से जुड़ा प्रतीत होता है।

इस बारे में कोसमोस पम्पस के सीईओ व कोफाउंडर अंकित जैन ने कहा कि भारत के शहरी विकास के लिए प्रस्तावित ₹20,000 करोड़ का खर्च एक बड़ा बदलाव है, जिसमें टियर-टू, टियर-थ्री शहरों और मंदिर वाले शहरों पर विशेष ध्यान दिया गया है। यह प्रस्ताव शहरों को न केवल आबादी के केंद्र के रूप में देखता है, बल्कि इनोवेशन, रोजगार और उत्पादकता के लिए एक शक्तिशाली इंजन के रूप में भी उपयोग होगा। 

जैन के मुताबिक, भारत को स्मार्ट शहर बनाने के लिए, सिर्फ़ डिजिटल समाधानों पर ध्यान देने के बजाय मज़बूत फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी उतना ही ध्यान देना होगा—खासकर वॉटर मैनेजमेंट, एनर्जी एफिशिएंसी और सस्टेनेबल यूटिलिटीज़ पर। क्योंकि आधुनिक शहरों को बढ़ती आबादी और इंडस्ट्रीज़ को सपोर्ट करने के लिए इंटेलिजेंट पंपिंग सिस्टम, कुशल वॉटर सप्लाई, वेस्टवॉटर मैनेजमेंट और क्लाइमेट-रेडी इंफ्रास्ट्रक्चर की ज़रूरत है। 

लिहाजा हर सिटी इकोनॉमिक रीजन के लिए ₹5,000 करोड़ का चैलेंज-बेस्ड आवंटन कॉम्पिटिशन, इनोवेशन और नतीजे-आधारित प्लानिंग को बढ़ावा देता है, जो लंबे समय की सफलता के लिए बहुत ज़रूरी है। इस बात में कोई दो राय नहीं कि शहरी आर्थिक क्षेत्रों (City Economic Regions - CER) की योजना बजट 2026-27 में छोटे शहरों (टियर-2 और टियर-3) के समावेशी विकास पर केंद्रित है। यह योजना केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों के संयुक्त प्रयासों से लागू होगी, जिसमें ₹5,000 करोड़ का प्रारंभिक आवंटन है।

इसकी कार्यान्वयन प्रक्रिया भी स्पष्ट है, क्योंकि योजना का क्रियान्वयन चरणबद्ध तरीके से होगा। पहले राज्यों द्वारा 5 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों का चयन, फिर ग्रोथ ड्राइवर्स (जैसे लॉजिस्टिक्स हब, रियल एस्टेट) पर आधारित मास्टर प्लान तैयार करना। इसके बाद निजी निवेश आकर्षित करने के लिए PPP मॉडल और सेंट्रल फंडिंग का उपयोग होगा।

इसके प्रमुख चरण अंतर्गत चयन और योजना पर ध्यान देना होगा। खासकर राज्य शीर्ष समितियां बनाकर शहरों का चयन करेंगी, फिर 20 वर्षीय एकीकृत योजनाएं (परिवहन, आवास, भूमि उपयोग) तैयार करेंगी। ततपश्चात फंडिंग होगी। इस बाबत केंद्र से ₹5,000 करोड़ + एसेट मोनेटाइजेशन से अतिरिक्त संसाधन; और निजी क्षेत्र को तकनीकी सहायता। इसके बाद मॉनिटरिंग होगी और MoHUA और नीति आयोग के तहत डिजिटल प्लेटफॉर्म से प्रगति की ट्रैकिंग सुनिश्चित की जाएगी। इसका अपेक्षित प्रभाव होगा कि यह AMRUT और स्मार्ट सिटीज से आगे बढ़कर आर्थिक विकास को गति देगा, रोजगार सृजन करेगा और विकसित भारत@2047 लक्ष्य को मजबूत करेगा।

कहना न होगा कि शहरी आर्थिक क्षेत्रों (CER) की 20 वर्षीय नगर योजनाएं टियर-2 और टियर-3 शहरों के दीर्घकालिक विकास पर केंद्रित हैं। ये योजनाएं एकीकृत मास्टर प्लान के रूप में तैयार की जाती हैं, जो शहरीकरण को व्यवस्थित और समावेशी बनाने का लक्ष्य रखती हैं।इसके मुख्य फोकस क्षेत्र परिवहन और कनेक्टिविटी हैं। जिसके तहत मेट्रो, लॉजिस्टिक्स हब, और सड़क नेटवर्क का विस्तार किया जाएगा, ताकि शहर आर्थिक केंद्र बन सकें।

वहीं आवास और भूमि उपयोग की रणनीति के तहत किफायती आवास, स्लम पुनर्विकास, और भूमि बैंकिंग के माध्यम से समावेशी विकास। सम्भव किया जाएगा। जबकि आर्थिक विकास के दृष्टिगत रियल एस्टेट, औद्योगिक पार्क, और रोजगार सृजन पर जोर होगा, जो निजी निवेश को आकर्षित करेगा। साथ ही पर्यावरण और बुनियादी सुविधाएं बढ़ाई जाएंगी, क्योंकि ये योजनाएं सस्टेनेबल विकास सुनिश्चित करती हैं, जिसमें जल आपूर्ति, बिजली, अपशिष्ट प्रबंधन, और हरित ऊर्जा शामिल हैं। ई-गवर्नेंस और डिजिटल प्लेटफॉर्म से मॉनिटरिंग होगी।

इसकी कार्यान्वयन संरचना राज्य-स्तरीय समितियां तय करेंगी और वही इन योजनाओं को तैयार करेंगी, जिसके लिए केंद्र से फंडिंग (₹5,000 करोड़ प्रारंभिक) और PPP मॉडल से समर्थन मिलेगा। इससे विकसित भारत@2047 लक्ष्य मजबूत होगा।

- अंकित जैन
सीईओ व कोफाउंडर, कोसमोस पम्पस

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Vaibhav Suryavanshi: अंडर-19 वर्ल्ड कप हीरो, सचिन से तुलना और टीम इंडिया की दहलीज

कुछ खास पारियां सिर्फ स्कोरकार्ड नहीं बदलतीं, वे भविष्य की दिशा तय करती हैं। भारत की अंडर-19 विश्व कप 2026 की ऐतिहासिक जीत भी कुछ ऐसी ही रही, जहां कई युवा खिलाड़ियों ने योगदान दिया, लेकिन सबसे चमकदार नाम वैभव सूर्यवंशी का रहा। 

बता दें कि वैभव सूर्यवंशी ने फाइनल में सिर्फ 80 गेंदों पर 175 रनों की विस्फोटक पारी खेली। यह न सिर्फ भारत को छठा अंडर-19 विश्व कप खिताब दिलाने वाली पारी बनी, बल्कि अंडर-19 विश्व कप फाइनल का सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर भी दर्ज हुआ। जिस आत्मविश्वास और बेखौफ अंदाज में उन्होंने बड़े शॉट्स लगाए, उसने उम्र की सीमाओं को गौण कर दिया।

गौरतलब है कि इतनी कम उम्र में लगातार बड़ी पारियां खेलने वाले वैभव को लेकर अब वही पुरानी बहस फिर शुरू हो गई है कि क्या असाधारण प्रतिभाओं को जल्दी आगे बढ़ाया जाना चाहिए। इसी कड़ी में कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने वैभव की तुलना सीधे सचिन तेंदुलकर से कर दी। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा कि पिछली बार जब 14 साल का कोई जीनियस बल्लेबाजी कर रहा था, उसका नाम सचिन तेंदुलकर था और भारत ने उन्हें ज्यादा इंतजार नहीं कराया।

मौजूद जानकारी के अनुसार, यह तुलना यूं ही नहीं की जा रही। सचिन तेंदुलकर ने स्कूल और घरेलू क्रिकेट में रनों का अंबार लगाने के बाद महज 16 साल की उम्र में 1989 में पाकिस्तान के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय पदार्पण किया था। इसके बाद उन्होंने करीब ढाई दशक तक भारतीय क्रिकेट की पहचान गढ़ी।

हालांकि, वैभव सूर्यवंशी के मामले में तस्वीर थोड़ी अलग है। मौजूदा दौर में आईसीसी की न्यूनतम आयु नीति एक बड़ी बाधा बनकर सामने है। बता दें कि 2020 में लागू इस नियम के तहत कोई भी खिलाड़ी 15 साल से पहले अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट नहीं खेल सकता। वैभव का जन्म 27 मार्च 2011 को हुआ है और फरवरी 2026 में विश्व कप जीत के समय उनकी उम्र तकनीकी रूप से 14 साल ही थी।

इसका मतलब यह है कि चाहे वे बिहार के लिए घरेलू क्रिकेट में कितने ही रन क्यों न बना लें या आईपीएल में राजस्थान रॉयल्स की ओर से अनुभवी गेंदबाजों को कितनी ही बार निशाना क्यों न बनाएं, भारतीय टीम में चयन के लिए उन्हें 27 मार्च 2026 तक इंतजार करना ही होगा। चयनकर्ताओं के पास नियमों से बाहर जाने का कोई विकल्प नहीं है।

फिलहाल, सचिन तेंदुलकर की मिसाल और शशि थरूर जैसे प्रभावशाली चेहरों के समर्थन के बावजूद वैभव सूर्यवंशी का सीनियर भारतीय टीम का सपना कैलेंडर के पन्ने पलटने का इंतजार कर रहा है। अगर सब कुछ सामान्य रहा, तो मार्च 2026 के बाद भारतीय क्रिकेट को एक और असाधारण कहानी मिलने की पूरी संभावना बनती दिख रही है।
Tue, 10 Feb 2026 22:08:40 +0530

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