हर मिनट 4 महिलाओं को हो रहा ब्रेस्ट कैंसर, बचाव के लिए रोजमर्रा की इन आदतों में करें सुधार
नई दिल्ली, 12 अक्टूबर (आईएएनएस)। ब्रेस्ट कैंसर आज दुनियाभर में महिलाओं की सेहत से जुड़ी एक बड़ी चिंता बन चुका है। हर मिनट 4 महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का पता चलता है जबकि हर मिनट एक महिला की इस बीमारी से मौत हो जाती है। इस बीमारी के मामले लगातार लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। यही वजह है कि अक्टूबर को ब्रेस्ट कैंसर जागरूकता महीने के रूप में मनाया जाता है, ताकि लोगों को इस बीमारी के जोखिम, बचाव और समय पर पहचान के महत्व के बारे में बताया जा सके।
इस बीच संयुक्त राष्ट्र ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए ब्रेस्ट कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाने की अपील की है। ब्रेस्ट कैंसर एक ऐसी बीमारी है, जिसमें स्तन की असामान्य कोशिकाएं तेजी से बढ़ने लगती हैं और धीरे-धीरे ट्यूमर का रूप ले सकती हैं। इसकी शुरुआत आमतौर पर दूध बनाने वाले लोब्यूल्स या दूध की नलिकाओं से होती है। अगर समय रहते बीमारी की पहचान और इलाज न हो, तो कैंसर आसपास के ऊतकों, लिम्फ नोड्स और शरीर के दूसरे अंगों तक फैल सकता है। ऐसी स्थिति में बीमारी गंभीर और जानलेवा हो सकती है।
हालांकि, अच्छी बात यह है कि अगर ब्रेस्ट कैंसर का शुरुआती चरण में पता चल जाए, तो इलाज के बेहतर नतीजे मिलने और मरीज के जीवित रहने की संभावना बढ़ सकती है। इसलिए शरीर में होने वाले बदलावों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2024 में दुनियाभर में अनुमानित 24 लाख महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का पता चला और करीब 6 लाख 94 हजार महिलाओं की मौत इस बीमारी के कारण हुई। ब्रेस्ट कैंसर दुनिया के लगभग हर देश में महिलाओं को प्रभावित करता है। उम्र बढ़ने के साथ इसका जोखिम भी बढ़ता जाता है। हालांकि, कम उम्र की महिलाओं में भी यह बीमारी हो सकती है।
संयुक्त राष्ट्र ने ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम कम करने के लिए कुछ जरूरी आदतों पर ध्यान देने की सलाह दी है। सबसे पहले धूम्रपान से दूरी बनाने की सलाह दी गई है। धूम्रपान सेहत के लिए कई तरह से नुकसानदायक है। इससे कैंसर समेत कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ता है। इसलिए सिगरेट, बीड़ी और दूसरे तंबाकू उत्पादों से दूरी बनाना बेहतर है। इसके साथ ही शराब का सेवन भी नहीं करना चाहिए।
रोजाना टहलना, योग करना, साइकिल चलाना या अपनी क्षमता के अनुसार व्यायाम करना सेहत के लिए फायदेमंद है। नियमित शारीरिक गतिविधि वजन को नियंत्रित रखने और ब्रेस्ट कैंसर के जोखिम को कम करने में मदद कर सकती है।
स्तन में नई गांठ, स्तन के आकार या त्वचा में बदलाव, निप्पल का अंदर की ओर मुड़ना या निप्पल से असामान्य स्राव जैसे लक्षण दिखाई दें, तो डॉक्टर से सलाह लें। हर गांठ कैंसर नहीं होती, लेकिन इसकी जांच कराना जरूरी है। किसी भी उम्र में ऐसे बदलावों को अनदेखा न करें।
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डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
रोज करें गोमुखासन, कंधे-पीठ के दर्द से मिलेगी राहत, फेफड़े होंगे मजबूत
नई दिल्ली, 12 अक्टूबर (आईएएनएस)। आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में खुद को स्वस्थ और तनावमुक्त रखने के लिए योग करना एक अच्छा विकल्प है। योग के विभिन्न आसनों में गोमुखासन शरीर को लचीला और मांसपेशियों को मजबूत रखने में मदद करता है।
गोमुखासन नाम दो शब्दों से मिलकर बना है- गो यानी गाय और मुख यानी मुंह। इस आसन को करते समय शरीर की आकृति गाय के मुंह के समान दिखती है, इसलिए इसे गोमुखासन कहा जाता है। इस आसन को नियमित रूप से करने से कंधों, छाती और पीठ के ऊपरी हिस्से में खिंचाव मसूस होता है। इस आसन में शरीर की मुद्रा गायक के मुख जैसी दिखाई देती है, इसलिए इसे गोमुखासन कहा जाता है।
आयुष मंत्रालय के अनुसार, गोमुखासन बैठकर किए जाने वाले महत्वपूर्ण आसनों में से एक है, जो आसन छाती और कंधों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। दरअसल, इस आसन को करने के दौरान हाथों को पीठ के पीछे ले जाकर आपस में बांधा जाता है और छाती को आगे की ओर खोला जाता है। इस प्रक्रिया से छाती के हिस्से में खिंचाव आता है और छाती पूरी तरह से खुल जाती है। छाती खुलने से फेफड़ों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। फेफड़ों को फैलने और सिकुड़ने के लिए ज्यादा जगह मिलती है, जिससे उनकी कार्यक्षमता बढ़ती है और शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह बेहतर होता है। यही कारण है कि यह आसन सांस से जुड़ी समस्याओं में काफी मददगार है।
नियमित रूप से गोमुखासन का अभ्यास करने से अस्थमा, सांस फूलना और छाती में जकड़न जैसी परेशानियों में आराम मिलता है। इसके अलावा यह आसन कंधों और गर्दन की अकड़न को दूर करता है, पीठ को मजबूत बनाता है और शरीर के पोस्चर को भी सुधारता है।
यदि शुरुआत में पीठ के पीछे दोनों हाथ आपस में न मिलें, तो जबरदस्ती न करें। इसकी जगह आप किसी योग स्ट्रैप या रूमाल का सहारा ले सकते हैं। किसी भी व्यक्ति के घुटनों, कूल्हों, कंधों, कलाई या गर्दन में गंभीर दर्द या चोट है, तो यह आसन न करें।
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