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‘ऑपरेशन हेरोफ-2’ समाप्त, उद्देश्यों की प्राप्ति का दावा: बलोच लिबरेशन आर्मी

नई दिल्ली, 8 फरवरी (आईएएनएस)। रक्तपात, कथित दमन और जबरन गायब किए जाने की घटनाओं से जूझ रहे बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के खिलाफ विरोध तेज होने के बीच बलोच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने एक सप्ताह तक चले अपने अभियान ‘ऑपरेशन हेरोफ-2’ के समाप्त होने का दावा किया है। संगठन ने कहा है कि इस अभियान में उसके उद्देश्यों की पूर्ति हो गई है।

बीएलए की ओर से जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि बलूच लड़ाकों ने कई शहरों और कस्बों में एक साथ हमले किए, जिन्हें ‘ऑपरेशन हेरोफ-2’ नाम दिया गया। संगठन का दावा है कि इन हमलों में पाकिस्तानी सेना को भारी नुकसान हुआ।

द बलूचिस्तान पोस्ट (टीबीपी) की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह समन्वित शहरी अभियान बलूचिस्तान के 14 से अधिक शहरों में फैला हुआ था और इसे बीएलए के इतिहास का सबसे बड़ा, सबसे तीव्र और सबसे संगठित सैन्य अभियान बताया गया है।

बीएलए के प्रवक्ता जीयंद बलोच के बयान का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि बलूच लड़ाकों ने कई स्थानों पर एक साथ हमले कर सुरक्षा चौकियों, सैन्य ठिकानों और कुछ शहरी इलाकों पर अस्थायी नियंत्रण स्थापित किया। संगठन का दावा है कि कुछ शहरों में बीएलए की इकाइयां लगातार छह दिनों तक डटी रहीं, जिससे पाकिस्तानी सुरक्षा बलों को पीछे हटना पड़ा।

टीबीपी की रिपोर्ट में बीएलए अधिकारियों के हवाले से दावा किया गया है कि इस अभियान के दौरान पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के 362 से अधिक जवान मारे गए। बीएलए के अनुसार, इनमें पाकिस्तानी सेना, फ्रंटियर कोर, पुलिस और कथित तौर पर राज्य समर्थित सशस्त्र समूहों के सदस्य शामिल थे।

बीएलए प्रवक्ता ने यह भी दावा किया कि संगठन के लड़ाकों ने 17 पाकिस्तानी सुरक्षा कर्मियों को हिरासत में लिया था, जिन्हें बाद में रिहा कर दिया गया। उन्होंने कहा कि शेष बंदियों के खिलाफ कथित युद्ध अपराधों और जनसंहार से जुड़े मामलों में कार्रवाई की जाएगी।

प्रवक्ता ने ‘हेरोफ-2’ के उद्देश्यों को दोहराते हुए भविष्य में ऐसे सशस्त्र अभियानों की संभावना से भी इनकार नहीं किया। उन्होंने कहा, “पहला उद्देश्य यह दिखाना था कि बलूच लड़ाकों में शहरी केंद्रों पर हमला करने और वहां नियंत्रण स्थापित करने की क्षमता है। दूसरा, बलूच जनता को यह संदेश देना कि प्रतिरोध सामूहिक भरोसे और संगठनात्मक शक्ति पर आधारित है। तीसरा उद्देश्य बलूचिस्तान में पाकिस्तानी बलों के कथित निर्विवाद प्रभुत्व को चुनौती देना था।”

--आईएएनएस

डीएससी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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बायकॉट से U-turn लेगा Pakistan? T20 World Cup में खेलने के लिए ICC से की 3 बड़ी मांगें

पाकिस्तान जल्द ही टी20 विश्व कप में भारत के खिलाफ मैच के बहिष्कार के अपने रुख से पीछे हट सकता है। गतिरोध को समाप्त करने के लिए, पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड, अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद और बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड के बीच रविवार शाम लाहौर में एक त्रिपक्षीय बैठक हुई, जिसमें पीसीबी ने अपनी मांगें स्पष्ट कर दीं। खबरों के मुताबिक पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के समक्ष तीन मांगें रखी हैं, यदि आईसीसी उसकी सरकार से परामर्श करना चाहती है और 15 फरवरी को भारत के खिलाफ टी20 विश्व कप मैच न खेलने के अपने फैसले को पलटने की संभावना तलाशना चाहती है। 

 

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क्रिकबज़ की रिपोर्ट के अनुसार, पीसीबी ने आईसीसी के समक्ष तीन मांगें रखी हैं, यदि आईसीसी वैश्विक टूर्नामेंट में भारत के बहिष्कार के अपने रुख को बदलना चाहता है। एक रिपोर्ट के अनुसार, आईसीसी के समक्ष रखी गई तीन मांगें भारत-पाकिस्तान द्विपक्षीय संबंधों की बहाली, राजस्व में वृद्धि और यह सुनिश्चित करना कि नो-हैंडशेक एक्ट जैसी घटना दोबारा कभी न हो। विवाद तब शुरू हुआ जब पाकिस्तान सरकार ने सार्वजनिक रूप से घोषणा की कि वह टी20 विश्व कप में भारत के खिलाफ खेलने के लिए पाकिस्तान टीम को अनुमति नहीं देगी, भले ही यह मैच तटस्थ मैदान पर खेला जाना था। शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली सरकार ने अपने कट्टर प्रतिद्वंद्वी के बहिष्कार के पीछे के कारणों को स्पष्ट नहीं किया।

क्रिकेट जगत में आम धारणा यह थी कि पाकिस्तान का रुख बांग्लादेश के साथ एकजुटता का प्रतीक था, जिसने सुरक्षा चिंताओं के चलते आईसीसी द्वारा बीसीबी के भारत से बाहर मैच आयोजित करने के अनुरोध को अस्वीकार करने के बाद टूर्नामेंट से नाम वापस ले लिया था। इसके बाद आईसीसी ने पाकिस्तान के साथ बातचीत करने का प्रयास किया और पीसीबी अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की। आईसीसी के सीईओ संजोग गुप्ता ज़ूम के माध्यम से चर्चा में शामिल हुए, जबकि पीसीबी अध्यक्ष मोहसिन नकवी, आईसीसी उपाध्यक्ष इमरान ख्वाजा और बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष अमीनुल इस्लाम बुलबुल लाहौर में उपस्थित थे।
 

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क्रिकबज़ ने आगे बताया कि बांग्लादेश आईसीसी से मुआवजे की मांग भी कर सकता है, और उम्मीद है कि चल रही बातचीत के तहत पाकिस्तान इस समझौते में मध्यस्थता करने में मदद करेगा। इन तीन मांगों के जरिए पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड आईसीसी पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। पीसीबी का मानना ​​है कि अगर भारत-पाकिस्तान मैच नहीं होता है तो विश्व निकाय को प्रसारण राजस्व का एक बड़ा हिस्सा गंवाना पड़ सकता है, और इस दबाव से आईसीसी उनकी मांगों को मानने के लिए मजबूर हो जाएगी।
Mon, 09 Feb 2026 12:32:39 +0530

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