Chocolate Day : 202 साल पुरानी है आपकी कैडबरीज चॉकलेट कंपनी, 120 साल पहले बनी थी पहली डेयरी मिल्क
Cadbury Story : आज चॉकलेट डे है और आपके दोस्तों ने भी तोहफे में चॉकलेट जरूर दिया होगा. कैडबरी खाते समय आप अक्सर यह सोचते होंगे कि आखिर इतनी स्वादिस्ट चीज किसने बनाई और इसकी शुरुआत कब हुई होगी. आपके इन सभी सवालों का जवाब हम इस कहानी में दे रहे हैं. इसमें बताएंगे कि कैसे शराब के विरोध में शुरू हुआ चॉकलेट ड्रिंक आज एक ग्लोबल ब्रांड बन चुका है और सालाना 50 करोड़ से ज्यादा चॉकलेट बेच देती है. कंपनी की शुरुआत 200 साल पहले हुई थी, तो आपका पसंदीदा डेयरी मिल्क भी पहली बार 120 साल पहले बना था.
क्या आपका बच्चा भी इन ऑनलाइन गेम्स का है शिकार? कहीं ये गेम्स उसकी जिंदगी से तो नहीं खेल रहे?
आज के समय में मोबाइल और ऑनलाइन गेम बच्चों की जिंदगी का हिस्सा बनते जा रहे हैं, लेकिन यह आदत कब खतरनाक लत बन जाए, इसका अंदाजा कई बार माता-पिता को भी नहीं होता. यूपी के गाजियाबाद में सामने आया तीन बहनों का सुसाइड केस पूरे देश को झकझोर देने वाला है. शुरुआती जांच में सामने आया है कि ये बच्चियां कुछ ऑनलाइन गेम्स की लत में इतनी डूब चुकी थीं कि मोबाइल छिनने के बाद वे गहरे डिप्रेशन में चली गईं.जांच के दौरान सामने आए चार ऑनलाइन गेम्स के नाम हैं -पॉपी प्ले टाइम, द बेबी इन येलो, एविल नन और आइसक्रीम.ये गेम 10–12 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए नहीं बनाए गए हैं, लेकिन इसके बावजूद कई बच्चे इन्हें घंटों खेलते हैं.मनोचिकित्सकों का कहना है कि छोटे बच्चों का दिमाग पूरी तरह विकसित नहीं होता. वे सही-गलत का फर्क जल्दी नहीं समझ पाते. ज्यादा स्क्रीन टाइम और डरावना कंटेंट बच्चों को वास्तविक दुनिया से काट देता है. कई बार बच्चे वर्चुअल दुनिया को ही असली दुनिया मानने लगते हैं.साइबर एक्सपर्ट्स की सलाह है कि माता-पिता बच्चों के मोबाइल में पैरेंटल कंट्रोल जरूर ऑन करें. आज कई ऐसे फीचर्स और ऐप्स मौजूद हैं, जिनसे यह पता चल सकता है कि बच्चा कौन सा ऐप या गेम कितनी देर इस्तेमाल कर रहा है.इसके साथ-साथ बच्चों को खेल-कूद, बातचीत और फैमिली टाइम की ओर ज्यादा ले जाना जरूरी है.
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