जनकपुरी हादसा : केजरीवाल बोले- यह हादसा नहीं, सीधी हत्या है, 'आप' ने भाजपा और दिल्ली पुलिस पर दागे गंभीर सवाल
राजधानी दिल्ली के जनकपुरी इलाके में एक निर्माणाधीन गड्ढे में गिरकर बाइक सवार युवक की मौत ने राजनीतिक गलियारे में भूचाल ला दिया है। आम आदमी पार्टी (AAP) ने इस दर्दनाक घटना को महज एक दुर्घटना मानने से इनकार करते हुए इसे 'प्रशासनिक हत्या' करार दिया है। पार्टी का आरोप है कि भाजपा शासित विभागों और दिल्ली पुलिस की घोर लापरवाही ने एक 25 वर्षीय होनहार युवक की जान ले ली।
देश की राजधानी में गड्ढे में गिरकर दम तोड़ देना शर्मनाक
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने इस घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए भाजपा सरकार पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि देश की राजधानी में एक युवक का सड़क के गड्ढे में गिरकर दम तोड़ देना बेहद शर्मनाक है। केजरीवाल ने इसे 'हत्या' बताते हुए कहा कि पिछले दिनों नोएडा में एक इंजीनियर की नाले में गिरकर हुई मौत से भी प्रशासन ने कोई सबक नहीं सीखा। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकारों का गैर-जिम्मेदाराना रवैया अब जनता की जान पर भारी पड़ रहा है।
रात भर तड़पता रहा युवक, थानों के चक्कर काटते रहे परिजन
शुक्रवार को एक प्रेस वार्ता के दौरान 'आप' के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने घटना का विस्तृत ब्यौरा दिया। उन्होंने बताया कि मृतक कमल, जो रोहिणी के एक कॉल सेंटर में कार्यरत था, रात को घर लौटते समय जनकपुरी में जल बोर्ड (DJB) द्वारा खोदे गए एक असुरक्षित गड्ढे में गिर गया।
भारद्वाज ने पुलिस की संवेदनशीलता पर सवाल उठाते हुए कहा कि युवक के परिजन और दोस्त रात भर उसे तलाशते रहे। वे रोहिणी, पालम, सागरपुर, मंगोलपुरी, डाबरी और जनकपुरी समेत कुल 6 थानों में मदद की गुहार लगाने गए, लेकिन किसी भी थाने ने एफआईआर दर्ज नहीं की। सागरपुर थाने में तो परिजनों को यह कहकर टाल दिया गया कि दुनिया खो रही है, सिर्फ तुम्हारा ही भाई नहीं खोया है।
मंत्री आशीष सूद पर 'लीपापोती' के आरोप
सौरभ भारद्वाज ने दिल्ली सरकार में मंत्री आशीष सूद पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि जिस स्थान पर यह हादसा हुआ, वह मंत्री के आवास के बेहद करीब है। उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्री वहां सुधार करने के बजाय साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ और लीपापोती करने पहुंचे थे।
• बैरिकेडिंग का सच: मंत्री दावा कर रहे हैं कि सुरक्षा के पूरे इंतजाम थे, जबकि स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि बैरिकेडिंग शुक्रवार सुबह युवक का शव मिलने के बाद आनन-फानन में की गई।
• जांच पर सवाल: भारद्वाज ने कहा कि जब संबंधित विभाग के मंत्री खुद ही क्लीन चिट दे रहे हैं, तो उनके अधीन काम करने वाली जांच कमेटी निष्पक्ष रिपोर्ट कैसे देगी?
लोकेशन और सीसीटीवी का रहस्य
1. लोकेशन डिलीट करना: परिजनों का दावा है कि पुलिस ने कमल की आखिरी लोकेशन उनके साथ साझा की थी, लेकिन उसे तुरंत डिलीट क्यों कर दिया गया? क्या पुलिस कुछ छुपाना चाहती थी?
2. सीसीटीवी फुटेज: 'आप' ने मांग की है कि ट्रैफिक कैमरों और पीडब्ल्यूडी सड़कों पर लगे सीसीटीवी की फुटेज सार्वजनिक की जाए। पार्टी का मानना है कि फुटेज से स्पष्ट हो जाएगा कि रात के समय वहां कोई सुरक्षा घेरा या चेतावनी बोर्ड नहीं था।
3. लापता होने के आंकड़े: भारद्वाज ने पुलिस कमिश्नर सतीश गोलचा के उन दावों को भी झूठा बताया जिसमें कहा गया था कि दिल्ली पुलिस लापता शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई करती है।
समय रहते पुलिस ने लोकेशन ट्रेस कर ली होती तो युवक जीवित होता
आम आदमी पार्टी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से इस मामले में जवाबदेही तय करने की मांग की है। सौरभ भारद्वाज ने कहा कि अगर समय रहते पुलिस ने लोकेशन ट्रेस कर ली होती और गड्ढे के पास सुरक्षा के इंतजाम होते, तो कमल आज जीवित होता। पार्टी ने चेतावनी दी है कि वे जनता की सुरक्षा से जुड़े इस मुद्दे को दबने नहीं देंगे।
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आईआईटी जोधपुर के डायरेक्टर-प्रोफेसर के बीच विवाद:राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा- ‘नीच’ शब्द जातिसूचक गाली नहीं; एससी-एसटी एक्ट में कार्रवाई रद्द की
राजस्थान हाईकोर्ट ने आईआईटी जोधपुर के डायरेक्टर और एसोसिएट प्रोफेसर के बीच हुए विवाद के केस में कहा कि ‘नीच’ शब्द कहना मात्र जाति के आधार पर अपमान नहीं माना जा सकता। जस्टिस संदीप शाह की एकलपीठ ने डॉ. दीपक अरोड़ा की याचिका पर सुनवाई करते हुए एससी-एसटी एक्ट के तहत आपराधिक कार्रवाई को रद्द कर दिया। कोर्ट ने शनिवार को ऑर्डर पास किया। हालांकि कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एसोसिएट प्रोफेसर के खिलाफ पुलिस जांच जारी रहेगी। कोर्ट ने ‘स्वरण सिंह बनाम राज्य’ मामले का हवाला देते हुए कहा कि एससी/एसटी एक्ट के तहत अपमान सार्वजनिक दृष्टि में होना चाहिए। यह घटना डायरेक्टर के बंद चैंबर में हुई थी, जहां जनता की पहुंच नहीं थी। इसलिए इसे ‘पब्लिक व्यू’ नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ‘नीच’ शब्द का अर्थ नीच या अधम होता है, जिसका उपयोग किसी के खराब नैतिक चरित्र को दर्शाने के लिए किया जाता है। यह किसी विशेष समुदाय या जाति का नाम नहीं है। कोर्ट ने पूर्व के फैसलों (अचल सिंह बनाम राजस्थान राज्य) का हवाला देते हुए कहा कि ‘नीच’ कहना जाति आधारित अपमान की श्रेणी में नहीं आता। कोर्ट ने याचिकाकर्ता के इस तर्क को खारिज कर दिया कि आईआईटी डायरेक्टर लोक सेवक नहीं हैं। याचिकाकर्ता के वकील राजेश जोशी, हर्षित बोरानी ने तर्क दिया कि यदि एफआईआर के तथ्यों को सच माने तो एससी-एसटी एक्ट का कोई अपराध नहीं बनता है। ‘नीच’ शब्द किसी जाति का नाम नहीं है, बल्कि यह किसी के चरित्र को बताने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला सामान्य शब्द है। यह था पूरा मामला पूरा मामला 2 सितंबर 2025 का है। आईआईटी जोधपुर के कार्यवाहक रजिस्ट्रार अंकुर गुप्ता ने करवड़ थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोप था कि एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. दीपक अरोड़ा संस्थान के डायरेक्टर प्रोफेसर अविनाश अग्रवाल के ऑफिस में चर्चा कर रहे थे। इसी दौरान उनके बीच विवाद हो गया था। प्रोफेसर दीपक अरोड़ा ने डायरेक्टर पर हमला कर दिया था। वहां मौजूद ऑफिस असिस्टेंट विवेक गौतम और अन्य ने बीच-बचाव किया तो प्रोफेसर दीपक ने विवेक गौतम के साथ मारपीट की। ‘नीच’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए गालियां दीं। पुलिस ने मामले में बीएनएस की धाराओं के साथ-साथ एससी-एसटी एक्ट की धारा के तहत मामला दर्ज किया था। इसे डॉ. दीपक अरोड़ा की ओर से हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।
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