आईआईटी जोधपुर के डायरेक्टर-प्रोफेसर के बीच विवाद:राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा- ‘नीच’ शब्द जातिसूचक गाली नहीं; एससी-एसटी एक्ट में कार्रवाई रद्द की
राजस्थान हाईकोर्ट ने आईआईटी जोधपुर के डायरेक्टर और एसोसिएट प्रोफेसर के बीच हुए विवाद के केस में कहा कि ‘नीच’ शब्द कहना मात्र जाति के आधार पर अपमान नहीं माना जा सकता। जस्टिस संदीप शाह की एकलपीठ ने डॉ. दीपक अरोड़ा की याचिका पर सुनवाई करते हुए एससी-एसटी एक्ट के तहत आपराधिक कार्रवाई को रद्द कर दिया। कोर्ट ने शनिवार को ऑर्डर पास किया। हालांकि कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एसोसिएट प्रोफेसर के खिलाफ पुलिस जांच जारी रहेगी। कोर्ट ने ‘स्वरण सिंह बनाम राज्य’ मामले का हवाला देते हुए कहा कि एससी/एसटी एक्ट के तहत अपमान सार्वजनिक दृष्टि में होना चाहिए। यह घटना डायरेक्टर के बंद चैंबर में हुई थी, जहां जनता की पहुंच नहीं थी। इसलिए इसे ‘पब्लिक व्यू’ नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ‘नीच’ शब्द का अर्थ नीच या अधम होता है, जिसका उपयोग किसी के खराब नैतिक चरित्र को दर्शाने के लिए किया जाता है। यह किसी विशेष समुदाय या जाति का नाम नहीं है। कोर्ट ने पूर्व के फैसलों (अचल सिंह बनाम राजस्थान राज्य) का हवाला देते हुए कहा कि ‘नीच’ कहना जाति आधारित अपमान की श्रेणी में नहीं आता। कोर्ट ने याचिकाकर्ता के इस तर्क को खारिज कर दिया कि आईआईटी डायरेक्टर लोक सेवक नहीं हैं। याचिकाकर्ता के वकील राजेश जोशी, हर्षित बोरानी ने तर्क दिया कि यदि एफआईआर के तथ्यों को सच माने तो एससी-एसटी एक्ट का कोई अपराध नहीं बनता है। ‘नीच’ शब्द किसी जाति का नाम नहीं है, बल्कि यह किसी के चरित्र को बताने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला सामान्य शब्द है। यह था पूरा मामला पूरा मामला 2 सितंबर 2025 का है। आईआईटी जोधपुर के कार्यवाहक रजिस्ट्रार अंकुर गुप्ता ने करवड़ थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोप था कि एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. दीपक अरोड़ा संस्थान के डायरेक्टर प्रोफेसर अविनाश अग्रवाल के ऑफिस में चर्चा कर रहे थे। इसी दौरान उनके बीच विवाद हो गया था। प्रोफेसर दीपक अरोड़ा ने डायरेक्टर पर हमला कर दिया था। वहां मौजूद ऑफिस असिस्टेंट विवेक गौतम और अन्य ने बीच-बचाव किया तो प्रोफेसर दीपक ने विवेक गौतम के साथ मारपीट की। ‘नीच’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए गालियां दीं। पुलिस ने मामले में बीएनएस की धाराओं के साथ-साथ एससी-एसटी एक्ट की धारा के तहत मामला दर्ज किया था। इसे डॉ. दीपक अरोड़ा की ओर से हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।
Banana Benefits: ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए केला क्यों है फायदेमंद? एक्सपर्ट ने बताई हैरान करने वाली बात
Banana Lower Blood Pressure: केला को ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने में फायदेमंद माना जाता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो केला में पोटैशियम होता है, जो हमारा बीपी कंट्रोल करने में मदद करता है. इसमें फाइबर होता है, जो ब्लड शुगर पर लगाम लगाता है. केला में पाए जाने वाले मैग्नीशियम और विटामिन B6 सेहत सुधारने में असरदार होते हैं.
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