मुंबई की पिच पर गेंद रुककर आ रही थी और भारतीय बल्लेबाज़ एक-एक कर लौट रहे थे। ईशान किशन संघर्ष करते दिखे, अभिषेक शर्मा बिना खाता खोले आउट हो गए और बाकी बल्लेबाज़ भी लय नहीं पकड़ सके। बता दें कि टी20 विश्व कप 2026 के अपने पहले मुकाबले में भारत, अमेरिका जैसी अपेक्षाकृत नई टीम के खिलाफ 77 रन पर छह विकेट गंवा चुका था।
गौरतलब है कि हाल के वर्षों में भारत के लिए बड़े स्कोर बनाना आम बात रही है, लेकिन इस दिन हालात उलट थे। टॉप ऑर्डर और मिडिल ऑर्डर पूरी तरह बिखर चुका था। ऐसे में मैदान पर आए सूर्यकुमार यादव, जिनके बिना यह पारी शायद बहुत पहले खत्म हो जाती।
मौजूद जानकारी के अनुसार, सूर्यकुमार यादव ने मैदान और परिस्थितियों को पढ़ते हुए अपनी बल्लेबाज़ी को ढाला। जहां अन्य बल्लेबाज़ों को गैप नहीं मिल रहे थे, वहीं सूर्यकुमार ने अपने अनोखे शॉट्स से फील्डिंग सेटअप को बार-बार तोड़ा। वह गेंद को वहां खेलते दिखे, जहां फील्डर मौजूद ही नहीं थे।
अमेरिकी गेंदबाज़ों ने पारंपरिक फील्ड लगाई, सूर्यकुमार ने उसे तोड़ दिया। जब उन्होंने अनोखे शॉट्स के लिए फील्ड बदली, तब भी सूर्यकुमार ने नई जगह तलाश ली। यह सिर्फ ताकत की बल्लेबाज़ी नहीं थी, बल्कि समझदारी और अनुभव का मेल था।
नतीजा यह रहा कि सूर्यकुमार यादव ने 49 गेंदों पर नाबाद 84 रन बनाए, जिसमें 10 चौके और 4 छक्के शामिल थे। इस पारी की बदौलत भारत 161 रन तक पहुंच सका, जो एक समय मुश्किल नजर आ रहा था।
यह पारी इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि बड़े टूर्नामेंटों में सूर्यकुमार यादव के प्रदर्शन को लेकर सवाल उठते रहे हैं। शानदार प्रतिभा और आक्रामक अंदाज़ के बावजूद विश्व कप के बड़े मैचों में उनसे वैसी पारियां कम ही देखने को मिली हैं। हालांकि, अमेरिका के खिलाफ यह पारी अलग थी, क्योंकि इसमें जोखिम से ज्यादा जिम्मेदारी दिखी।
बताया जा रहा है कि हालिया द्विपक्षीय सीरीज़ से ही सूर्यकुमार की फॉर्म और सोच में बदलाव दिख रहा था। इस मैच में भी उन्होंने हालात के अनुसार खेलना चुना, न कि सिर्फ मनोरंजन पर ध्यान दिया।
संभव है कि यह पारी उनके करियर के उस मोड़ का संकेत हो, जहां सूर्यकुमार यादव सिर्फ अनोखे शॉट्स के लिए नहीं, बल्कि बड़े टूर्नामेंटों में निर्णायक योगदान के लिए याद किए जाएं। भारतीय टीम और प्रशंसकों को उम्मीद है कि इस विश्व कप में उनका सफर यहीं नहीं रुकेगा और वह अपनी पहचान को एक ठोस विरासत में बदलने में सफल होंगे।
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हरारे स्पोर्ट्स क्लब की पिच पर मैच खत्म हुए भले ही कुछ वक्त बीत गया हो, लेकिन वैभव सूर्यवंशी की विस्फोटक बल्लेबाज़ी की गूंज अब भी क्रिकेट जगत में सुनाई दे रही है। बता दें कि इंग्लैंड के खिलाफ अंडर-19 विश्व कप फाइनल में बिहार के इस 14 वर्षीय बल्लेबाज़ ने सिर्फ 80 गेंदों में 175 रन ठोक दिए थे, जो किसी भी अंडर-19 विश्व कप फाइनल का सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर है।
गौरतलब है कि इस पारी में वैभव ने 15 छक्के लगाए और उनका स्ट्राइक रेट ऐसा रहा मानो वह किसी लीग मैच में बल्लेबाज़ी कर रहे हों। इस प्रदर्शन के बाद क्रिकेट प्रेमियों के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब वह अंडर-19 स्तर पर इंग्लैंड जैसे मजबूत विपक्ष को ध्वस्त कर सकते हैं और आईपीएल में भी शतक जड़ चुके हैं, तो भारतीय सीनियर टीम में उनकी जगह क्यों नहीं बन पा रही है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, इसका सीधा जवाब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद यानी आईसीसी के नियमों में छिपा है। वर्ष 2020 में लागू की गई न्यूनतम आयु नीति के तहत कोई भी खिलाड़ी 15 वर्ष की उम्र से पहले अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में हिस्सा नहीं ले सकता है। वैभव सूर्यवंशी का जन्म 27 मार्च 2011 को हुआ है और फरवरी 2026 में हुए अंडर-19 विश्व कप के दौरान उनकी उम्र 14 साल ही थी।
दिलचस्प बात यह है कि वह न केवल सीनियर क्रिकेट के लिए छोटे हैं, बल्कि अब अंडर-19 स्तर के लिए भी लगभग बाहर हो चुके हैं। बता दें कि बीसीसीआई अंडर-19 विश्व कप के लिए “वन टूर्नामेंट नियम” लागू करता है, जिसके तहत कोई भी खिलाड़ी सिर्फ एक ही अंडर-19 विश्व कप खेल सकता है। इसका उद्देश्य उम्र वर्ग में नए खिलाड़ियों को मौका देना है। वैभव 2026 संस्करण में प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट बन चुके हैं, ऐसे में वह 2028 या 2030 के अंडर-19 विश्व कप के लिए पात्र नहीं रहेंगे, भले ही तब भी उनकी उम्र 19 से कम ही क्यों न हो।
पिछले एक साल में वैभव सूर्यवंशी ने जिस तरह रिकॉर्ड्स की कतार लगा दी है, उसने चयनकर्ताओं और विशेषज्ञों का ध्यान खींचा है। अंडर-19 विश्व कप फाइनल में सर्वोच्च स्कोर के अलावा उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में 30 छक्के लगाकर नया रिकॉर्ड बनाया है। वह 14 साल 272 दिन की उम्र में लिस्ट-ए क्रिकेट में शतक लगाने वाले दुनिया के सबसे युवा खिलाड़ी बने।
इतना ही नहीं, विजय हजारे ट्रॉफी में उन्होंने 59 गेंदों में 150 रन बनाकर एबी डिविलियर्स का रिकॉर्ड भी पीछे छोड़ दिया है। आईपीएल में राजस्थान रॉयल्स के लिए 35 गेंदों में शतक जड़कर वह लीग इतिहास के सबसे कम उम्र के शतकवीर बने हैं। भारत ए के लिए टी20 शतक, यूथ वनडे और यूथ टेस्ट में सबसे तेज़ शतक, सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में सबसे युवा शतकवीर और यूथ वनडे में 100 छक्के लगाने वाले पहले खिलाड़ी बनने जैसी उपलब्धियां भी उनके नाम दर्ज हैं।
फिलहाल “सूर्यवंशी तूफान” घरेलू क्रिकेट और फ्रेंचाइज़ी टूर्नामेंट तक सीमित है। हालांकि, घड़ी तेजी से आगे बढ़ रही है। जैसे ही वह 2026 में 15 साल के होंगे, यह तय माना जा रहा है कि भारतीय सीनियर टीम में नीली जर्सी पहनकर उनका पदार्पण ज्यादा दूर नहीं रहेगा और भारतीय क्रिकेट को एक नया सितारा मिलने वाला है।
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