आईएनएस सुदर्शिनी ने पार किया ओमान, 22,000 नॉटिकल मील की है समुद्री यात्रा
नई दिल्ली, 8 फरवरी (आईएएनएस) भारतीय नौसेना के सेल ट्रेनिंग शिप आईएनएस सुदर्शिनी ने ओमान के सलालाह बंदरगाह पर अपना पहला पोर्ट कॉल सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। आईएनएस सुदर्शिनी ‘लोकायन–26’ नामक दस महीने की लंबी समुद्री यात्रा पर है।
ओमान की यह यात्रा इस सफर का एक अहम पड़ाव था। भारतीय शिप अब यहां से आगे निकल चुका है। ‘लोकायन–26’ अभियान का मकसद दुनिया भर में भारत की समृद्ध समुद्री परंपरा और ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ यानी सारी दुनिया एक परिवार है, के संदेश को फैलाना है। ‘सुदर्शिनी’ 10 महीने लंबी यात्रा के दौरान कुल 13 देशों के 18 विदेशी बंदरगाहों की यात्रा कर रहा है। पारंपरिक विधि से बना यह नौसैनिक शिप फ्रांस और अमेरिका जैसे देशों में आयोजित विशेष अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों में भी शामिल होगा।
नौसेना का शिप ‘सुदर्शिनी’ कुल 22,000 नॉटिकल मील से अधिक की समुद्री यात्रा कर रहा है। सलालाह में प्रवास के दौरान आईएनएस सुदर्शिनी के कमांडिंग ऑफिसर ने ओमान की रॉयल नेवी के साउदर्न नेवल एरिया कमांडर कैप्टन मोहम्मद अल घैलानी और आरएनओ जहाज अल मोअजर के कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन मोहम्मद अल महारी से मुलाकात की। बातचीत में भारत और ओमान के बीच पुराने समुद्री रिश्तों और दोनों नौसेनाओं की दोस्ती को और मजबूत करने पर जोर दिया गया।
इसके अलावा ओमान की रॉयल नेवी के अधिकारियों को जहाज का गाइडेड टूर भी कराया गया। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक स्थानीय लोगों से जुड़ाव बढ़ाने के लिए आईएनएस सुदर्शिनी को आम लोगों के लिए भी खोला गया। करीब 600 से ज्यादा लोगों ने इस तीन मस्तूल वाले भारतीय जहाज को करीब से देखा। इन लोगों में स्कूल के बच्चे भी शामिल थे। उन्होंने यहां समुद्र में नौकायन की बारीकियों के बारे में जाना। अब आईएनएस सुदर्शिनी लोकायन–26 की अगली यात्रा पर रवाना हो चुकी है। पूरे जोश और उत्साह के साथ यह जहाज समुद्रों में भारत की सदियों पुरानी नौकायन परंपरा, दोस्ती और सद्भावना का संदेश आगे बढ़ा रहा है।
गौरतलब है कि आईएनएस सुदर्शिनी भारतीय नौसेना का पाल-प्रशिक्षण समुद्री जहाज है। आईएनएस सुदर्शिनी की यह यात्रा करीब दस महीने तक चलेगी। इस दौरान विभिन्न देशों के साथ भारत अपने समुद्री रिश्तों की चर्चा करेगा। नौसेनाओं के बीच दोस्ती और सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा। यह शिप ‘लोकायन–26’ नामक ऐतिहासिक अंतरमहाद्वीपीय नौकायन अभियान के लिए रवाना हुआ है। यह दस माह का एक दीर्घकालिक वैश्विक समुद्री अभियान है। यह नौसैनिक अभियान भारत की समृद्ध नौसैनिक परंपरा को विश्व पटल पर प्रदर्शित कर रहा है। यह नौसैनिक अभियान महासागरों के पार सहयोग, विश्वास और मित्रता के सेतु निर्माण का संदेश भी दे रहा है।
--आईएएनएस
जीसीबी/एएस
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
भारत-अमेरिका ट्रेड डील से एआई हार्डवेयर सेक्टर को मिलेगा बड़ा फायदा
नई दिल्ली, 8 फरवरी (आईएएनएस)। भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील के पहले चरण के पूरा होने को भारत के एआई हार्डवेयर सेक्टर के लिए एक बड़ा बढ़ावा माना जा रहा है, क्योंकि इससे एडवांस कंप्यूटिंग से जुड़े उपकरणों की लागत कम होने की उम्मीद है, जिससे देश में इनकी मैन्युफैक्चरिंग और क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
खालसा वॉक्स न्यूज पोर्टल में प्रकाशित एक लेख के मुताबिक, यह पहली बार है जब दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच हुए किसी द्विपक्षीय व्यापार समझौते में एआई कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को रणनीतिक संपत्ति माना गया है, जिसका भारत के तकनीकी भविष्य पर लंबे समय तक असर पड़ सकता है।
अब तक इस सेक्टर की सबसे बड़ी समस्या जीपीयू सर्वर पर लगने वाला भारी आयात शुल्क रहा है, जो 20 से 28 प्रतिशत तक है। इसकी वजह से भारत में जीपीयू आधारित सेवाएं बहुत महंगी हो जाती हैं और सिंगापुर या यूएई जैसे देशों के मुकाबले कम प्रतिस्पर्धी बनती हैं।
लेख में बताया गया है कि इंडस्ट्री के अनुमान बताते हैं कि अगर इन टैक्स में कमी की जाती है तो जीपीयू से लैस डेटा सेंटर बनाने की लागत करीब 14 प्रतिशत तक घट सकती है। इससे देश में बड़े पैमाने पर निवेश का रास्ता खुल सकता है।
यह समय भारत के लिए अनुकूल माना जा रहा है क्योंकि भारत दुनिया के कुल डेटा का लगभग पांचवां हिस्सा पैदा करता है, लेकिन यहां ग्लोबल डेटा सेंटर क्षमता और एंटरप्राइज जीपीयू की संख्या बहुत कम है।
लेख के अनुसार, दुनिया की बड़ी क्लाउड और टेक कंपनियां दशक के अंत तक भारत में 80 अरब डॉलर से ज्यादा निवेश कर सकती हैं। ट्रेड डील को एक ऐसे मौके के रूप में देखा जा रहा है जिससे भारत ग्लोबल एआई कंप्यूट सर्विसेज में मजबूत दावेदार बन सकता है।
लेख में यह भी बताया गया है कि विशेषज्ञों ने कुछ सावधानियों की जरूरत पर जोर दिया है। उनका कहना है कि एडवांस हार्डवेयर तक आसान पहुंच के साथ-साथ डेटा सुरक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा और घरेलू वैल्यू क्रिएशन के लिए मजबूत नीतियां भी होनी चाहिए।
लेख में आगे कहा गया है कि अगर ऐसी नीतियां नहीं बनीं, तो खतरा है कि भारत सिर्फ कम मुनाफे वाली कंप्यूटिंग सेवाएं देगा और असली आर्थिक व रणनीतिक फायदा दूसरे देशों को मिल जाएगा।
--आईएएनएस
डीबीपी/
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