Delhi में सुरक्षा पहरे के बीच प्रदर्शनकारी Connaught Place वॉशरूम और गुरुद्वारे में छिपे, कई हिरासत में
राष्ट्रीय राजधानी में शनिवार को कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के विरोध-प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच लुका-छिपी का खेल देखने को मिला, जब कुछ लोग सार्वजनिक शौचालय में छिप गए जबकि कुछ अन्य ने रात भर गुरुद्वारे में शरण ली। शनिवार को राष्ट्रीय राजधानी में पुलिस और अर्धसैनिक बल के हजारों जवान तैनात किए जाने के बीच मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को वापस लेने की मांग कर रहे प्रदर्शनकारी गिरफ्तारी से बचने के लिए सार्वजनिक व धार्मिक स्थलों पर छिपने की कोशिश करने लगे। कनॉट प्लेस स्थित नयी दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) के एक वॉशरूम में 20 से ज़्यादा युवा प्रदर्शनकारी रात भर छिपे रहे।
वे जंतर-मंतर तक मार्च से पहले सुरक्षा के कड़े इंतजाम के बीच चोरी-छिपे निकलने की उम्मीद कर रहे थे। शुक्रवार को शहर भर में पाबंदियां लागू होने के बाद, यह समूह रात में क्रमिक रूप से एकत्र हुआ था। वॉशरूम, जो रात 10 बजे बंद कर दिया जाता है और सुबह छह बजे खोला जाता है, उनके छिपने का ठिकाना बन गया।
जांच के दौरान पुलिस को प्रदर्शनकारी वॉशरूम के अंदर मिले। प्रदर्शनकारियों को इकट्ठा करके पुलिस की गाड़ियों में बिठाया गया। अधिकतर लोगों ने अपने चेहरे ढके हुए थे।
हिरासत में लिए जाने के बाद भी वे नारेबाजी करते रहे और पुलिस की गाड़ियों के अंदर जोर आजमाइश करते रहे। उनकी आवाज जालीदार खिड़कियों से बाहर आ रही थी। कनॉट प्लेस की घटना सेंट्रल दिल्ली में हुई उन कई घटनाओं में से एक थी, जिनमें प्रदर्शनकारियों ने पुलिस से बचने की कोशिश की और मौका मिलते ही फिर से सड़क पर उतर आए।
गुरुद्वारा बंगला साहिब में, रात भर छिपे रहने वाले युवा प्रदर्शनकारी बार-बार परिसर से बाहर निकलकर प्रदर्शनों में शामिल होते थे और पुलिस द्वारा खदेड़े जाने पर वापस अंदर भाग जाते थे। यह सिलसिला चलता रहा। दोनों पक्षों के बीच गुरुद्वारे के आसपास लुका-छिपी का खेल देखने को मिला।
गुरुद्वारे के बाहर की सड़क पर ‘‘इंकलाब ज़िंदाबाद’’ और ‘‘जय भीम’’ के नारे लगाये गए, जब प्रदर्शनकारियों का एक बड़ा समूह सड़क पर उतर आया था। कुछ ही मिनट में पुलिस ने उनमें से कई लोगों को हिरासत में ले लिया। पुलिस ने बंगला साहिब के प्रतिनिधियों से संपर्क किया था और उनसे कहा था कि वे प्रदर्शनकारियों को परिसर में नहीं आने दें।
गुरुद्वारे के प्रतिनिधियों ने मना कर दिया और कहा कि प्रदर्शनकारी निहत्थे थे और अंदर नारेबाजी नहीं कर रहे थे। एक प्रतिनिधि ने कहा, ‘‘हम पुलिस को परिसर में घुसने नहीं देंगे। प्रदर्शनकारी निहत्थे हैं और परिसर के अंदर नारेबाजी नहीं कर रहे हैं, इसलिए हम उनके खिलाफ नहीं हैं।’’ युवाओं के कई संगठनों और छात्र समूहों ने बाबा खड़क सिंह मार्ग से अशोक रोड की ओर मार्च किया, और पुलिसकर्मी उन्हें हिरासत में लेने के लिए आगे बढ़े।
जब अधिकारी पास आए, तो कुछ प्रदर्शनकारी गुरुद्वारे के परिसर में भाग गए और प्रदर्शन में लौटने की कोशिश करने से पहले वहां छिपे रहे। केरल हाउस में शुक्रवार रात से ही माकपा के कई नेता ठहरे हुए थे, जिनमें अलग-अलग राज्यों के पूर्व मुख्यमंत्री भी शामिल थे। शनिवार को जब वे विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए बाहर निकले, तो उन्हें हिरासत में ले लिया गया।
राष्ट्रीय राजधानी में 30,000 से ज़्यादा पुलिस और अर्धसैनिक बल के जवानों को तैनात किया गया था, जबकि 45 मेट्रो स्टेशन पर प्रवेश एवं निकास बंद कर दिए गए थे और जंतर-मंतर के आस-पास 30 सड़कों पर यातायात की पाबंदियां थीं।
उत्तराखंड के Hemkund Sahib के कपाट शीतकाल के लिए बंद, 3.84 लाख श्रद्धालुओं ने टेका मत्था
उत्तराखंड के चमोली जिले में करीब 15 हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित विश्व प्रसिद्ध गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब के कपाट शुक्रवार को शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। खराब मौसम और कड़ाके की ठंड के बीच कपाट बंद होने के अवसर पर देश-विदेश से आए बड़ी संख्या में सिख श्रद्धालु मौजूद रहे। उन्होंने इस वर्ष की अंतिम पूजा में हिस्सा लिया।
गुरुद्वारे के कपाट मई में खोले गए थे और तब से अब तक तीन लाख 84 हजार से अधिक श्रद्धालु हेमकुंड साहिब में मत्था टेक चुके हैं। कपाट बंद करने की प्रक्रिया सुबह 10 बजे सुखमनी साहिब पाठ के साथ शुरू हुई। शब्द-कीर्तन और अंतिम अरदास के बाद अपराह्न एक बजे गुरुद्वारे के कपाट श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिए गए।
इसके बाद गुरु ग्रंथ साहिब को लेकर यात्रा गोविंदघाट के लिए रवाना हुई। कपाट बंद होने के अवसर पर गुरुद्वारा प्रबंधन समिति के पदाधिकारियों के साथ स्थानीय पुलिस और प्रशासन के अधिकारी भी मौजूद थे। पाकिस्तान से आए सिख श्रद्धालुओं के 40 सदस्यीय जत्थे सहित करीब दो हजार श्रद्धालु इस अवसर पर गुरुद्वारे में उपस्थित थे।
सेना के बैंड की धुन और ‘वाहेगुरु जी’ के जयकारों के बीच बर्फ से ढके रास्तों से गुरु ग्रंथ साहिब के साथ सिख श्रद्धालुओं की संगत घांघरिया के लिए रवाना हुई। श्री हेमकुंड साहिब जाने के लिए बदरीनाथ के समीप गोविंदघाट से पुलना गांव तक सड़क मार्ग से पहुंचा जाता है। इसके बाद पुलना से भ्यूंडार और घांघरिया होते हुए करीब 16 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर गुरुद्वारे तक पहुंचा जाता है।
इस अवसर पर श्री हेमकुंड साहिब प्रबंधन ट्रस्ट के अध्यक्ष नरेंद्रजीत सिंह बिंद्रा और वरिष्ठ प्रबंधक सरदार सेवा सिंह ने यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था, मुस्तैदी और कुशल प्रबंधन के लिए स्थानीय पुलिस एवं प्रशासन का आभार जताया। हेमकुंड साहिब के साथ ही वहां स्थित प्राचीन लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के कपाट भी शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए।
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