जरूरत की खबर- केला बढ़ाता है गुड बैक्टीरिया:पोटेशियम का बेस्ट सोर्स, रोज एक केला खाएं, न्यूट्रिशनिस्ट से जानें किसे नहीं खाना चाहिए
केला दुनिया का सबसे ज्यादा खाया जाने वाला फल है। ये हर मौसम में, हर जगह आसानी से मिल जाता है। कई लोग इसे बस एक क्विक स्नैक्स मानते हैं, लेकिन ये स्वादिष्ट फल हार्ट हेल्थ, पाचन और इम्यूनिटी को भी सपोर्ट करता है। केला फाइबर, पोटेशियम, विटामिन B6 और C से भरपूर होता है। इसमें एंटीऑक्सिडेंट्स और फाइटोन्यूट्रिएंट्स भी होते हैं। अगर किसी का ब्लड प्रेशर हाई रहता है, तो केले में मौजूद पोटेशियम इसे बैलेंस करने में मदद करता है। इससे हार्ट रिलेटेड बीमारियों का रिस्क कम होता है। आज जरूरत की खबर में केले की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट: डॉ. अनु अग्रवाल, न्यूट्रिशनिस्ट और ‘वनडाइटटुडे’ की फाउंडर सवाल- केले की न्यूट्रिशनल वैल्यू क्या होती है? जवाब- केला लो-कैलोरी और हाई-न्यूट्रिएंट फल है। इसमें कार्ब्स ज्यादा होता है, लेकिन इसमें फाइबर और पानी भी भरपूर मात्रा में होता है। यह बिना फैट बढ़ाए इंस्टेंट एनर्जी का बहुत अच्छा सोर्स है। 100 ग्राम केले की न्यूट्रिशनल वैल्यू ग्राफिक में देखिए। सवाल- केले में कौन से विटामिन्स और मिनरल्स होते हैं? जवाब- केले में शरीर के लिए जरूरी कई विटामिन और मिनरल्स होते हैं। इसमें सबसे ज्यादा पोटेशियम होता है, जो हार्ट और मसल्स हेल्थ के लिए जरूरी है। विटामिन B6 और C भी पर्याप्त मात्रा में होता हैं। ग्राफिक देखिए- अगर हम रोज 100 ग्राम केला खाते हैं तो शरीर की रोजाना की विटामिन्स और मिनरल्स की कितनी जरूरत पूरी होती है, ग्राफिक में देखिए। सवाल- केले में कौन से औषधीय गुण होते हैं? जवाब- केले में कई मेडिसिनल गुण होते हैं। इसमें मौजूद पोटेशियम ब्लड प्रेशर कंट्रोल करता है और हार्ट हेल्थ को सपोर्ट करता है। फाइबर पाचन सुधारता है और कोलेस्ट्रॉल कम करने में मदद करता है। एंटीऑक्सिडेंट्स शरीर को फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं। अगर कच्चे केले की कोई डिश खा रहे हैं तो रजिस्टेंट स्टार्च मिलता है, जो प्रीबायोटिक की तरह काम करता है और हेल्दी गट बैक्टीरिया बढ़ाता है। विटामिन C इम्यूनिटी मजबूत करता है। कुल मिलाकर केला हार्ट, पेट और ओवरऑल हेल्थ के लिए बेहतरीन फल है। सवाल- रोज केला खाने के क्या फायदे हैं? जवाब- केला इंस्टेंट एनर्जी देता है, पाचन दुरुस्त रखता है, ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने में मदद करता है और इम्यूनिटी बढ़ाता है। जब मौसम में बदलाव होता है तो पाचन सुस्त हो जाता है और संक्रमण का रिस्क भी बढ़ जाता है। ऐसे में केले में मौजूद फाइबर कब्ज दूर करता है, पोटेशियम हार्ट हेल्थ को सपोर्ट करता है। विटामिन C की मौजूदगी से इम्यूनिटी मजबूत करके संक्रमण से बचाता है। सवाल- यह हार्ट हेल्थ के लिए कितना फायदेमंद है? जवाब- जब ठंड के कारण या किसी हेल्थ कंडीशन के कारण ब्लड वेसल्स सिकुड़ती हैं, ब्लड प्रेशर बढ़ता है और हार्ट पर लोड पड़ता है। ऐसे में केले का पोटेशियम, सोडियम को बैलेंस करता है, ब्लड वेसल्स को रिलैक्स करता है और ब्लड प्रेशर स्थिर रखने में मदद करता है। विटामिन B6 रेड ब्लड सेल्स बनाता है और सर्कुलेशन बेहतर करता है। फाइबर बैड कोलेस्ट्रॉल कम करता है। नियमित रूप से रोज एक केला खाने से हार्ट डिजीज का रिस्क कम हो सकता है। सवाल- केला गट हेल्थ के लिए कैसे फायदेमंद है? जवाब- केले में सॉल्यूबल फाइबर पेक्टिन होता है, जो बाउल मूवमेंट रेगुलेट करता है और अच्छे बैक्टीरिया बढ़ाता है। मौसम बदलने पर लोग थोड़े सुस्त पड़ जाते हैं और उनकी फिजिकल एक्टिविटी कम हो जाती है, जिससे कब्ज और ब्लोटिंग बढ़ती है। ऐसे में केला पेट का जेंटल दोस्त साबित होता है। यह पाचन की सुस्ती दूर करता है। इसका रेजिस्टेंट स्टार्च प्रीबायोटिक की तरह काम करता है, जो गट माइक्रोबायोम बैलेंस रखता है और न्यूट्रिएंट एब्जॉर्ब्शन में भी मदद करता है। सवाल- रोज कितना केला खाना सेफ है? जवाब- ज्यादातर लोगों के लिए रोज 1-2 केला खाना बिल्कुल सेफ और फायदेमंद है। एक मीडियम साइज का केला लगभग 100-120 ग्राम का होता है। इससे तुरंत एनर्जी मिलती है, पाचन अच्छा रहता है और ढेर सारा न्यूट्रिशन मिलता है। हालांकि, एक बार में ज्यादा केला खाने से कुछ लोगों को ब्लोटिंग हो सकती है। सवाल- क्या डायबिटिक पेशेंट्स के लिए केला खाना सेफ है? जवाब- हां, डायबिटिक लोग केला खा सकते हैं, लेकिन सीमित मात्रा में खाना चाहिए। केले में नेचुरल शुगर होती है, लेकिन फाइबर की वजह से ब्लड शुगर उतनी तेजी से नहीं बढ़ता है। खासतौर पर इसमें रजिस्टेंट स्टार्च होता है, जो शुगर के एब्जॉर्ब्शन को धीमा कर देता है। थोड़े कच्चे या कम पके केले का GI (ग्लाइसेमिक इंडेक्स) कम होता है। इसके बावजूद डायबिटिक लोगों को एक बार में एक से ज्यादा केला नहीं खाना चाहिए। अगर ब्लड शुगर बहुत ज्यादा रहती है तो पहले डॉक्टर से कंसल्ट करें या इसे खाना अवॉइड करें। सवाल- क्या सर्दियों में केला खाना सेफ नहीं है? जवाब- “सर्दियों में केला खाना नुकसानदायक है।”- यह सिर्फ एक मिथ है। सर्दियों में केला खाना बिल्कुल सुरक्षित है, बल्कि फायदेमंद है। इसमें मौजूद विटामिन C इम्यूनिटी बढ़ाता है, जो सर्दी-जुकाम से बचाता है। अगर पहले से सर्दी-खांसी है तो थोड़ा कम खाएं, क्योंकि ये म्यूकस और बलगम बढ़ा सकता है। लेकिन सामान्य तौर पर सर्दियों में केला हार्ट और गट को सपोर्ट करता है। सवाल- किन लोगों को केला नहीं खाना चाहिए? जवाब- ज्यादातर लोगों के लिए केला सेफ है, लेकिन कुछ को सीमित मात्रा में खाना चाहिए या अवॉइड करना चाहिए- ये ध्यान रखें कि बहुत ज्यादा केला खाने से ब्लोटिंग या पेट दर्द की समस्या हो सकती है। कुल मिलाकर संतुलित मात्रा में केला खाना लगभग सबके लिए अच्छा है। ………………….. जरूरत की ये खबर भी पढ़िए जरूरत की खबर- पेट भरा, फिर भी खाने का ख्याल: क्या आप भी हैं फूड नॉइज के शिकार, ओवरईटिंग से बचना है तो ये 11 काम जरूर करें फूड नॉइज यानी दिमाग में लगातार उठ रहे खाने से जुड़े ख्याल। फूड नॉइज के कारण पेट भरा होने के बाद भी मन बार-बार खाने की तरफ खिंचता रहता है। क्या खाएं, कब खाएं या फिर कुछ और खा लें, ऐसे ख्याल दिमाग में घूमते रहते हैं। पूरी खबर पढ़िए…
फिजिकल हेल्थ- डकार क्यों आती है:ये हेल्दी होने की निशानी या किसी बीमारी का संकेत, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट से समझें डकार का साइंस
खाना खाने के बाद डकार आना कॉमन बात है। बड़े-बूढ़े कहते हैं कि यह पेट भरने का संकेत है, लेकिन क्या सच में ऐसा ही होता है? सवाल ये है कि डकार क्यों आती है, क्या इसके पीछे शरीर का कोई संकेत छिपा है? कभी-कभी डकार आना सामान्य है, लेकिन बार-बार या बहुत ज्यादा डकार अपच, गैस या एसिडिटी जैसी परेशानियों का संकेत भी हो सकती है। क्या यह हमारी सेहत के बारे में कुछ बताती है? इसलिए फिजिकल हेल्थ में आज जानेंगे कि डकार क्यों आती है। साथ ही जानेंगे कि- सवाल- खाना खाने के बाद हम डकार लेते हैं। बड़े-बूढ़े कहते हैं कि यह पेट भरने का मैसेज है। लेकिन क्या ये बात सही है? डकार एक्चुअली क्या है? जवाब- खाना खाने के बाद डकार आना एक सामान्य शारीरिक प्रक्रिया है। जब हम खाते या पीते हैं, तो खाने के साथ कुछ हवा भी पेट में चली जाती है। यह हवा पेट में दबाव बनाती है और शरीर उसे मुंह के रास्ते बाहर निकाल देता है, इसे ही डकार कहते हैं। डकार का मतलब पेट भरना नहीं होता, बल्कि यह पेट में जमा अतिरिक्त हवा के निकलने का संकेत है। जल्दी-जल्दी खाना, ज्यादा बात करते हुए खाना, ठंडे या कार्बोनेटेड ड्रिंक पीना और च्युइंगम चबाना डकार की संभावना बढ़ा देता है। अगर डकार बहुत ज्यादा आए, जलन या दर्द के साथ हो, तो यह एसिडिटी या पाचन समस्या का संकेत भी हो सकता है। ऐसे में खानपान और आदतों पर ध्यान देना जरूरी होता है। सवाल- डकार क्यों आती है? जवाब- इन कारणों से आती है डकार- सवाल- अगर खाना खाने के बाद डकार आए तो इससे हमारे पेट और डाइजेशन के बारे में क्या पता चलता है? जवाब- खाना खाने के बाद डकार का मतलब है कि खाते समय भोजन नली में हवा चली गई है। इसमें चिंता की कोई बात नहीं है। अगर बार-बार डकार आ रही है और साथ में पेट में भारीपन है, जलन है तो यह एसिडिटी या गैस का संकेत हो सकता है। यह पाचन तंत्र में किसी कमी का भी संकेत हो सकता है। सवाल– डकार आना हमारी ओवरऑल सेहत के बारे में क्या बताता है? जवाब- डॉ. जी. एस. लांबा कहते हैं कि डकार आना आमतौर पर हमारी पाचन प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा है। यह किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या का संकेत नहीं होती है। हल्की डकार का मतलब है कि पाचन सामान्य है, लेकिन बार-बार डकार, पेट में दर्द, जलन या अपच के साथ हो तो यह गैस, एसिडिटी या पाचन संबंधी समस्या का संकेत हो सकता है। डकार का पैटर्न, खाने-पीने की आदतें और अन्य लक्षण मिलाकर ही हमारी ओवरऑल सेहत का अंदाजा लगाया जा सकता है। सवाल- क्या डकार आने का मतलब ये है कि शरीर के अंदर टॉक्सिन्स हैं? जवाब- डॉ. जी. एस. लांबा कहते हैं कि डकार आने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि शरीर में टॉक्सिन्स जमा हैं। यह पाचन प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा है। टॉक्सिन्स शरीर से लिवर, किडनी और पसीने के जरिए बाहर निकलते हैं, डकार से उनका कोई लेना-देना नहीं है। इसलिए डकार को किसी स्वास्थ्य समस्या या टॉक्सिन लेवल का संकेत मानना ठीक नहीं है। सवाल- अगर बहुत ज्यादा या बार-बार डकार आए तो इसका मतलब क्या है? जवाब- अगर बहुत ज्यादा या बार-बार डकार आती है, तो यह आमतौर पर पेट या पाचन में किसी असुविधा का संकेत हो सकता है। इसके पीछे मुख्य कारण गैस बनना, एसिडिटी, अपच या बहुत जल्दी और ज्यादा हवा निगलना हो सकता है। कार्बोनेटेड ड्रिंक, च्युइंगम, जल्दी-जल्दी खाना या तनाव के कारण भी डकार आ सकती है। कभी-कभी यह पेट या भोजन नली की सूजन या पाचन समस्या का भी संकेत हो सकता है। सवाल- क्या बार-बार डकार आना पेट की किसी बीमारी का संकेत है? जवाब- डॉ. जी. एस. लांबा कहते हैं कि ऐसा जरूरी नहीं है। डकार आना बेहद कॉमन है, यह समस्या का संकेत नहीं होती है। यह पेट में गैस बनने या हवा ज्यादा निगलने (एरोफेजिया) की वजह से होता है। अगर इसके साथ सीने में जलन, पेट में दर्द, सूजन या खट्टी डकार आएं तो यह एसिड रिफ्लक्स जैसी समस्या का संकेत हो सकता है। सवाल- क्या डकार का लिवर, किडनी या गट हेल्थ से कोई संबंध है? जवाब- डकार का लिवर या किडनी से सीधे कोई संबंध नहीं है। इसके बावजूद आंतों में बैक्टीरिया के असंतुलन, भोजन के सही तरीके से न पचने या ज्यादा गैस बनने से डकार बढ़ सकती है। लिवर का काम पित्त बनाकर फैट पचाने में मदद करना होता है। इसलिए लिवर की कार्यक्षमता प्रभावित होने पर भी पाचन गड़बड़ हो सकता है। सवाल- खट्टी या बदबूदार डकार किस बात का संकेत है? जवाब- डकार कई तरह की हो सकती है। सभी प्रकार और उनसे जुड़े सेहत के संकेत देखिए- खट्टी डकार (सॉर बेल्चिंग) बदबूदार डकार (फाउल स्मेल बेल्चिंग) खाने के तुरंत बाद डकार सड़े अंडे जैसी डकार (सल्फर बेल्चिंग) खाली पेट डकार तेज आवाज वाली डकार उल्टी जैसे टेस्ट वाली डकार मीठे या अजीब स्वाद वाली डकार सवाल- एयरोफेजिया क्या होता है और इसका डकार से क्या संबंध है? जवाब- एयरोफेजिया एक ऐसी कंडीशन है, जिसमें हम अनजाने में ज्यादा हवा निगल लेते हैं। यह आमतौर पर जल्दी खाना, बहुत बात करते हुए खाना, च्युइंगम चबाना या कार्बोनेटेड ड्रिंक पीने से होता है। जब पेट में अतिरिक्त हवा जमा होती है, तो शरीर उसे बाहर निकालने के लिए डकार करता है। इसलिए एयरोफेजिया और डकार का सीधा संबंध है। डकार इस अतिरिक्त हवा को बाहर निकालने का प्राकृतिक तरीका है। सामान्य रूप से यह नुकसानदेह नहीं है, लेकिन बार-बार डकार, पेट में भारीपन या असुविधा होने पर खाने की आदतें बदलना और डॉक्टर से सलाह लेना मददगार होता है। सवाल- ज्यादा डकार आए तो कैसे कंट्रोल करें? जवाब- अगर लगातार डकार आ रही है तो तुरंत कंट्रोल करने के लिए करें ये आसान उपाय- ……………… ये खबर भी पढ़िए फिजिकल हेल्थ- शराब, सोडा से ज्यादा खतरनाक एनर्जी ड्रिंक्स:पीने से खराब होती किडनी, डॉक्टर से जानें किडनी को कैसे रखें हेल्दी एनर्जी ड्रिंक्स पीने से किडनी पर काम का बोझ बढ़ जाता है। इससे लिवर और हार्ट को भी नुकसान होता है। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि ये ड्रिंक्स कई मायनों में शराब और सोडा से भी ज्यादा खतरनाक हो सकते हैं। आगे पढ़िए…
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