उत्तराखंड के Hemkund Sahib के कपाट शीतकाल के लिए बंद, 3.84 लाख श्रद्धालुओं ने टेका मत्था
उत्तराखंड के चमोली जिले में करीब 15 हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित विश्व प्रसिद्ध गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब के कपाट शुक्रवार को शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। खराब मौसम और कड़ाके की ठंड के बीच कपाट बंद होने के अवसर पर देश-विदेश से आए बड़ी संख्या में सिख श्रद्धालु मौजूद रहे। उन्होंने इस वर्ष की अंतिम पूजा में हिस्सा लिया।
गुरुद्वारे के कपाट मई में खोले गए थे और तब से अब तक तीन लाख 84 हजार से अधिक श्रद्धालु हेमकुंड साहिब में मत्था टेक चुके हैं। कपाट बंद करने की प्रक्रिया सुबह 10 बजे सुखमनी साहिब पाठ के साथ शुरू हुई। शब्द-कीर्तन और अंतिम अरदास के बाद अपराह्न एक बजे गुरुद्वारे के कपाट श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिए गए।
इसके बाद गुरु ग्रंथ साहिब को लेकर यात्रा गोविंदघाट के लिए रवाना हुई। कपाट बंद होने के अवसर पर गुरुद्वारा प्रबंधन समिति के पदाधिकारियों के साथ स्थानीय पुलिस और प्रशासन के अधिकारी भी मौजूद थे। पाकिस्तान से आए सिख श्रद्धालुओं के 40 सदस्यीय जत्थे सहित करीब दो हजार श्रद्धालु इस अवसर पर गुरुद्वारे में उपस्थित थे।
सेना के बैंड की धुन और ‘वाहेगुरु जी’ के जयकारों के बीच बर्फ से ढके रास्तों से गुरु ग्रंथ साहिब के साथ सिख श्रद्धालुओं की संगत घांघरिया के लिए रवाना हुई। श्री हेमकुंड साहिब जाने के लिए बदरीनाथ के समीप गोविंदघाट से पुलना गांव तक सड़क मार्ग से पहुंचा जाता है। इसके बाद पुलना से भ्यूंडार और घांघरिया होते हुए करीब 16 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर गुरुद्वारे तक पहुंचा जाता है।
इस अवसर पर श्री हेमकुंड साहिब प्रबंधन ट्रस्ट के अध्यक्ष नरेंद्रजीत सिंह बिंद्रा और वरिष्ठ प्रबंधक सरदार सेवा सिंह ने यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था, मुस्तैदी और कुशल प्रबंधन के लिए स्थानीय पुलिस एवं प्रशासन का आभार जताया। हेमकुंड साहिब के साथ ही वहां स्थित प्राचीन लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के कपाट भी शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए।
Donald Trump ने Truth Social पर पूछा सवाल, 8 युद्ध सुलझाने पर भी क्यों नहीं मिला नोबेल
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को भारतीय मूल की दक्षिण अफ़्रीकी कानूनविद नवी पिल्लै को 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार देने के फ़ैसले की आलोचना जारी रखी। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने आठ युद्ध सुलझाए हैं, दो और झगड़ों को खत्म करने या सुलझाने के करीब हैं और अपनी कोशिशों के लिए इस प्रतिष्ठित सम्मान के हकदार हैं। ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय झगड़ों को सुलझाने, बंधकों को छुड़ाने और ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने में अपनी उपलब्धियों का ज़िक्र किया और सवाल उठाया कि उन्हें या अमेरिका को यह पुरस्कार क्यों नहीं मिला। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर अपनी पोस्ट में कहा कि मैंने 8 युद्ध सुलझाए, 2 और को खत्म करने या सुलझाने के करीब हूँ, इज़राइल के सभी बंधकों को वापस लाया जिनमें आखिरी 28 लोग भी शामिल थे, चाहे वे ज़िंदा हों या मृत दुनिया भर के देशों के सैकड़ों बंधकों को छुड़ाकर घर वापस भेजा, वेनेज़ुएला में एक युद्ध जीता और उस हिंसक तानाशाह को पकड़ा जिसने उस देश को बहुत बेरहमी से चलाया था और आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले नंबर एक देश, इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोका और भी बहुत कुछ! फिर भी, इन सबके बावजूद मुझे या संयुक्त राज्य अमेरिका को नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिला।
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ट्रंप की यह टिप्पणी नॉर्वेजियन नोबेल समिति की उस घोषणा के बाद आई है जिसमें शुक्रवार को बताया गया कि पिल्ले को शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने के उनके प्रयासों के लिए 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया है। ट्रुथ सोशल पर एक पहले की पोस्ट में, ट्रंप ने पिल्ले को सम्मानित करने के फैसले पर सवाल उठाया और दावा किया कि दुनिया भर में संघर्षों को सुलझाने में अपनी भूमिका के लिए वे खुद इस सम्मान के हकदार थे। ट्रंप ने कहा कि यह वही महिला हैं जिन्हें महान संयुक्त राज्य अमेरिका से आगे रखकर नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया, जबकि अमेरिका के प्रतिनिधि के तौर पर मैंने आठ युद्ध और कई अन्य मामले सुलझाए। मैं इस महिला के बारे में कुछ नहीं जानता, और न ही कोई और जानता है! उन्होंने आगे कहा असल में मेरी जानकारी के मुताबिक, उनके बारे में किसी ने तब तक नहीं सुना था जब तक यह बात सामने नहीं आई कि वे साफ तौर पर इज़राइल से नफरत करती हैं। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि उन्होंने ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोका था और उत्तर कोरिया, दक्षिण कोरिया, जापान, चीन और ताइवान से जुड़े तनावों सहित अन्य क्षेत्रों में संघर्षों को टालने में मदद की थी।
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नोबेल कमिटी ने अपनी घोषणा में कहा कि पिल्ले ने एक ज़्यादा व्यापक वैश्विक कानूनी व्यवस्था को आगे बढ़ाने में असाधारण साहस और ईमानदारी दिखाई है और यह सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाई है कि युद्ध अपराधों, मानवता के ख़िलाफ़ अपराधों और नरसंहार के मामलों में कानूनी कार्रवाई हो। कमिटी ने कहा 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार उस व्यक्ति को दिया जा रहा है जिसने असाधारण साहस और ईमानदारी के साथ एक ज़्यादा व्यापक वैश्विक कानूनी व्यवस्था की दिशा में नेतृत्व किया है। इस साल के विजेता ने यह सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाई है कि युद्ध अपराधों, मानवता के ख़िलाफ़ अपराधों और नरसंहार के मामलों में कानूनी कार्रवाई हो। दक्षिण अफ्रीका के डरबन में रंगभेद के दौर में भारतीय तमिल मूल के परिवार में जन्मीं पिल्ले एक वकील और कानूनी क्षेत्र की अग्रणी हस्ती बनीं, जिन्होंने संरचनात्मक भेदभाव, अलगाव और बहिष्कार का सामना किया।
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