वसंत ऋतु में आहार परिवर्तन देगा बेहतर नींद, खांसी-जुकाम से भी मिलेगा छुटकारा
नई दिल्ली, 7 फरवरी (आईएएनएस)। वसंत के आगमन के साथ मौसम में बदलाव देखने को मिलता है। दिन में तेज धूप और सुबह-शाम की सर्दी बीमारियों का कारण बनती हैं, इसलिए जरूरी है कि आहार ऋतु के अनुसार ही बदलना चाहिए।
वसंत ऋतु के समय ज्यादातर लोग नींद से जुड़ी परेशानियों से जूझते हैं, और इसका सबसे बड़ा कारण है कफ दोष की वृद्धि।
वसंत ऋतु के आगमन के साथ शरीर में कफ दोष की वृद्धि होती है, जिससे रात के समय भारीपन, नींद न आना और अपच की समस्या बनी रहती है। आयुर्वेद में वसंत को ऊर्जा का काल और संक्रमण का तेजी से फैलने का समय भी माना है। वसंत ऋतु में लोग हल्की गर्मी की वजह से ठंडी चीजों को आहार में शामिल करते हैं, जिसकी वजह से बुखार और सर्दी की समस्या होती है। आयुर्वेद में वसंत ऋतु में आहार परिवर्तन की सलाह दी जाती है, जिससे शरीर को संतुलित और बीमारियों से दूर रखा जा सके।
वसंत ऋतु में मूंग की दाल की खिचड़ी खाने की सलाह दी जाती है, क्योंकि ये खाने में हल्की होती है और पेट पर किसी तरह का दबाव भी नहीं पड़ता है। अगर खिचड़ी में एक चुटकी सोंठ पाउडर डाल लिया जाए तो खिचड़ी औषधि बन जाती है। इससे शरीर हल्की गुलाबी ठंड से बचा रहता है और नींद भी अच्छे से आती है।
वसंत के मौसम में लौकी, तोरई और परवल जैसी सब्जियां बाजार में आसानी से मिल जाती हैं। इन तीनों सब्जियों को मिलाकर हल्का भूनकर और स्टीम करके खाना चाहिए। ये फाइबर की कमी को पूरा करती हैं और पेट से जुड़ी समस्याओं को भी दूर करती हैं। खाने में हल्की होने के बाद तीनों सब्जियां विटामिन से भरी होती हैं।
लोगों को लगता है कि बाजरे का सेवन सिर्फ सर्दियों में ही किया जाता है, लेकिन यह गलत है। वसंत ऋतु में भी बाजरा खाकर खुद को स्वस्थ रखा जा सकता है। बाजरा तासीर में गर्म होता है और प्रोटीन और आयरन से भरपूर होता है। यह शरीर को फुर्ती देता है और संक्रमण से भी बचाता है। इसके अलावा, हल्की वाला दूध, पपीता, अदरक और शहद का पानी और जौ का सूप पीना भी लाभकारी होता है।
--आईएएनएस
पीएस/डीकेपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
चीनी राज्य परिषद की स्थाई बैठक में कारगर निवेश बढ़ाने पर जोर दिया गया
बीजिंग, 7 फरवरी (आईएएनएस)। चीनी प्रधानमंत्री ली छ्यांग ने 6 फरवरी को राज्य परिषद की स्थाई बैठक बुलाकर वर्ष 2025 में राज्य परिषद के विभिन्न विभागों द्वारा राष्ट्रीय जन प्रतिनिधियों की रायों और जन राजनीतिक सलाहकार सम्मेलन की राष्ट्रीय समिति (सीपीपीसीसी) के सुझावों से निपटने की रिपोर्ट सुनी, कारगर निवेश बढ़ाने के कदमों पर विचार किया, पर्यावरण वायु गुणवत्ता मापदंड के संशोधन का इंतजाम किया और बोली निमंत्रित करने और लगाने पर कानून के संशोधन मसौदे पर विचार किया।
इस बैठक में कहा गया कि जन प्रतिनिधियों की रायों और सीपीपीसीसी के सुझावों का अच्छा निपटारा करना सरकार के लिए निगरानी स्वीकारने और कानून के मुताबिक अपना कर्तव्य निभाने की मांग है। यह समग्र प्रक्रिया वाला लोकतंत्र गहराई से लागू करने का महत्वपूर्ण प्रतिबिंब भी है।
इस बैठक में कहा गया कि कारगर निवेश बढ़ाना स्थिर आर्थिक वृद्धि और विकास की मजबूती के लिए बड़ा महत्व रखता है। नीतिगत सुधार कर केंद्रीय बजट में निवेश, बेहद-लंबे विशेष राजकोषीय बांड, स्थानीय सरकार के विशेष बांड ,तथा नयी किस्म के नीतिगत वित्तीय संसाधनों का कुशल प्रयोग करना चाहिए।
15वीं पंचवर्षीय योजना से जुड़कर दूरगामी विकास की मांग और भावी प्रतिस्पर्द्धात्मक लाभ की स्थापना का ख्याल रखते हुए बुनियादी संस्थापन, शहरी जीर्णोद्धार, सार्वजनिक सेवा, नवोदित व भावी व्यवसायों में श्रृंखलात्मक महत्वपूर्ण परियोजनाएं प्रस्तुत कर उनको लागू करना चाहिए।
इस बैठक में कहा गया कि निरंतर कोशिशों के बाद इधर के कुछ सालों में चीन की वायु गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है और इस संदर्भ में जनता का संतोष स्तर निरंतर उन्नत हो रहा है। संशोधित होने वाले पर्यावरण वायु गुणवत्ता मापदंड में पीएम 2.5 के वार्षिक घनत्व के प्रति अधिक ऊंची मांग की जाएगी। हमें सुंदर नीला आकाश सुरक्षित करना है।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
--आईएएनएस
एबीएम/
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