फरीदाबाद के सूरजकुंड मेले में सुनामी झूला टूटने से बड़ा हादसा, बचाव कार्य में जुटे इंस्पेक्टर की मौत, 13 लोग घायल
अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड मेले में शनिवार का दिन हादसों के नाम रहा, जहां शाम के वक्त एक विशालकाय ‘सुनामी झूला’ टूटने से अफरा-तफरी मच गई। इस दर्दनाक हादसे में बचाव कार्य के दौरान एक पुलिस इंस्पेक्टर की मौत हो गई, जबकि 13 अन्य लोग घायल हो गए। घटना के बाद मेले में भगदड़ जैसी स्थिति बन …
भागवत बोले- RSS को पावर की इच्छा नहीं:मुंबई में कहा- संघ किसी रिएक्शन में काम नहीं करता; कार्यक्रम में सलमान खान भी पहुंचे
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने शनिवार को कहा कि RSS किसी के खिलाफ नहीं है और न ही उसे सत्ता या पावर की इच्छा है। उन्होंने कहा कि संघ किसी घटना के रिएक्शन में काम नहीं करता, बल्कि देश में चल रहे सकारात्मक प्रयासों को समर्थन और मजबूती देने पर फोकस करता है। उन्होंने कहा कि संघ कोई पैरामिलिट्री फोर्स नहीं है। रूट मार्च और स्वयंसेवकों के लाठी अभ्यास के बावजूद RSS को अखाड़ा या सैन्य संगठन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। संघ राजनीति में सीधे तौर पर शामिल नहीं है, हालांकि संघ के कुछ लोग राजनीति में सक्रिय हैं। भागवत ने कहा कि भारत का बंटवारा धर्म की वजह से हुआ। हमने कहा कि हम सभी धर्मों का सम्मान करते हैं, क्योंकि हम हिंदू हैं। इस्लाम, ईसाई धर्म अभी भी भारत में मौजूद हैं। झड़पें होती हैं, लेकिन देश एकजुट रहा है। हिंदू भाव को भुला देना भी बंटवारे का कारण बना। RSS के 100 साल पूरे होने पर मुंबई में आयोजित दो दिन के कार्यक्रम में बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान भी मौजूद रहे। वे फिल्ममेकर सुभाष घई और गीतकार प्रसून जोशी के साथ भागवत का भाषण ध्यान से सुनते नजर आए। भागवत की स्पीच की 6 बड़ी बातें: भागवत ने समाज सुधारकों और हेडगेवार का जिक्र किया संघ प्रमुख ने आजादी के समय बनी अलग-अलग विचारधाराओं का जिक्र करते हुए राजा राम मोहन रॉय, स्वामी विवेकानंद और दयानंद सरस्वती जैसे समाज सुधारकों को याद किया। उन्होंने कहा कि इन लोगों की सोच ने देश के समाज को जागरूक बनाने में बड़ी भूमिका निभाई। समाज को दिशा देने और जरूरी माहौल बनाने का काम बड़े स्तर पर नहीं हो पा रहा है। इसी कमी को भरने के लिए संघ लगातार काम करता है। RSS के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने 13 साल की उम्र में माता-पिता को खो दिया था। इसके बावजूद हेडगेवार ने आजादी की लड़ाई में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। मेडिकल की पढ़ाई के दौरान वे क्रांतिकारी लोगों के संपर्क में आए और 'कोकेन' कोड नाम से गुप्त रूप से काम किया। इस किस्से का जिक्र रास बिहारी बोस की किताब में भी मिलता है।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
Mp Breaking News

















