India-US Relations | बड़ी कूटनीतिक जीत! डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर लगा 25% टैरिफ हटाया, रूसी तेल आयात पर बनी सहमति
भारत और अमेरिका के बीच रिश्तों में एक नया अध्याय जुड़ गया है, जिसे वैश्विक राजनीति में भारत की एक बड़ी कूटनीतिक जीत के रूप में देखा जा रहा है। भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों में एक बड़ी सफलता देखने को मिली है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत से आयातित वस्तुओं पर लगाए गए 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क (टैरिफ) को तत्काल प्रभाव से हटाने का निर्णय लिया है। यह निर्णय भारत द्वारा रूस से तेल आयात कम करने और अमेरिका के साथ ऊर्जा व रक्षा संबंधों को मजबूत करने की प्रतिबद्धता के बाद लिया गया है।
उन्होंने कहा कि भारत ने इस दिशा में ‘‘उल्लेखनीय कदम’’ उठाए हैं और उसने (भारत ने) रूस से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से तेल आयात बंद करने की प्रतिबद्धता जताई है। ट्रंप ने शुक्रवार को एक कार्यकारी आदेश में कहा, ‘‘मुझे वरिष्ठ अधिकारियों से कार्यकारी आदेश 14066 में वर्णित राष्ट्रीय आपातकाल से निपटने के लिए भारत के प्रयासों के संबंध में अतिरिक्त जानकारी और सिफारिशें प्राप्त हुई हैं।
विशेष रूप से, भारत ने रूसी संघ से तेल का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष आयात बंद करने की प्रतिबद्धता जताई है। भारत ने यह स्पष्ट किया है कि वह अमेरिका से ऊर्जा उत्पाद खरीदेगा और हाल में अगले 10 वर्षों में रक्षा सहयोग बढ़ाने के लिए अमेरिका के साथ एक रूपरेखा पर सहमति व्यक्त की है।’’
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें दी गई जानकारी और सिफारिशों पर विचार करने के बाद उन्होंने यह निष्कर्ष निकाला कि ‘‘कार्यकारी आदेश 14066 में वर्णित राष्ट्रीय आपातकाल से निपटने और राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश नीति एवं आर्थिक मामलों पर अमेरिका के साथ पर्याप्त रूप से तालमेल बिठाने के लिए भारत ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इसके मद्देनज़र, मैंने भारत से आयातित वस्तुओं पर लगाए गए अतिरिक्त मूल्य-आधारित शुल्क को समाप्त करने का निर्णय लिया है।
भारत के लिए इसके क्या मायने हैं?
यह फैसला भारतीय निर्यातकों के लिए एक बड़ी राहत है, जो पिछले कुछ समय से उच्च टैरिफ के कारण अमेरिकी बाजार में दबाव महसूस कर रहे थे। इसके अलावा, अमेरिका से ऊर्जा की खरीद और रक्षा साझेदारी में मजबूती भारत को वैश्विक पटल पर एक मजबूत रणनीतिक साझेदार के रूप में स्थापित करती है।
India-US Trade Deal से बदलेगी exporters की किस्मत? पीयूष गोयल ने बताया 30,000 अरब डॉलर का प्लान
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को कहा कि भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम समझौते की रूपरेखा पर सहमति से भारतीय निर्यातकों, विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई), किसानों और मछुआरों के लिए 30,000 अरब डॉलर का बाजार खुलेगा। उन्होंने कहा कि इसके साथ निर्यात में वृद्धि से महिलाओं और युवाओं के लिए लाखों नए रोजगार के अवसर सृजित होंगे। अमेरिका और भारत ने शनिवार को संयुक्त बयान में अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा पर सहमति बनने की घोषणा की।
इसके तहत अमेरिका भारत पर जवाबी शुल्क घटाकर 18 प्रतिशत कर देगा। वहीं भारत, अमेरिका के सभी औद्योगिक सामानों और खाद्य एवं कृषि उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला पर शुल्क समाप्त करेगा या कम करेगा। गोयल ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के निर्णायक नेतृत्व में भारत ने अमेरिका के साथ एक अंतरिम समझौते के लिए रूपरेखा तैयार कर ली है। इससे भारतीय निर्यातकों, विशेषकर सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई), किसानों और मछुआरों के लिए 30,000 अरब डॉलर का बाजार खुल जाएगा। निर्यात में वृद्धि से हमारी महिलाओं और युवाओं के लिए लाखों नए रोजगार के अवसर सृजित होंगे।’’ उन्होंने कहा कि इस रूपरेखा के तहत, अमेरिका भारतीय वस्तुओं पर जवाबी शुल्क घटाकर 18 प्रतिशत कर देगा।
इससे दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था (अमेरिका) में वस्त्र एवं परिधान, चमड़ा एवं जूते, प्लास्टिक एवं रबड़ उत्पाद, जैविक रसायन, घरों में सजवाट के सामान, हस्तशिल्प उत्पाद और चुनिंदा मशीनरी जैसे प्रमुख क्षेत्रों में काफी अवसर प्राप्त होंगे। इसके अतिरिक्त, जेनेरिक दवाइयां, रत्न एवं हीरा तथा विमान के कल-पुर्जे सहित कई प्रकार की वस्तुओं पर शुल्क शून्य हो जाएगा, जिससे भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धी क्षमता और मेक इन इंडिया को और बढ़ावा मिलेगा। गोयल ने कहा, ‘‘भारत को विमान के कल-पुर्जों पर धारा 232 के तहत छूट, वाहन कल- पुर्जों पर शुल्क दर कोटा से लाभ भी मिलेगा, जिससे इन क्षेत्रों में निर्यात में मजबूत वृद्धि होगी।’’ उन्होंने कहा, ‘‘साथ ही, यह समझौता किसानों के हितों की रक्षा करने और ग्रामीण आजीविका को बनाए रखने के लिए भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसमें मक्का, गेहूं, चावल, सोया, मुर्गी पालन, दूध, पनीर, एथनॉल (ईंधन), तंबाकू, कुछ सब्जियां, मांस आदि जैसे संवेदनशील कृषि और दुग्ध उत्पादों को पूर्ण रूप से संरक्षित किया गया है।
उन्होंने कहा, ‘‘यह समझौता भारत और अमेरिका को आर्थिक सहयोग को और मजबूत करने के लिए मिलकर काम करने पर ध्यान केंद्रित करने में मदद करेगा, जो हमारे लोगों और कंपनियों के लिए सतत विकास के प्रति साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
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