प्रसव के बाद मां-बच्चे की सही देखभाल है जरूरी, न करें ये लापरवाही
नई दिल्ली, 6 फरवरी (आईएएनएस)। प्रसव के बाद का समय मां और बच्चे दोनों के लिए बेहद नाज़ुक और महत्वपूर्ण होता है। डिलीवरी के बाद अक्सर ध्यान सिर्फ बच्चे पर चला जाता है, लेकिन यह समझना जरूरी है कि अगर मां स्वस्थ रहेगी तभी शिशु की सही देखभाल संभव है। इस समय थोड़ी-सी लापरवाही आगे चलकर मां और बच्चे दोनों की सेहत पर भारी पड़ सकती है, इसलिए प्रसवोत्तर देखभाल को हल्के में नहीं लेना चाहिए।
डिलीवरी के बाद मां का शरीर बहुत कमजोर हो जाता है। गर्भावस्था और प्रसव के दौरान शरीर की ताकत, खून और पोषक तत्व काफी हद तक कम हो जाते हैं। ऐसे में मां को पूरा आराम, सुकून भरा माहौल और परिवार का सहयोग मिलना बहुत जरूरी है। अत्यधिक काम करना, नींद पूरी न होने देना या मानसिक तनाव देना मां की रिकवरी को धीमा कर देता है। आयुर्वेद के अनुसार, इस समय मां को चिंता, डर और तनाव से दूर रखना चाहिए क्योंकि इसका सीधा असर दूध बनने की प्रक्रिया पर पड़ता है।
खान-पान की बात करें तो प्रसव के बाद हल्का, सुपाच्य और पौष्टिक भोजन बहुत जरूरी होता है। हरी सब्जियां, दालें, दूध और दूध से बनी चीजें, थोड़ी मात्रा में घी, दलिया, खिचड़ी जैसे भोजन शरीर को ताकत देते हैं और पाचन भी ठीक रखते हैं। आयुर्वेद में मेथी, जीरा, सौंफ, अदरक और शतावरी को बहुत लाभकारी माना गया है। ये न सिर्फ शरीर की कमजोरी दूर करते हैं बल्कि मां के दूध की मात्रा बढ़ाने में भी मदद करते हैं। बहुत ठंडा, बासी या तला-भुना खाना इस समय नुकसानदायक हो सकता है, इसलिए इससे बचना चाहिए।
शारीरिक देखभाल भी उतनी ही जरूरी है। डिलीवरी के बाद हल्की मालिश, गुनगुने पानी से स्नान और धीरे-धीरे किए गए हल्के व्यायाम शरीर को फिर से संतुलन में लाने में मदद करते हैं। पेट और कमर की मांसपेशियां धीरे-धीरे मजबूत होती हैं और दर्द में भी राहत मिलती है। लेकिन किसी भी तरह की जल्दबाजी या तेज एक्सरसाइज से बचना चाहिए।
अक्सर लोग इस समय मां की भावनाओं को नजरअंदाज कर देते हैं, जो गलत है। हार्मोनल बदलाव के कारण मां को उदासी, चिड़चिड़ापन या थकान महसूस हो सकती है। ऐसे में परिवार का प्यार, समझदारी और सहयोग बहुत मायने रखता है। अगर समय रहते सही देखभाल की जाए तो यह दौर मां और बच्चे दोनों के लिए सुरक्षित और सुखद बन सकता है।
अब बात करें बच्चे की, तो जन्म के तुरंत बाद मां का पहला दूध (कोलोस्ट्रम) बच्चे के लिए अमृत के समान होता है। इसे किसी भी बच्चे को पिलाना चाहिए। पहले छह महीने तक बच्चे को सिर्फ मां का दूध देना सबसे अच्छा माना जाता है। इससे बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और वह स्वस्थ रहता है। बच्चे की साफ-सफाई, गर्माहट और समय-समय पर स्तनपान का ध्यान रखना भी बहुत जरूरी है।
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बांग्लादेश के पूर्व विदेश मंत्री ने आगामी चुनाव को बताया 'पाखंड’, यूएस से की खास अपील
वाशिंगटन, 6 फरवरी (आईएएनएस)। बांग्लादेश के पूर्व विदेश मंत्री ए के अब्दुल मोमेन ने दावा किया है कि उनके देश में होने वाले आगामी संसदीय चुनाव एक पाखंड है, जिसका भरोसा नहीं किया जा सकता है। इसके साथ ही उन्होंने अमेरिका से अपील की कि वह इस चुनाव प्रक्रिया को खारिज कर मान्यता देने से बचें।
मोमेन के अनुसार चूंकि ज्यादातर पार्टियों को चुनाव लड़ने से बैन किया गया है और कई लोगों को भागीदारी से रोका गया है, इसलिए इसे तरजीह नहीं दी जानी चाहिए।
पूर्व विदेश मंत्री ने आईएएनएस को दिए एक इंटरव्यू में आरोप लगाया कि 12 फरवरी को होने वाला चुनाव पहले से तय है, और अधिकारी इसका इस्तेमाल बांग्लादेश के संविधान के साथ-साथ बांग्लादेश के मूल्यों और सिद्धांतों में बदलाव करने के लिए कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जिन पार्टियों के पास लगभग 60, 70 फीसदी पब्लिक सपोर्ट है, उन्हें ही नहीं बल्कि गठबंधन वाली 12 पार्टियों को भी हिस्सा लेने से रोक दिया गया है। इससे ये चुनाव चुनिंदा पार्टियों और कुछ खास लोगों का गुट बनकर रह गया है।
मोमेन ने चुनाव के मकसद पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, हम स्टेबिलिटी, पॉलिटिकल स्टेबिलिटी, इकॉनमिक रिकवरी के लिए वोट डालते हैं, देश में खौफ और खतरे को खत्म करने के लिए चुनाव करवाए जाते हैं। लेकिन मेरा मानना है कि आगामी चुनाव से इनमें से किसी भी चीज में सुधार नहीं होने वाला है। उन्होंने कहा, इससे देश में और तबाही आएगी, अर्थव्यवस्था का हाल पहले से ही खराब है और ये और नीचे जाएगा।
उन्होंने कहा कि इकॉनमिक नतीजे पहले से ही दिख रहे हैं, निवेश कम हो रहा है। मोमेन ने कहा, घरेलू और विदेशी दोनों स्तर पर कोई नया निवेश नहीं है। बांग्लादेश हर साल लगभग 20 लाख बेरोजगार पैदा करता है। उन्होंने कहा, वे रो रहे होंगे, और चेतावनी दी कि लंबे समय तक अस्थिरता देश की युवा आबादी की उम्मीदें तोड़ कर रख देंगी। यह पूछे जाने पर कि देश को असल में कौन चला रहा है, मोमेन ने कहा कि नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाले अंतरिम प्रशासन के तहत औपचारिक अधिकार खत्म कर दिए गए हैं।
मोमेन ने कहा, वे तकनीकी रूप से देश चला रहे हैं, लेकिन असल में उन्होंने अपनी जिम्मेदारी छोड़ दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि कंट्रोल कट्टरपंथी इस्लामिक समूह को सौंप दी गई है और यही देश चला रहे हैं। परिणामस्वरूप मानवाधिकारों का उल्लंघन हो रहा है, भ्रष्टाचार और लोगों के उत्पीड़न की तादाद में इजाफा हो रहा है। उन्होंने मौजूदा प्रशासन को सबसे नाकाबिल और बेअसर बताया।
मोमेन ने संयुक्त राज्य अमेरिका से सार्वजनिक तौर पर साफ रुख अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा, हमारी उम्मीद है कि यूएस इस चुनाव को मान्यता नहीं देगा। उन्होंने संयुक्त राज्य अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र दोनों के चुनाव पर्यवेक्षकों को न भेजने के फैसले का स्वागत किया।
उन्होंने कहा, अमेरिका- डेमोक्रेसी और लोगों की पूरी भागीदारी के लिए खड़ा है, और कहा कि अब अमेरिका के लिए यह पब्लिक में ऐलान करने का सही समय है कि आने वाला चुनाव एक दिखावा है और यूएस उस चुनाव को मान्यता नहीं देगा।
बांग्लादेश के पूर्व मंत्री ने प्रशासन पर घरेलू नाकामियों से ध्यान हटाने के लिए भारत विरोधी भावना को हवा देने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा, उन्होंने (मोहम्मद यूनुस) भारत के खिलाफ प्रोपेगैंडा शुरू कर दिया है, और उन दावों को खारिज कर दिया कि पिछली सरकारों ने राष्ट्रीय हितों से समझौता किया था। उन्होंने कहा कि भारत या दूसरे देशों के साथ समझौते हमेशा दोनों देशों के आपसी हित के लिए किए जाते थे, और इसके उलट आरोप पूरी तरह से दुष्प्रचार पर आधारित हैं।
विदेश नीति पर, मोमेन ने आईएएनएस को बताया कि बांग्लादेश के पारंपरिक बैलेंसिंग तरीके को छोड़ दिया गया है। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों ने भारत, अमेरिका और चीन के बीच संतुलन बनाए रखा, लेकिन मौजूदा लीडरशिप ने चीन के करीब जाते हुए भारत को दुश्मन बना दिया है। उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि साउथ एशिया में यह गलत तरीका है।
एक सवाल के जवाब में, मोमेन ने चेतावनी दी कि अगर मौजूदा तरीका जारी रहा तो गंभीर अंदरूनी और क्षेत्रीय खतरे हो सकते हैं। उन्होंने कहा, बांग्लादेश इतिहास में दर्ज हो जाएगा, और आरोप लगाया कि जिहादी आतंकवादी नेटवर्क ने अपनी जगह बना ली है। इन आतंकवादियों का कोई धर्म नहीं है, कोई देश नहीं है। उनका एक ही मकसद है और वो बांग्लादेश को खत्म करना है।
--आईएएनएस
केआर/
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