बांग्लादेश के पूर्व विदेश मंत्री ने आगामी चुनाव को बताया 'पाखंड’, यूएस से की खास अपील
वाशिंगटन, 6 फरवरी (आईएएनएस)। बांग्लादेश के पूर्व विदेश मंत्री ए के अब्दुल मोमेन ने दावा किया है कि उनके देश में होने वाले आगामी संसदीय चुनाव एक पाखंड है, जिसका भरोसा नहीं किया जा सकता है। इसके साथ ही उन्होंने अमेरिका से अपील की कि वह इस चुनाव प्रक्रिया को खारिज कर मान्यता देने से बचें।
मोमेन के अनुसार चूंकि ज्यादातर पार्टियों को चुनाव लड़ने से बैन किया गया है और कई लोगों को भागीदारी से रोका गया है, इसलिए इसे तरजीह नहीं दी जानी चाहिए।
पूर्व विदेश मंत्री ने आईएएनएस को दिए एक इंटरव्यू में आरोप लगाया कि 12 फरवरी को होने वाला चुनाव पहले से तय है, और अधिकारी इसका इस्तेमाल बांग्लादेश के संविधान के साथ-साथ बांग्लादेश के मूल्यों और सिद्धांतों में बदलाव करने के लिए कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जिन पार्टियों के पास लगभग 60, 70 फीसदी पब्लिक सपोर्ट है, उन्हें ही नहीं बल्कि गठबंधन वाली 12 पार्टियों को भी हिस्सा लेने से रोक दिया गया है। इससे ये चुनाव चुनिंदा पार्टियों और कुछ खास लोगों का गुट बनकर रह गया है।
मोमेन ने चुनाव के मकसद पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, हम स्टेबिलिटी, पॉलिटिकल स्टेबिलिटी, इकॉनमिक रिकवरी के लिए वोट डालते हैं, देश में खौफ और खतरे को खत्म करने के लिए चुनाव करवाए जाते हैं। लेकिन मेरा मानना है कि आगामी चुनाव से इनमें से किसी भी चीज में सुधार नहीं होने वाला है। उन्होंने कहा, इससे देश में और तबाही आएगी, अर्थव्यवस्था का हाल पहले से ही खराब है और ये और नीचे जाएगा।
उन्होंने कहा कि इकॉनमिक नतीजे पहले से ही दिख रहे हैं, निवेश कम हो रहा है। मोमेन ने कहा, घरेलू और विदेशी दोनों स्तर पर कोई नया निवेश नहीं है। बांग्लादेश हर साल लगभग 20 लाख बेरोजगार पैदा करता है। उन्होंने कहा, वे रो रहे होंगे, और चेतावनी दी कि लंबे समय तक अस्थिरता देश की युवा आबादी की उम्मीदें तोड़ कर रख देंगी। यह पूछे जाने पर कि देश को असल में कौन चला रहा है, मोमेन ने कहा कि नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाले अंतरिम प्रशासन के तहत औपचारिक अधिकार खत्म कर दिए गए हैं।
मोमेन ने कहा, वे तकनीकी रूप से देश चला रहे हैं, लेकिन असल में उन्होंने अपनी जिम्मेदारी छोड़ दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि कंट्रोल कट्टरपंथी इस्लामिक समूह को सौंप दी गई है और यही देश चला रहे हैं। परिणामस्वरूप मानवाधिकारों का उल्लंघन हो रहा है, भ्रष्टाचार और लोगों के उत्पीड़न की तादाद में इजाफा हो रहा है। उन्होंने मौजूदा प्रशासन को सबसे नाकाबिल और बेअसर बताया।
मोमेन ने संयुक्त राज्य अमेरिका से सार्वजनिक तौर पर साफ रुख अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा, हमारी उम्मीद है कि यूएस इस चुनाव को मान्यता नहीं देगा। उन्होंने संयुक्त राज्य अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र दोनों के चुनाव पर्यवेक्षकों को न भेजने के फैसले का स्वागत किया।
उन्होंने कहा, अमेरिका- डेमोक्रेसी और लोगों की पूरी भागीदारी के लिए खड़ा है, और कहा कि अब अमेरिका के लिए यह पब्लिक में ऐलान करने का सही समय है कि आने वाला चुनाव एक दिखावा है और यूएस उस चुनाव को मान्यता नहीं देगा।
बांग्लादेश के पूर्व मंत्री ने प्रशासन पर घरेलू नाकामियों से ध्यान हटाने के लिए भारत विरोधी भावना को हवा देने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा, उन्होंने (मोहम्मद यूनुस) भारत के खिलाफ प्रोपेगैंडा शुरू कर दिया है, और उन दावों को खारिज कर दिया कि पिछली सरकारों ने राष्ट्रीय हितों से समझौता किया था। उन्होंने कहा कि भारत या दूसरे देशों के साथ समझौते हमेशा दोनों देशों के आपसी हित के लिए किए जाते थे, और इसके उलट आरोप पूरी तरह से दुष्प्रचार पर आधारित हैं।
विदेश नीति पर, मोमेन ने आईएएनएस को बताया कि बांग्लादेश के पारंपरिक बैलेंसिंग तरीके को छोड़ दिया गया है। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों ने भारत, अमेरिका और चीन के बीच संतुलन बनाए रखा, लेकिन मौजूदा लीडरशिप ने चीन के करीब जाते हुए भारत को दुश्मन बना दिया है। उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि साउथ एशिया में यह गलत तरीका है।
एक सवाल के जवाब में, मोमेन ने चेतावनी दी कि अगर मौजूदा तरीका जारी रहा तो गंभीर अंदरूनी और क्षेत्रीय खतरे हो सकते हैं। उन्होंने कहा, बांग्लादेश इतिहास में दर्ज हो जाएगा, और आरोप लगाया कि जिहादी आतंकवादी नेटवर्क ने अपनी जगह बना ली है। इन आतंकवादियों का कोई धर्म नहीं है, कोई देश नहीं है। उनका एक ही मकसद है और वो बांग्लादेश को खत्म करना है।
--आईएएनएस
केआर/
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सिलीगुड़ी कॉरिडोर पर रेलवे टनल से पूर्वोत्तर के बाकी हिस्सों से कनेक्टिविटी मजबूत होगी: सीएम हिमंत बिस्वा सरमा
गुवाहाटी, 6 फरवरी (आईएएनएस)। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शुक्रवार को सिलीगुड़ी कॉरिडोर से होकर बनने वाली प्रस्तावित अंडरग्राउंड रेलवे टनल का स्वागत किया। उन्होंने इसे एक गेम-चेंजिंग पहल बताया, जिससे नॉर्थईस्ट और देश के बाकी हिस्सों के बीच कनेक्टिविटी और मजबूत होगी और यात्रियों और सामान की बिना रुकावट आवाजाही सुनिश्चित होगी।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में सीएम सरमा ने कहा कि यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट भारत के नॉर्थईस्ट के साथ रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को मजबूत करेगा। यह क्षेत्र लंबे समय से जमीनी कनेक्टिविटी के लिए संकरे सिलीगुड़ी कॉरिडोर पर निर्भर रहा है, जिसे अक्सर चिकन नेक कहा जाता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह दूरदर्शी प्रस्ताव राष्ट्रीय एकता और संतुलित क्षेत्रीय विकास के प्रति केंद्र की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
मुख्यमंत्री ने पोस्ट में लिखा, सिलीगुड़ी कॉरिडोर के जरिए प्रस्तावित अंडरग्राउंड रेलवे टनल नॉर्थ ईस्ट क्षेत्र से कनेक्टिविटी को और मजबूत करेगी और यात्रियों और सामान की आवाजाही के लिए एक निर्बाध लिंक प्रदान करेगी। इस गेम-चेंजिंग विचार की कल्पना करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार।
मुख्यमंत्री ने कई मौकों पर सिलीगुड़ी कॉरिडोर की रणनीतिक कमजोरी पर प्रकाश डाला है, जो जमीन का एक संकरा हिस्सा है जो नॉर्थईस्ट को मुख्य भारत से जोड़ता है।
उन्होंने इसे न सिर्फ एक लॉजिस्टिकल लाइफलाइन बताया है, बल्कि एक संवेदनशील राष्ट्रीय सुरक्षा जोन भी कहा है। उन्होंने इस क्षेत्र में आर्थिक गतिविधि और आवाजाही की सुरक्षा के लिए कई, मज़बूत कनेक्टिविटी विकल्पों की जरूरत पर जोर दिया है।
उन्होंने पहले भी बताया था कि एक ही सतह वाले कॉरिडोर पर निर्भर रहने से प्राकृतिक आपदाओं, दुर्घटनाओं या दूसरी रुकावटों के दौरान जोखिम होता है, जिससे पूर्वोत्तर पूरी तरह से कट सकता है। उन्होंने हर समय बिना किसी रुकावट के पहुंच सुनिश्चित करने के लिए वैकल्पिक रास्तों और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर समाधानों, जिसमें सुरंगें और बेहतर रेल और सड़क नेटवर्क शामिल हैं, की वकालत की है।
अधिकारियों ने कहा कि प्रस्तावित भूमिगत रेलवे सुरंग सिलीगुड़ी कॉरिडोर के जरिए एक सुरक्षित, हर मौसम में इस्तेमाल होने वाला रास्ता प्रदान करके ऐसी कमजोरियों को काफी हद तक कम कर देगी।
इस प्रोजेक्ट से सामान और कच्चे माल के तेज और ज्यादा भरोसेमंद ट्रांसपोर्टेशन को सुनिश्चित करके पूर्वोत्तर में व्यापार, पर्यटन और औद्योगिक विकास को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि नॉर्थईस्ट में कनेक्टिविटी को मजबूत करने पर केंद्र का फोकस उसकी बड़ी एक्ट ईस्ट और विकसित भारत की सोच के साथ मेल खाता है, जिससे यह क्षेत्र दक्षिण पूर्व एशिया के लिए एक गेटवे बन जाएगा।
हाईवे, रेलवे, पुल और जलमार्गों में पहले से ही बड़े निवेश हो रहे हैं, ऐसे में प्रस्तावित सुरंग को नॉर्थईस्ट को भारत की आर्थिक मुख्यधारा में पूरी तरह से जोड़ने की दिशा में एक और रणनीतिक कदम के तौर पर देखा जा रहा है।
असम सरकार का मानना है कि बेहतर कनेक्टिविटी से विकास के नए मौके खुलेंगे, साथ ही चिकन नेक कॉरिडोर से जुड़ी लंबे समय से चली आ रही इंफ्रास्ट्रक्चर और रणनीतिक चिंताओं को भी दूर किया जा सकेगा।
--आईएएनएस
पीएसके
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