WTO ने बढ़ाया 2026 में वैश्विक वस्तु व्यापार का अनुमान, 3.9 फीसदी की दर से बढ़ने की संभावना
नयी दिल्ली, आठ अक्टूबर विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) ने बृहस्पतिवार को कहा कि 2026 में वैश्विक वस्तु व्यापार की मात्रा 3.9 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है, जबकि मार्च में इसके 1.9 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान लगाया गया था। हालांकि, डब्ल्यूटीओ ने कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष से 2026 में ऊर्जा की ऊंची कीमतों और परिवहन मार्गों में व्यवधान के कारण व्यापार प्रभावित होने की आशंका है। डब्ल्यूटीओ के नवीनतम ‘वैश्विक व्यापार परिदृश्य एवं सांख्यिकी’ के अनुसार, 2027 में वैश्विक वस्तु व्यापार की मात्रा 4.1 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है।
डब्ल्यूटीओ ने कहा कि कृत्रिम मेधा (एआई) से संबंधित निवेश 2027 तक वैश्विक वस्तु व्यापार की वृद्धि का एक प्रमुख कारक बना रहेगा। संगठन के अनुसार, 2026 में वैश्विक एआई बुनियादी ढांचे पर खर्च कम से कम 30 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है। डब्ल्यूटीओ ने कहा, ‘‘यह संशोधन इस बात के प्रमाण को दर्शाता है कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं ने ऊर्जा और उर्वरक बाजारों में आए व्यवधानों के अनुरूप खुद को ढाल लिया है, जबकि एआई से संबंधित बुनियादी ढांचे में मजबूत निवेश से एआई को सक्षम बनाने वाले सामान का व्यापार बढ़ा है।’’ डब्ल्यूटीओ ने कहा कि वाणिज्यिक सेवाओं के व्यापार में वृद्धि सकारात्मक रहने की उम्मीद है, हालांकि पश्चिम एशिया संघर्ष के परिवहन और अंतरराष्ट्रीय यात्रा पर असर के कारण संभावनाएं कुछ कमजोर हुई हैं।
वैश्विक व्यापार में वृद्धि का यह अनुमान भारत के लिए अनुकूल है, जो 2026-27 में वस्तुओं और सेवाओं के निर्यात को एक हजार अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य लेकर चल रहा है। डब्ल्यूटीओ के अनुसार, सेवाओं के व्यापार की मात्रा 2026 में 3.3 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है, जो मार्च में लगाए गए 4.8 प्रतिशत के अनुमान से कम है। 2027 में इसके 6.4 प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद है।
डब्ल्यूटीओ ने बयान में कहा, ‘‘2026 की पहली छमाही में उम्मीद से बेहतर वस्तु व्यापार वृद्धि को देखते हुए डब्ल्यूटीओ के अर्थशास्त्रियों को अब 2026 में वैश्विक वस्तु व्यापार की मात्रा 3.9 प्रतिशत और 2027 में 4.1 प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद है। वहीं, वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर क्रमशः 2.6 प्रतिशत और 2.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है।’’ डब्ल्यूटीओ ने कहा कि इस साल एशिया में वस्तुओं के निर्यात की वृद्धि सबसे तेज 9.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है। इसके बाद उत्तरी अमेरिका में 5.7 प्रतिशत, अफ्रीका में 5.6 प्रतिशत और दक्षिण अमेरिका में 3.4 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान है।
संगठन के अनुसार, यूरोप में निर्यात का प्रदर्शन कमजोर रहने और 0.1 प्रतिशत घटने का अनुमान है। स्वतंत्र देशों के राष्ट्रकुल (सीआईएस) में निर्यात 3.9 प्रतिशत और पश्चिम एशिया में 17.2 प्रतिशत घटने का अनुमान है। यह जारी संघर्ष और उससे जुड़े व्यापार व्यवधानों के असर को दर्शाता है।
आयात के मोर्चे पर एशिया में 9.5 प्रतिशत, अफ्रीका में 8.9 प्रतिशत और सीआईएस में 8.8 प्रतिशत की सबसे तेज वृद्धि का अनुमान है। वहीं, उत्तरी अमेरिका में 1.4 प्रतिशत और यूरोप में 0.5 प्रतिशत की मामूली वृद्धि की संभावना है। पश्चिम एशिया में आयात 15.4 प्रतिशत घटने का अनुमान है।
FII हिस्सेदारी घटने से HDFC Bank के Share में 1% से अधिक की गिरावट
एचडीएफसी बैंक के शेयरों में गुरुवार, 8 अक्टूबर को दबाव देखने को मिला। सितंबर तिमाही के शेयरधारिता आंकड़ों में विदेशी संस्थागत निवेशकों की हिस्सेदारी में बड़ी कमी सामने आने के बाद बैंक के शेयर करीब 1% से ज्यादा नीचे कारोबार करते दिखे। इसके साथ ही निवेशकों की नजर नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी अनूप बागची की नियुक्ति और बैंक के आगे के प्रदर्शन पर भी बनी हुई है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, सितंबर तिमाही में विदेशी संस्थागत निवेशकों ने एचडीएफसी बैंक में अपनी हिस्सेदारी 2.43% घटाई है। इससे बैंक में उनकी हिस्सेदारी जून तिमाही के 41.82% से घटकर 39.39% रह गई है। इसके उलट घरेलू संस्थागत निवेशकों ने अपनी हिस्सेदारी 1.69% बढ़ाकर 43.44% कर ली है।
सरकार और आम शेयरधारकों की हिस्सेदारी में भी मामूली बढ़ोतरी हुई है। सरकार की हिस्सेदारी 0.01% बढ़कर 0.19% और आम शेयरधारकों की हिस्सेदारी 0.69% बढ़कर 16.96% हो गई है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली को बाजार में बैंक के शेयर पर दबाव की एक वजह माना जा रहा है।
गुरुवार सुबह 11:35 बजे एचडीएफसी बैंक का शेयर 1.3% गिरकर 693.45 रुपये पर कारोबार कर रहा था। इसी दौरान बैंक निफ्टी भी 0.5% की गिरावट के साथ 54,783.15 पर था।
गौरतलब है कि बैंक के शेयरों में कमजोरी ऐसे समय आई है, जब निवेशक अनूप बागची को नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी बनाए जाने के असर का आकलन कर रहे हैं। ज्यादातर ब्रोकरेज कंपनियों ने उनकी नियुक्ति का स्वागत किया है, लेकिन कुछ विश्लेषकों का मानना है कि नए नेतृत्व को अपनी टीम तैयार करने और बैंक की कार्यप्रणाली में बदलाव लाने में समय लग सकता है।
नुवामा के बैंकिंग और वित्तीय सेवा क्षेत्र के प्रमुख विश्लेषक आनंद दामा के मुताबिक, बागची को शुरुआत में अपनी टीम को दोबारा मजबूत करना होगा। इसके बाद लंबे समय में उनके अनुभव से नए विचार आने और बैंक से जुड़े प्रशासन संबंधी चिंताओं को कम करने में मदद मिल सकती है।
बागची फिलहाल आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं। इससे पहले वह आईसीआईसीआई बैंक में वरिष्ठ पदों पर रह चुके हैं, जहां उन्होंने खुदरा और थोक बैंकिंग कारोबार संभाला था। वह करीब 6 साल तक आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज का नेतृत्व भी कर चुके हैं। उनकी उम्र 56 वर्ष है, इसलिए भारतीय रिजर्व बैंक के नियमों के तहत उनके पास 70 वर्ष की उम्र तक बैंक का नेतृत्व करने के लिए लंबा समय है।
मोतीलाल ओसवाल के अनुसार, बैंक के नेतृत्व को लेकर बनी एक बड़ी चिंता अब दूर हुई है। ब्रोकरेज के मुताबिक, बागची का अनुभव बैंक के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।
बैंक ने सितंबर के अंत में जमा में करीब 18.8% और सकल कर्ज में 16.3% की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की है। हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी के आने के बाद बैंक में टीम और कामकाज से जुड़े कुछ बदलाव हो सकते हैं। इससे अगले कुछ तिमाहियों में प्रदर्शन पर दबाव रह सकता है।
बता दें कि 2023 में मूल कंपनी के साथ विलय के बाद एचडीएफसी बैंक की वृद्धि और मार्जिन पर दबाव रहा है। मार्च में चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के अचानक इस्तीफे से भी निवेशकों की चिंता बढ़ी थी, हालांकि स्वतंत्र कानूनी समीक्षा में उनके आरोपों की पुष्टि नहीं हुई थी।
फिलहाल बैंक का शेयर आईसीआईसीआई बैंक की तुलना में समायोजित बही मूल्य के आधार पर करीब 25% की छूट पर कारोबार कर रहा है। 2025 में रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद से शेयर करीब 31% नीचे आ चुका है। बर्नस्टीन के विश्लेषकों का मानना है कि बागची के पास बैंक के प्रदर्शन की धारणा और निवेशकों की उम्मीदों को नए सिरे से तय करने का अच्छा मौका है।
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