Gold Price Today: सोने-चांदी की कीमतों में तेज गिरावट, गोल्ड ₹1,907 हुआ सस्ता; सिल्वर ₹6,543 गिरी
Gold-Silver Price Today (28 July 2026): सोने-चांदी के भाव में 28 जुलाई को नरमी देखने को मिली। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आंकड़ों के अनुसार, मंगलवार को सिल्वर की कीमत में 6,543 रुपए प्रति किलोग्राम की गिरावट दर्ज की गई, जिसके बाद इसका भाव घटकर करीब 2.18 लाख रुपए प्रति किलो रह गया।
वहीं, 24 कैरेट सोने की कीमत में भी कमी आई है। 10 ग्राम सोना 1,907 रुपए सस्ता होकर अब 1.43 लाख रुपए के स्तर पर पहुंच गया है। इसके अलावा, 22 कैरेट सोना ₹1,30,584 प्रति 10 ग्राम, 18 कैरेट सोना ₹1,06,919 प्रति 10 ग्राम और 14 कैरेट सोना ₹83,397 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार करता रहा। आइए अब देश के प्रमुख शहरों में 24 कैरेट सोने के ताजा भाव जानें।
प्रमुख शहरों में 24 कैरेट सोने की कीमत (₹/10 ग्राम)
| शहर | कीमत |
| दिल्ली | ₹1,44,320 |
| मुंबई | ₹1,44,170 |
| कोलकाता | ₹1,44,170 |
| जयपुर | ₹1,44,320 |
| लखनऊ | ₹1,44,320 |
| भोपाल | ₹1,44,220 |
| अहमदाबाद | ₹1,44,220 |
| रायपुर | ₹1,44,170 |
| पटना | ₹1,44,220 |
साल के अंत तक 1.60 लाख रुपए तक पहुंच सकता है सोना
कमोडिटी बाजार के जानकार के मुताबिक, सोने और चांदी की कीमतें फिलहाल अपने रिकॉर्ड स्तर से काफी नीचे कारोबार कर रही हैं। ऐसे में मौजूदा स्तर पर निवेश के अवसर बन सकते हैं। हालांकि, उनका सुझाव है कि निवेशकों को एकमुश्त बड़ी राशि लगाने के बजाय चरणबद्ध (SIP या किस्तों में) निवेश करना चाहिए, ताकि बाजार में उतार-चढ़ाव का जोखिम कम रहे।
एक्सपर्ट्स के अनुमान के मुताबिक, यदि बाजार का रुख अनुकूल रहा तो साल 2026 के अंत तक सोने की कीमत 10 ग्राम पर करीब ₹1.60 लाख तक पहुंच सकती है। वहीं, चांदी का भाव भी बढ़कर लगभग ₹2.80 लाख प्रति किलोग्राम के स्तर को छू सकता है।
अलग-अलग शहरों में सोने के दाम क्यों होते हैं अलग? जानें 4 प्रमुख वजहें
सोने की कीमतें पूरे देश में एक जैसी नहीं होतीं। अलग-अलग शहरों में सोने के रेट में फर्क देखने को मिलता है। इसके पीछे कई व्यावहारिक और आर्थिक कारण जिम्मेदार होते हैं।
1. ट्रांसपोर्टेशन और सिक्योरिटी खर्च
सोने को एक शहर से दूसरे शहर तक पहुंचाने में ट्रांसपोर्ट और सुरक्षा पर खर्च आता है। जैसे-जैसे दूरी बढ़ती है, यह लागत भी बढ़ती जाती है, जिसका असर अंतिम कीमत पर पड़ता है।
2. खरीदारी की मात्रा (डिमांड फैक्टर)
दक्षिण भारत में सोने की खपत देश में सबसे ज्यादा होती है। यहां कुल मांग का लगभग 40% हिस्सा है। बड़ी खरीदारी के बावजूद स्थानीय बाजार में छूट सीमित रहती है, जिससे कीमतों में फर्क आता है।
3. ज्वेलरी एसोसिएशन की भूमिका
हर राज्य और शहर में ज्वेलरी एसोसिएशन स्थानीय मांग और आपूर्ति के आधार पर रेट तय करते हैं। इसी वजह से अलग-अलग शहरों में सोने के भाव अलग हो जाते हैं।
4. पुराना स्टॉक और खरीद मूल्य
ज्वेलर्स ने सोना किस कीमत पर खरीदा है, यह भी बिक्री मूल्य तय करने में अहम भूमिका निभाता है। पुराना स्टॉक महंगा या सस्ता खरीदा गया हो तो उसका असर ग्राहकों को मिलने वाले रेट पर पड़ता है।
सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें खास
1. सिर्फ सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें
हमेशा BIS (Bureau of Indian Standards) हॉलमार्क वाला सोना ही खरीदें। हॉलमार्क से सोने की शुद्धता और कैरेट की जानकारी मिलती है, जैसे अल्फान्यूमेरिक कोड (AZ4524)।
2. कीमत जरूर क्रॉस चेक करें
खरीदने से पहले सोने का भाव अलग-अलग स्रोतों जैसे IBJA (India Bullion and Jewellers Association) से जरूर जांचें। सोने की कीमत 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट के हिसाब से अलग-अलग होती है।
UPI Alert: पेमेंट करते समय अब नहीं दिखेगा आपका पूरा मोबाइल नंबर, NPCI ने बदले नियम
UPI Payment rule changed: यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस के जरिए डिजिटल पेमेंट करने वाले करोड़ों यूजर्स की प्राइवेसी को मजबूत करने के लिए नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने कदम तेज कर दिए। एनपीसीआई डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) कानून को लागू करने की दिशा में यूपीआई ऐप्स और पार्टनर बैंकों के साथ बातचीत कर रहा।
इसका मकसद यह तय करना है कि ग्राहक की निजी जानकारी किस तरह सुरक्षित रखी जाए और यूपीआई सिस्टम में शामिल अलग-अलग संस्थाओं की जिम्मेदारियां क्या हों।
प्राइवेसी मजबूत करने के लिए एनपीसीआई का बड़ा कदम
एनपीसीआई पहले ही फोन नंबर मास्क करने का निर्देश जारी कर चुका। यूपीआई में मोबाइल नंबर का इस्तेमाल पेमेंट करने और यूजर की पहचान सत्यापित करने के लिए होता। यह व्यवस्था सुरक्षा के लिहाज से उपयोगी है। लेकिन इससे यूजर की प्राइवेसी को भी खतरा हो सकता। खासकर तब, जब पेमेंट के बाद किसी दूसरे व्यक्ति को मोबाइल नंबर या पूरी पहचान की जानकारी दिखाई दे।
यूपीआई को ग्राहक की जानकारी छुपानी होगी
एनपीसीआई के निर्देशों के मुताबिक यूपीआई मेंबर बैंक और यूपीआई ऐप्स को ग्राहक की जानकारी को सभी ऐसे इंटरफेस और कम्युनिकेशन में मास्क करना होगा, जहां यह जानकारी दूसरे यूजर को दिखाई देती। इसमें UPI ID, मोबाइल नंबर और बैंक अकाउंट नंबर शामिल हैं। दूसरे व्यक्ति को मोबाइल नंबर के केवल आखिरी 4 अंक दिखाई देने चाहिए।
NPCI के निर्देशों में क्या बदलाव होंगे?
ग्राहक का मोबाइल नंबर पूरी तरह दिखाई नहीं देगा, सिर्फ आखिरी 4 अंक दिखेंगे। इसके अलावा क्यूआर कोड से पेमेंट के बाद पेमेंट पाने वाले को मोबाइल नंबर नहीं दिखाया जाएगा। यूपीआई ऐप्स को मोबाइल नंबर के बजाय यूजरनेम आधारित ID चुनने की सुविधा देनी होगी। वहीं, यूजर नॉन-मोबाइल नंबर आधारित UPI ID को अपना डिफॉल्ट आईडी बना सकेंगे। साथ ही, UPI ऐप्स और बैंकों को ग्राहक की निजी जानकारी सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी निभानी होगी।
यूजर्स वीपीए के लिए मोबाइल नंबर चुनते
फिलहाल जब कोई व्यक्ति पहली बार यूपीआई सेटअप करता है तो ज्यादातर यूजर्स अपना मोबाइल नंबर ही वर्चुअल पेमेंट एड्रेस के तौर पर चुन लेते हैं। हालांकि UPI में पहले से ही मोबाइल नंबर के बजाय यूजरनेम चुनने का विकल्प मौजूद है, लेकिन बहुत से लोग इसके बारे में नहीं जानते। नए बदलाव के बाद डिफॉल्ट रूप से मोबाइल नंबर के बजाय यूजरनेम आधारित आईडी को बढ़ावा दिया जा सकता है।
एनपीसीआई ने यूपीआई ऐप्स और बैंकों को फोन नंबर मास्किंग से जुड़े निर्देश लागू करने के लिए 4 सितंबर की समयसीमा दी है। यह कदम खासतौर पर उन शिकायतों के बाद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिनमें सोशल मीडिया पर कई महिला यूजर्स ने पेमेंट के दौरान पहचान, प्राइवेसी और सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं उठाई थीं।
DPDP कानून के लागू होने के साथ एनपीसीआई यह पक्का करना चाहता है कि UPI इकोसिस्टम में ग्राहक के निजी डेटा को सुरक्षित रखने के लिए सभी भागीदार अपनी जिम्मेदारियां स्पष्ट रूप से समझें और सिस्टम को उसी के अनुसार तैयार करें।
(प्रियंका कुमारी)
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