UPI Alert: पेमेंट करते समय अब नहीं दिखेगा आपका पूरा मोबाइल नंबर, NPCI ने बदले नियम
UPI Payment rule changed: यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस के जरिए डिजिटल पेमेंट करने वाले करोड़ों यूजर्स की प्राइवेसी को मजबूत करने के लिए नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने कदम तेज कर दिए। एनपीसीआई डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) कानून को लागू करने की दिशा में यूपीआई ऐप्स और पार्टनर बैंकों के साथ बातचीत कर रहा।
इसका मकसद यह तय करना है कि ग्राहक की निजी जानकारी किस तरह सुरक्षित रखी जाए और यूपीआई सिस्टम में शामिल अलग-अलग संस्थाओं की जिम्मेदारियां क्या हों।
प्राइवेसी मजबूत करने के लिए एनपीसीआई का बड़ा कदम
एनपीसीआई पहले ही फोन नंबर मास्क करने का निर्देश जारी कर चुका। यूपीआई में मोबाइल नंबर का इस्तेमाल पेमेंट करने और यूजर की पहचान सत्यापित करने के लिए होता। यह व्यवस्था सुरक्षा के लिहाज से उपयोगी है। लेकिन इससे यूजर की प्राइवेसी को भी खतरा हो सकता। खासकर तब, जब पेमेंट के बाद किसी दूसरे व्यक्ति को मोबाइल नंबर या पूरी पहचान की जानकारी दिखाई दे।
यूपीआई को ग्राहक की जानकारी छुपानी होगी
एनपीसीआई के निर्देशों के मुताबिक यूपीआई मेंबर बैंक और यूपीआई ऐप्स को ग्राहक की जानकारी को सभी ऐसे इंटरफेस और कम्युनिकेशन में मास्क करना होगा, जहां यह जानकारी दूसरे यूजर को दिखाई देती। इसमें UPI ID, मोबाइल नंबर और बैंक अकाउंट नंबर शामिल हैं। दूसरे व्यक्ति को मोबाइल नंबर के केवल आखिरी 4 अंक दिखाई देने चाहिए।
NPCI के निर्देशों में क्या बदलाव होंगे?
ग्राहक का मोबाइल नंबर पूरी तरह दिखाई नहीं देगा, सिर्फ आखिरी 4 अंक दिखेंगे। इसके अलावा क्यूआर कोड से पेमेंट के बाद पेमेंट पाने वाले को मोबाइल नंबर नहीं दिखाया जाएगा। यूपीआई ऐप्स को मोबाइल नंबर के बजाय यूजरनेम आधारित ID चुनने की सुविधा देनी होगी। वहीं, यूजर नॉन-मोबाइल नंबर आधारित UPI ID को अपना डिफॉल्ट आईडी बना सकेंगे। साथ ही, UPI ऐप्स और बैंकों को ग्राहक की निजी जानकारी सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी निभानी होगी।
यूजर्स वीपीए के लिए मोबाइल नंबर चुनते
फिलहाल जब कोई व्यक्ति पहली बार यूपीआई सेटअप करता है तो ज्यादातर यूजर्स अपना मोबाइल नंबर ही वर्चुअल पेमेंट एड्रेस के तौर पर चुन लेते हैं। हालांकि UPI में पहले से ही मोबाइल नंबर के बजाय यूजरनेम चुनने का विकल्प मौजूद है, लेकिन बहुत से लोग इसके बारे में नहीं जानते। नए बदलाव के बाद डिफॉल्ट रूप से मोबाइल नंबर के बजाय यूजरनेम आधारित आईडी को बढ़ावा दिया जा सकता है।
एनपीसीआई ने यूपीआई ऐप्स और बैंकों को फोन नंबर मास्किंग से जुड़े निर्देश लागू करने के लिए 4 सितंबर की समयसीमा दी है। यह कदम खासतौर पर उन शिकायतों के बाद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिनमें सोशल मीडिया पर कई महिला यूजर्स ने पेमेंट के दौरान पहचान, प्राइवेसी और सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं उठाई थीं।
DPDP कानून के लागू होने के साथ एनपीसीआई यह पक्का करना चाहता है कि UPI इकोसिस्टम में ग्राहक के निजी डेटा को सुरक्षित रखने के लिए सभी भागीदार अपनी जिम्मेदारियां स्पष्ट रूप से समझें और सिस्टम को उसी के अनुसार तैयार करें।
(प्रियंका कुमारी)
HDFC Bank Share Price: 7 कारोबारी सेशन में 10% टूटा शेयर, जानिए क्यों गिर रहा स्टॉक और आगे क्या उम्मीद
HDFC Bank Share Price: देश के सबसे बड़े प्राइवेट सेक्टर बैंक एचडीएफसी के शेयरों में लगातार 7 कारोबारी सेशन से गिरावट देखने को मिल रही। इस दौरान बैंक का शेयर करीब 10 फीसदी तक टूटकर 741 रुपये के आसपास पहुंच गया, जो इसके 52 हफ्तों के निचले स्तर के करीब है।
जून तिमाही के नतीजों के बाद निवेशक बैंक की कमाई और मार्जिन को लेकर नए सिरे से आकलन कर रहे। हालांकि बैंक ने मुनाफे और लोन ग्रोथ के मोर्चे पर स्थिर प्रदर्शन किया है। लेकिन उम्मीद से धीमी नेट इंटरेस्ट इनकम ग्रोथ और नेट इंटरेस्ट मार्जिन में सुधार नहीं होने से शेयर पर दबाव बना हुआ है।
क्यों एचडीएफसी बैंक का शेयर गिर रहा?
जून तिमाही में बैंक का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स 5 फीसदी बढ़कर 19060 करोड़ रुपये रहा। वहीं बैंक के एडवांस यानी लोन में 15.4 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसके बावजूद एनआईआई की ग्रोथ करीब 7 फीसदी रही, जो बाजार की उम्मीद से कम थी। बैंक का एनआईएम भी 3.26 फीसदी पर स्थिर रहा। बाजार के जानकारों का मानना है कि यही आंकड़ा निवेशकों की सबसे बड़ी चिंता बन गया।
जून तिमाही के नतीजे से गिरा एचडीएफसी बैंक
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, एचडीएफसी बैंक के शेयर में लगातार सात दिनों की गिरावट को बाजार की ओर से जून तिमाही के नतीजों पर दिया गया फैसला माना जा सकता। उनके अनुसार, यह गिरावट बैंक के कारोबार की गुणवत्ता को लेकर नहीं, बल्कि कमाई में सुधार की टाइमिंग को लेकर है। मर्जर के बाद निवेशकों को उम्मीद थी कि बैंक के प्रॉफिट मार्जिन में तेजी से सुधार होगा। लेकिन एनआईएम का 3.26 फीसदी पर स्थिर रहना बताता है कि यह प्रोसेस उम्मीद से ज्यादा समय ले रही है।
एचडीएफसी बैंक के शेयर पर दबाव की प्रमुख वजहें-
- एनआईआई ग्रोथ उम्मीद से कम रहना।
- एनआईएम में सुधार नहीं होना।
- मर्जर के बाद मार्जिन विस्तार में देरी।
- निवेशकों की कमाई में तेज सुधार की उम्मीद पूरी न होना।
- शेयर का 5-दिन से लेकर 200-दिन के प्रमुख मूविंग एवरेज से नीचे कारोबार करना।
यह गिरावट पूरे बैंकिंग सेक्टर में कमजोरी का संकेत नहीं है। आईसीआईसीआई और एक्सिस बैंक समेत अन्य बड़े प्राइवेट बैंकों का प्रदर्शन बेहतर रहा है। इसलिए एचडीएफसी बैंक का कमजोर प्रदर्शन एक अलग स्टॉक से जुड़ा मामला है। हालांकि बैंक का डिपॉजिट बेस और मजबूत डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क अब भी इसकी बड़ी ताकत हैं।
लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मौजूदा गिरावट को संभावित खरीदारी के अवसर के रूप में देखा जा सकता है। लेकिन नई खरीदारी से पहले कुछ संकेतों का इंतजार करना बेहतर होगा। इनमें दूसरी तिमाही में एनआईएम में साफ सुधार या शेयर की कीमत में मजबूत बेस बनना शामिल है।
जब तक इनमें से कोई संकेत नहीं मिलता, शेयर में गिरावट का सिलसिला आगे भी जारी रह सकता। हालांकि मौजूदा स्तरों पर लंबी अवधि के निवेशकों के लिए रिस्क-रिवॉर्ड पहले की तुलना में आकर्षक होता दिख रहा।
(प्रियंका कुमारी)
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