ITR Filing 2026: आखिरी दिनों में रिटर्न भरने से पहले जरूर चेक करें ये 5 बातें, नहीं तो आ सकता टैक्स नोटिस
इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की आखिरी तारीख नजदीक आते ही बड़ी संख्या में टैक्सपेयर्स रिटर्न दाखिल करने की तैयारी में जुट जाते। समय कम होने के कारण कई लोग जल्दबाजी में आईटीआर फाइल कर देते हैं। लेकिन इस दौरान छोटी-सी गलती भी रिटर्न प्रोसेस होने में देरी कर सकती।
इतना ही नहीं, कुछ मामलों में इनकम टैक्स विभाग की ओर से नोटिस भी आ सकता, इसलिए ITR दाखिल करने से पहले कुछ जरूरी बातों की जांच कर लेना बेहद अहम है। आइए डिटेल में जानते हैं।
सही रिटर्न फॉर्म चुनें
आईटीआर फाइल करने से पहले यह देखना जरूरी है कि आपकी आय किस तरह की है। सैलरी, बिजनेस, फ्रीलांसिंग, कैपिटल गेन या अन्य स्रोतों के आधार पर सही आईटीआर फॉर्म चुनें। गलत फॉर्म में रिटर्न दाखिल करने पर इसकी प्रोसेसिंग में देरी हो सकती है।
आय का कोई स्रोत न छूटे
आईटीआर में अपनी सभी इनकम की जानकारी दें। इसमें सैलरी के अलावा बैंक अकाउंट का ब्याज, एफडी से हुई आय, किराये की कमाई, कैपिटल गेन, फ्रीलांसिंग या बिजनेस इनकम भी शामिल है। किसी आय को छिपाने या गलती से छोड़ने पर टैक्स विभाग की ओर से सवाल या नोटिस आ सकता है।
पैन-आधार और बैंक डिटेल चेक करें
रिटर्न जमा करने से पहले पैन कार्ड, आधार, नाम, जन्मतिथि, मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी की जानकारी जांच लें। बैंक अकाउंट नंबर और आईएफएसी कोड भी सही होना चाहिए, ताकि रिफंड में परेशानी न हो।
फॉर्म 16 और टैक्स रिकॉर्ड से मिलान करें
इनकम टैक्स रिटर्न में दर्ज आय और टैक्स की जानकारी को फॉर्म-16, फॉर्म-26एएस, एनुअल इनफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) और टैक्सपेयर इनफॉर्मेशन समरी (TIS) से जरूर मिलाएं। फॉर्म-16 में सैलरी और नियोक्ता द्वारा काटे गए टीडीएस की जानकारी होती है, जबकि फॉर्म 26एएस में पैन से जुड़े टैक्स क्रेडिट का विवरण मिलता है।
एआईएस और फॉर्म 26एएस में अंतर हो तो सुधार करें
टीडीएस, टैक्स भुगतान और अन्य वित्तीय लेनदेन से जुड़ी जानकारी एनुअल इनफॉर्मेशन स्टेटमेंट और Form 26AS में दर्ज हो सकती। आईटीआर फाइल करने से पहले किसी भी मिसमैच को जांचें और जरूरत होने पर संबंधित जानकारी को सही कराएं।
टैक्स छूट के सही दस्तावेज जमा करें
अगर आप टैक्स छूट या कटौती के लिए पात्र हैं, तो निवेश, हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम, एनपीएस योगदान, होम लोन ब्याज का सही तरीके से दावा करें। सिर्फ उन्हीं डिडक्शन को क्लेम करें, जिनके वैध दस्तावेज या प्रमाण आपके पास मौजूद हों। वहीं, अगर टैक्स कैलकुलेशन के बाद कोई अतिरिक्त टैक्स बनता है, तो आईटीआर फाइल करने से पहले उसका भुगतान करें। टैक्स चालान की जानकारी भी सही तरीके से दर्ज करना जरूरी है।
आखिरी समय में जल्दबाजी करने के बजाय रिटर्न दाखिल करने से पहले सभी दस्तावेज और टैक्स रिकॉर्ड को दोबारा जांचना बेहतर है। सही फॉर्म, पूरी आय और सटीक जानकारी के साथ रिटर्न फाइल करने से प्रोसेसिंग में देरी और अनावश्यक टैक्स नोटिस की संभावना को कम किया जा सकता।
(प्रियंका कुमारी)
India Post: 1 अगस्त से लागू होंगे इंडिया पोस्ट के नए स्पीड पोस्ट टैरिफ, जानें अब कितनी लगेगी फीस
India Post speed post new tariff: भारतीय डाक विभाग (Department of Posts) की तरफ से स्पीड पोस्ट सेवाओं को लेकर नए टैरिफ और नियम 1 अगस्त से लागू किए जा रहे हैं। इस नई व्यवस्था के तहत पहली बार डाक विभाग ने 'दस्तावेज' (Document) की एक स्पष्ट परिभाषा तय की है, जिसके दायरे में पत्र, प्रिंटेड सामान और बिना रीसेल वैल्यू वाली कॉम्प्लिमेंट्री वस्तुएं आएंगी।
इन वस्तुओं पर कम शुल्क लिया जाएगा, जबकि इसके अलावा बाकी सभी चीजें पार्सल श्रेणी के अंतर्गत गिनी जाएंगी। साथ ही, विभाग ने रिटेल और होलसेल ग्राहकों के लिए 24-स्पीड पोस्ट और 48-स्पीड पोस्ट सेवाओं की नई दरें भी अधिसूचित कर दी हैं, जहां 24 घंटे और 48 घंटे में डिलीवरी की सुविधा मिलती है।
दस्तावेज श्रेणी में कौन-कौन सी चीजें होंगी शामिल?
जारी अधिसूचना के अनुसार, बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और बीमा (BFSI) क्षेत्र से जुड़े उत्पाद जैसे कि वेलकम किट, लेटर, पासबुक, चेकबुक, बैंक विवरण, प्लास्टिक कार्ड, डेबिट और क्रेडिट कार्ड अब आधिकारिक रूप से 'दस्तावेज' श्रेणी में आएंगे। इसके अलावा पैन कार्ड, [Aadhaar Redacted] कार्ड, वोटर आईडी कार्ड, पासपोर्ट और ड्राइविंग लाइसेंस जैसे तमाम सरकारी दस्तावेज भी इसी में शामिल किए गए हैं।
साथ ही, 500 ग्राम तक वजन वाले गैर-व्यावसायिक पैकेज जैसे राखी के लिफाफे, पैकेट और ग्रीटिंग कार्ड को भी दस्तावेज ही माना जाएगा। इन सभी तय चीजों के अलावा बाकी तमाम सामान पार्सल कैटेगरी के तहत भेजे जाएंगे।
रिटेल ग्राहकों के लिए क्या रहेगा शुल्क?
डाक विभाग के नियमों के मुताबिक, खुदरा यानी रिटेल ग्राहकों के मौजूदा शुल्कों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन दस्तावेज कैटेगरी में थोक बुकिंग (Bulk Booking) के लिए नए रेट जरूर तय किए गए हैं। आगामी 1 अगस्त से 24 स्पीड पोस्ट के तहत रिटेल ग्राहकों को वजन और दूरी के हिसाब से प्रति पैकेट 38 रुपये से लेकर 186 रुपये तक चुकाने होंगे। इसमें 50 ग्राम से कम वजन वाले पैकेट के लिए स्थानीय डाक शुल्क 38 रुपये और पूरे देश के लिए 94 रुपये (जीएसटी अतिरिक्त) तय किया गया है।
वहीं, 51 से 250 ग्राम तक के लिए पोस्टेज चार्ज 118 से 154 रुपये और 251 से 500 ग्राम तक के लिए 140 से 186 रुपये प्रति पैकेट निर्धारित किया गया है।
होलसेल ग्राहकों के लिए नए रेट और 6 प्रमुख शहर
थोक (होलसेल) ग्राहकों की बात करें तो 24 घंटे वाली स्पीड पोस्ट सेवा के लिए शुल्क 38 रुपये से 100 रुपये के बीच रहेगा, जबकि 48 घंटे वाली सेवा के लिए यह 48 रुपये से 72 रुपये के बीच तय किया गया है। इसके अलावा, 48 घंटे वाली स्पीड पोस्ट सेवा के अंतर्गत रिटेल ग्राहकों को वजन और दूरी के आधार पर प्रति पैकेट 61 रुपये से 121 रुपये का भुगतान करना होगा।
डाक विभाग ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल 24 घंटे और 48 घंटे की ये तेज स्पीड पोस्ट सेवाएं देश के केवल 6 प्रमुख शहरों- दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरु और हैदराबाद में ही उपलब्ध कराई जा रही हैं।
तेजी से डिलीवरी के लिए पहले शुरू हुई थीं प्रीमियम सेवाएं
गौरतलब है कि दस्तावेजों और पार्सल की तेज डिलीवरी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से ही इंडिया पोस्ट ने इससे पहले "24 स्पीड पोस्ट", "48 स्पीड पोस्ट" और "24 स्पीड पोस्ट पार्सल" जैसी आधुनिक प्रीमियम सेवाओं की शुरुआत की थी। अब इन्हीं सेवाओं के दायरे को और स्पष्ट करते हुए नए टैरिफ, नई परिभाषाएं और अलग-अलग श्रेणियों के हिसाब से शुल्कों का निर्धारण किया गया है, जिससे ग्राहकों को पार्सल और दस्तावेजों को भेजने में अधिक पारदर्शिता और सुविधा मिल सकेगी।
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