ईंधन संकट का नहीं पड़ा बुरा असर: जून में 7.3% बढ़ा औद्योगिक उत्पादन, 23 महीने के ऊंचे स्तर पर पहुंची ग्रोथ
IIP Growth: मिडिल ईस्ट में जारी संकट की वजह से पिछले कुछ महीने देश में ईंधन संकट के हालात थे। लेकिन, अच्छी बात ये रही कि इसका औद्योगिक उत्पादन पर बुरा असर नहीं पड़ता दिख रहा। तमाम चुनौतियों के बावजूद औद्योगिक गतिविधियों ने जून में मजबूत रफ्तार पकड़ी। देश का औद्योगिक उत्पादन सूचकांक यानी इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (IIP) जून में सालाना आधार पर 7.3% बढ़ा, जो करीब 23 महीनों में सबसे तेज ग्रोथ है।
यह आंकड़ा बाजार के अनुमान 6% से भी बेहतर रहा। मई में आईआईपी ग्रोथ संशोधित होकर 5.1% रही थी। जून के आंकड़े बताते हैं कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भी घरेलू औद्योगिक गतिविधियों में मजबूती बनी हुई।
मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर ने पकड़ी रफ्तार
औद्योगिक उत्पादन में तेजी की सबसे बड़ी वजह मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का बेहतर प्रदर्शन रहा। आईआईपी में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी रखने वाले इस सेक्टर का उत्पादन जून में सालाना आधार पर 7.8% बढ़ा। घरेलू मांग मजबूत रहने और कई प्रमुख उद्योगों में लगातार गतिविधियां जारी रहने से मैन्युफैक्चरिंग को सपोर्ट मिला।
बिजली और गैस उत्पादन में भी दिखी तेजी
बिजली और गैस उत्पादन में भी अच्छी तेजी देखने को मिली। जून में इस क्षेत्र का उत्पादन 10.6% बढ़ा। औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों के विस्तार के साथ ऊर्जा की मांग बढ़ने का असर बिजली और गैस उत्पादन पर भी दिखाई दिया। हालांकि, माइनिंग सेक्टर का प्रदर्शन कमजोर रहा और इसकी ग्रोथ सिर्फ 1% रही।
कैपिटल गुड्स के उत्पादन में आई तेजी
उपयोग आधारित उद्योगों की बात करें तो कैपिटल गुड्स के उत्पादन में सबसे ज्यादा तेजी देखने को मिली। जून में इसका उत्पादन 14.2% बढ़ा, जो निवेश गतिविधियों और उत्पादन क्षमता बढ़ाने की कंपनियों की कोशिश का संकेत है। वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता के बावजूद कंपनियों का निवेश जारी रहना अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा।
जून के IIP आंकड़ों की प्रमुख बातें-
- कुल औद्योगिक उत्पादन (IIP): 7.3%
- मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ: 7.8%
- बिजली और गैस उत्पादन: 10.6%
- माइनिंग ग्रोथ: 1%
- कैपिटल गुड्स: 14.2%
- इंफ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन गुड्स: 7.5%
- कंज्यूमर ड्यूरेबल्स: 7.7%
- वाटर सप्लाई और संबंधित गतिविधियां: 6.1%
इंफ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन गुड्स का उत्पादन जून में 7.5% बढ़ा, जो सरकारी और निजी क्षेत्र की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में जारी गतिविधियों को दिखाता है। वहीं कंज्यूमर ड्यूरेबल्स उत्पादन में 7.7% का इजाफा हुआ। इससे टीवी, फ्रिज और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक सामान जैसे उत्पादों की मांग में मजबूती का संकेत मिलता है।
कुल मिलाकर, जून में IIP की 7.3% ग्रोथ भारतीय अर्थव्यवस्था के औद्योगिक क्षेत्र के लिए पॉजिटिव संकेत है। मजबूत मैन्युफैक्चरिंग, कैपिटल गुड्स और इंफ्रास्ट्रक्चर गतिविधियों से पता चलता है कि घरेलू मांग और निवेश के दम पर उद्योग वैश्विक चुनौतियों के बावजूद अच्छी रफ्तार बनाए हुए और इसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ेगा।
(प्रियंका कुमारी)
ITR Filing 2026: आखिरी दिनों में रिटर्न भरने से पहले जरूर चेक करें ये 5 बातें, नहीं तो आ सकता टैक्स नोटिस
इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की आखिरी तारीख नजदीक आते ही बड़ी संख्या में टैक्सपेयर्स रिटर्न दाखिल करने की तैयारी में जुट जाते। समय कम होने के कारण कई लोग जल्दबाजी में आईटीआर फाइल कर देते हैं। लेकिन इस दौरान छोटी-सी गलती भी रिटर्न प्रोसेस होने में देरी कर सकती।
इतना ही नहीं, कुछ मामलों में इनकम टैक्स विभाग की ओर से नोटिस भी आ सकता, इसलिए ITR दाखिल करने से पहले कुछ जरूरी बातों की जांच कर लेना बेहद अहम है। आइए डिटेल में जानते हैं।
सही रिटर्न फॉर्म चुनें
आईटीआर फाइल करने से पहले यह देखना जरूरी है कि आपकी आय किस तरह की है। सैलरी, बिजनेस, फ्रीलांसिंग, कैपिटल गेन या अन्य स्रोतों के आधार पर सही आईटीआर फॉर्म चुनें। गलत फॉर्म में रिटर्न दाखिल करने पर इसकी प्रोसेसिंग में देरी हो सकती है।
आय का कोई स्रोत न छूटे
आईटीआर में अपनी सभी इनकम की जानकारी दें। इसमें सैलरी के अलावा बैंक अकाउंट का ब्याज, एफडी से हुई आय, किराये की कमाई, कैपिटल गेन, फ्रीलांसिंग या बिजनेस इनकम भी शामिल है। किसी आय को छिपाने या गलती से छोड़ने पर टैक्स विभाग की ओर से सवाल या नोटिस आ सकता है।
पैन-आधार और बैंक डिटेल चेक करें
रिटर्न जमा करने से पहले पैन कार्ड, आधार, नाम, जन्मतिथि, मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी की जानकारी जांच लें। बैंक अकाउंट नंबर और आईएफएसी कोड भी सही होना चाहिए, ताकि रिफंड में परेशानी न हो।
फॉर्म 16 और टैक्स रिकॉर्ड से मिलान करें
इनकम टैक्स रिटर्न में दर्ज आय और टैक्स की जानकारी को फॉर्म-16, फॉर्म-26एएस, एनुअल इनफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) और टैक्सपेयर इनफॉर्मेशन समरी (TIS) से जरूर मिलाएं। फॉर्म-16 में सैलरी और नियोक्ता द्वारा काटे गए टीडीएस की जानकारी होती है, जबकि फॉर्म 26एएस में पैन से जुड़े टैक्स क्रेडिट का विवरण मिलता है।
एआईएस और फॉर्म 26एएस में अंतर हो तो सुधार करें
टीडीएस, टैक्स भुगतान और अन्य वित्तीय लेनदेन से जुड़ी जानकारी एनुअल इनफॉर्मेशन स्टेटमेंट और Form 26AS में दर्ज हो सकती। आईटीआर फाइल करने से पहले किसी भी मिसमैच को जांचें और जरूरत होने पर संबंधित जानकारी को सही कराएं।
टैक्स छूट के सही दस्तावेज जमा करें
अगर आप टैक्स छूट या कटौती के लिए पात्र हैं, तो निवेश, हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम, एनपीएस योगदान, होम लोन ब्याज का सही तरीके से दावा करें। सिर्फ उन्हीं डिडक्शन को क्लेम करें, जिनके वैध दस्तावेज या प्रमाण आपके पास मौजूद हों। वहीं, अगर टैक्स कैलकुलेशन के बाद कोई अतिरिक्त टैक्स बनता है, तो आईटीआर फाइल करने से पहले उसका भुगतान करें। टैक्स चालान की जानकारी भी सही तरीके से दर्ज करना जरूरी है।
आखिरी समय में जल्दबाजी करने के बजाय रिटर्न दाखिल करने से पहले सभी दस्तावेज और टैक्स रिकॉर्ड को दोबारा जांचना बेहतर है। सही फॉर्म, पूरी आय और सटीक जानकारी के साथ रिटर्न फाइल करने से प्रोसेसिंग में देरी और अनावश्यक टैक्स नोटिस की संभावना को कम किया जा सकता।
(प्रियंका कुमारी)
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