करीब दो साल पहले अमेरिका में खेले गए टी20 वर्ल्ड कप में रोहित शर्मा की अगुआई में भारत ने जो ऐतिहासिक सफर तय किया था, उसकी गूंज अब भी क्रिकेट जगत में सुनाई देती हैं। उस टूर्नामेंट में टीम इंडिया एक भी मुकाबला हारे बिना खिताब तक पहुंची थी और फाइनल में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ आखिरी ओवर में शानदार वापसी करते हुए दूसरी बार टी20 विश्व विजेता बनी।
बता दें कि उस जीत के तुरंत बाद कप्तान रोहित शर्मा, विराट कोहली और रविंद्र जडेजा ने टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा कर दी थी। उस समय यह सवाल उठ रहे थे कि इन दिग्गजों के बिना टीम का भविष्य कैसा रहेगा, लेकिन मौजूद जानकारी के अनुसार सूर्यकुमार यादव के कप्तान बनने के बाद टीम ने न सिर्फ इन आशंकाओं को खत्म किया बल्कि खुद को और मजबूत साबित किया है।
गौरतलब है कि सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में भारत अब तक कोई भी टी20 सीरीज नहीं हारा है, चाहे वह द्विपक्षीय रही हो या बहु-राष्ट्र टूर्नामेंट। इसी दमदार प्रदर्शन के चलते टीम 2026 टी20 वर्ल्ड कप में शीर्ष रैंकिंग के साथ उतरेगी और खिताब की प्रबल दावेदार मानी जा रही है।
इस मौजूदा टीम संयोजन में किसी बड़ी कमजोरी की झलक नहीं दिखती है। ईशान किशन की हालिया वापसी ने टीम की बल्लेबाजी को और धार दी हैं, जो लगातार अपने आलोचकों को जवाब देने के इरादे से खेल रहे है।
पूर्व भारतीय विकेटकीपर दीप दासगुप्ता का मानना है कि 2024 की विश्व कप जीत के बाद से यह टीम एक अलग ही स्तर पर पहुंच चुकी है। न्यूज एजेंसी पीटीआई से बातचीत में उन्होंने कहा कि न्यूजीलैंड के खिलाफ हालिया 4-1 की जीत इस बदलाव का साफ उदाहरण है।
हालांकि, टीम प्रबंधन के लिए चिंता का एक पहलू संजू सैमसन का खराब फॉर्म है। वे टीम के पहले पसंद के विकेटकीपर-बल्लेबाज और ओपनर रहे हैं, लेकिन मौजूदा लय में ईशान किशन उनकी जगह प्लेइंग इलेवन में दावा मजबूत कर सकते है। दासगुप्ता का मानना है कि बाएं हाथ के बल्लेबाजों की अधिकता टीम के लिए बड़ी समस्या नहीं हैं और संतुलन बनाए रखा जा सकता है।
कुल मिलाकर, मौजूदा फॉर्म और संयोजन को देखते हुए टीम इंडिया एक बार फिर टी20 विश्व कप में इतिहास दोहराने के बेहद करीब नजर आ रही है।
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टी20 वर्ल्ड कप को लेकर चल रही खींचतान के बीच पाकिस्तान सरकार ने अपने फैसले पर साफ और सख्त रुख अपनाया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने भारत के खिलाफ प्रस्तावित मुकाबले के बहिष्कार को सही ठहराते हुए कहा है कि यह फैसला जल्दबाजी में नहीं, बल्कि सोच-समझकर लिया गया रुख है।
बता दें कि पाकिस्तान क्रिकेट टीम को 15 फरवरी को कोलंबो में भारत के खिलाफ होने वाला टी20 वर्ल्ड कप मैच नहीं खेलने के निर्देश सरकार की ओर से दिए गए। यह फैसला उस समय सामने आया जब सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए भारत में खेलने से इनकार करने वाले बांग्लादेश को टूर्नामेंट से बाहर कर दिया गया और उसकी जगह स्कॉटलैंड को शामिल किया गया है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने एक सरकारी बैठक के बाद कहा कि पाकिस्तान का मानना है कि खेल के मैदान में राजनीति नहीं होनी चाहिए और इसी सिद्धांत के तहत भारत के खिलाफ मैच नहीं खेलने का निर्णय लिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान पूरी तरह बांग्लादेश के साथ खड़ा है और इस मुद्दे पर समर्थन देना एक उपयुक्त और जिम्मेदार फैसला है।
गौरतलब है कि आईसीसी इस बहिष्कार से खासा नाराज़ है और उसने पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड को चेतावनी दी है कि अगर टीम इस हाई-प्रोफाइल मुकाबले के लिए मैदान में नहीं उतरती है तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। आईसीसी का मानना है कि भारत-पाकिस्तान मैच टूर्नामेंट के सबसे बड़े आकर्षणों में से एक है और इससे जुड़े आर्थिक हित पूरी वैश्विक क्रिकेट व्यवस्था को प्रभावित करते है।
आईसीसी ने यह भी उम्मीद जताई है कि पीसीबी इस फैसले के दीर्घकालिक असर पर विचार करेगा, क्योंकि इसका प्रभाव पाकिस्तान क्रिकेट और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट ढांचे दोनों पर पड़ सकता है।
बांग्लादेश के फैसले की पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो बताया जा रहा है कि उसके तेज गेंदबाज मुस्तफिज़ुर रहमान को भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के निर्देश पर आईपीएल से बाहर कर दिया गया था। हालांकि बीसीसीआई ने इसके ठोस कारण सार्वजनिक नहीं किए, लेकिन यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ जब बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमलों की खबरें भी सामने आ रही थीं, जिसने माहौल को और संवेदनशील बना दिया है।
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