US-India Deal के बाद क्या रूस से तेल खरीदेगा भारत? जानें विदेश मंत्रालय ने क्या दिया जवाब
US-India Deal: वेनेजुएला और रूस से तेल खरीद को लेकर चल रही अटकलों के बीच भारत सरकार ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है. विदेश मंत्रालय ने साफ कहा है कि देश के 1.4 अरब नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है और इसी को ध्यान में रखकर सभी फैसले लिए जा रहे हैं. दरअसल ट्रंप ने भारत के साथ समझौते के बाद दावा किया था कि अब भारत रूस से तेल नहीं खरीदेगा. जानिए इस सवाल के जवाब पर विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?
विदेश मंत्रालय का बयान, अटकलों पर विराम
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि भारत ने इस मुद्दे पर पहले भी कई बार अपना पक्ष सार्वजनिक रूप से रखा है. उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर तेजी से बदलते हालात और बाजार की परिस्थितियों को देखते हुए भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित रखने के लिए व्यावहारिक और संतुलित दृष्टिकोण अपना रहा है.
ऊर्जा स्रोतों में विविधता भारत की रणनीति
रणधीर जायसवाल ने बताया कि भारत की नीति का मुख्य आधार डाइवर्सिफिकेशन ऑफ एनर्जी सोर्सेज है. यानी किसी एक देश या क्षेत्र पर निर्भर रहने के बजाय भारत अलग-अलग देशों से तेल और गैस आयात करता है. इससे न केवल आपूर्ति बाधित होने का खतरा कम होता है, बल्कि कीमतों में अस्थिरता का असर भी सीमित रहता है.
Delhi | Responding to ANI's question about President Trump’s claim that India has agreed to stop buying Russian oil and shift to buying crude from the United States and possibly Venezuela, MEA Spokesperson Randhir Jaiswal says, "The government has stated publicly on several… pic.twitter.com/QSZdp9UeYL
— ANI (@ANI) February 5, 2026
वैश्विक हालात के अनुसार फैसले
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि भारत अपने फैसले ऑब्जेक्टिव मार्केट कंडीशंस और बदलते अंतरराष्ट्रीय माहौल को ध्यान में रखते हुए करता है. उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार किसी भी देश के साथ ऊर्जा सहयोग को राजनीतिक नजरिए से नहीं, बल्कि आर्थिक और रणनीतिक जरूरतों के आधार पर देखती है.
भारत की बढ़ती ऊर्जा मांग
विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है, जहां ऊर्जा की मांग लगातार बढ़ रही है. उद्योग, परिवहन और घरेलू जरूरतों के लिए स्थिर और किफायती ऊर्जा आपूर्ति जरूरी है. ऐसे में भारत के लिए तेल आयात से जुड़े फैसले लंबी अवधि की जरूरतों को ध्यान में रखकर किए जाते हैं.
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भारत-अमेरिका ट्रेड डील का पहला चरण 4-5 दिनों में सामने आएगा, मार्च के मध्य तक होगा समझौता: पीयूष गोयल
नई दिल्ली, 5 फरवरी (आईएएनएस)। भारत-अमेरिका ट्रेड डील का पहला चरण अगले 4-5 दिनों में सामने आ सकता है, जिसमें अमेरिका को भारतीय निर्यात पर टैरिफ की दर कम होकर 18 प्रतिशत हो जाएगी। यह जानकारी वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल की ओर से गुरुवार को दी गई।
केंद्रीय मंत्री ने कहा, भारत-अमेरिका के बीच साझा बयान अगले चार से पांच दिनों में जारी हो सकता है। जैसे ही एग्जीक्यूटिव ऑर्डर जारी हो जाएगा। अमेरिका में भारतीय निर्यात पर टैरिफ कम होकर 18 प्रतिशत हो जाएगा।
उन्होंने आगे कहा, भारत आठ द्विपक्षीय व्यापार समझौते पूरे कर चुका है और अमेरिका के साथ व्यापारिक समझौता नौवां होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में भारत द्वारा साइन किए गए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) देश के आधुनिकीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।
गोयल ने आगे बताया कि भारत खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के साथ एक एफटीए के लिए संदर्भ की शर्तों पर हस्ताक्षर करने जा रहा है, जो लगभग दो दशकों से चल रही बातचीत के फिर से शुरू होने का प्रमाण है।
गोयल ने कहा कि सभी छह जीसीसी देशों के साथ एक एफटीए नीतिगत पूर्वानुमान में सुधार लाएगा, निवेश को प्रोत्साहित करेगा और खाद्य एवं ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा।
फूड प्रोसेसिंग, पेट्रोकेमिकल्स और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी उन कई क्षेत्रों में से हैं जिन्हें भारत-खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) एफटीए से लाभ होगा। जीसीसी के साथ भारत का द्विपक्षीय व्यापार वर्तमान में 179 अरब डॉलर का है।
उन्होंने आगे कहा कि भारत-जीसीसी मुक्त व्यापार समझौता वैश्विक हित में एक प्रेरक शक्ति का काम करेगा।
इससे पहले, वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार को लोकसभा में कहा कि अमेरिका के साथ ट्रेड डील में भारत अपने संवेदनशील क्षेत्रों, विशेषकर कृषि और दुग्ध क्षेत्रों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करने में सफल रहा है।
केंद्रीय मंत्री ने संसद को बताया, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फरवरी 2025 में अमेरिका यात्रा के बाद, भारत और अमेरिका एक संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी द्विपक्षीय व्यापार समझौते को संपन्न करने के उद्देश्य से नियमित रूप से चर्चा करते रहे हैं।
--आईएएनएस
एबीएस/
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