Al Falah University Chairman Arrest | दिल्ली विस्फोट के बाद बड़ी कार्रवाई! अल फलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी गिरफ्तार
दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा (Crime Branch) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए अल फलाह विश्वविद्यालय के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की शिकायतों पर दर्ज दो प्राथमिकियों (FIR) के आधार पर की गई है। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा कार्यवाही शुरू करने के बाद दिल्ली पुलिस ने यह कार्रवाई की है।
लाल किले के पास हुए विस्फोट के बाद अपराध शाखा ने निजी विश्वविद्यालय के कामकाज से संबंधित कथित अनियमितताओं और धोखाधड़ी के संबंध में मामले दर्ज किए थे। अधिकारी ने बताया कि सिद्दीकी को स्थानीय अदालत में पेश किया जहां से उसे आगे की पूछताछ के लिए चार दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया।
ED की सक्रियता और पुलिस की कार्रवाई
इस मामले में मोड़ तब आया जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी वित्तीय अनियमितताओं को देखते हुए अपनी कार्यवाही शुरू कर दी। ED की सक्रियता के बाद दिल्ली पुलिस ने त्वरित कदम उठाते हुए चेयरमैन सिद्दीकी को हिरासत में लिया।
विवादास्पद स्टाफ सदस्यों के लिंक
अल फलाह यूनिवर्सिटी तब जांच के दायरे में आ गई जब रिपोर्ट्स में पता चला कि 2000 के लाल किले ब्लास्ट में दोषी ठहराए गए डॉ. उमर नबी, जिसमें 13 लोगों की जान गई थी, यूनिवर्सिटी में काम कर रहे थे। जांचकर्ताओं ने दो सहयोगियों, डॉ. मुज़म्मिल शकील और डॉ. शाहीन शाहिद की भी पहचान की, जो एक तथाकथित 'व्हाइट-कॉलर' आतंकी नेटवर्क से जुड़े थे और जिनके संस्थान से संबंध थे। इन खुलासों से राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान बढ़ा और यूनिवर्सिटी की हायरिंग प्रक्रियाओं के बारे में चिंताएं पैदा हुईं।
मान्यता और वित्तीय चिंताएं
नवंबर में, नेशनल असेसमेंट एंड एक्रेडिटेशन काउंसिल (NAAC) द्वारा कथित तौर पर झूठे मान्यता दावों के संबंध में कारण बताओ नोटिस जारी करने के बाद यूनिवर्सिटी की आधिकारिक वेबसाइट को ऑफलाइन कर दिया गया था। इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय ने यूनिवर्सिटी की फंडिंग और वित्तीय लेनदेन, विशेष रूप से इसके मेडिकल स्टाफ से जुड़े लेनदेन की जांच करने की योजना की घोषणा की है। अधिकारियों ने इस बात पर ज़ोर दिया है कि जांच जारी है और जैसे-जैसे अधिकारी यूनिवर्सिटी के रिकॉर्ड की समीक्षा करेंगे और सिद्दीकी से विस्तार से पूछताछ करेंगे, वैसे-वैसे और भी घटनाक्रम होने की उम्मीद है। यह गिरफ्तारी संस्थान में प्रशासनिक और वित्तीय अनियमितताओं की जांच में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो हाल के महीनों में बढ़ती नियामक जांच के दायरे में रहा है।
Election Commission का सख्त रुख: पश्चिम बंगाल सरकार को 'अल्टीमेटम', 9 फरवरी तक अनुपालन के निर्देश
भारत निर्वाचन आयोग (EC) ने पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा चुनाव संबंधी निर्देशों की कथित अनदेखी पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। आयोग ने एक कड़ा पत्र जारी करते हुए राज्य सरकार को आगाह किया है कि बार-बार याद दिलाने के बावजूद कई महत्वपूर्ण निर्देशों का पालन नहीं किया गया है। अब आयोग ने राज्य सरकार को इन निर्देशों के समयबद्ध अनुपालन (Time-bound Compliance) के लिए 9 फरवरी 2026 तक की अंतिम समय सीमा दी है।
इसे भी पढ़ें: मणिपुर में नई सरकार का आगाज: शपथ ग्रहण के तुरंत बाद पहली कैबिनेट बैठक, भाजपा को मिला भारी समर्थन
एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी। मुख्य सचिव को भेजे गए पत्र में निर्वाचन आयोग ने कहा कि बार-बार याद दिलाने के बावजूद पहले जारी किए गए कई निर्देशों का पालन नहीं किया गया है। आयोग ने बताया कि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 और भारतीय न्याय संहिता, 2023 के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत दो निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (ईआरओ), दो सहायक ईआरओ (एईआरओ) और एक डेटा एंट्री ऑपरेटर के खिलाफ अब तक प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है।
इस संबंध में आयोग ने पांच अगस्त 2025 और दो जनवरी 2026 को भेजे गए अपने पत्रों का भी उल्लेख किया। आयोग ने यह भी कहा कि बशीरहाट-2 की एईआरओ और प्रखंड विकास अधिकारी सुमित्रा प्रतिम प्रधान को निलंबित नहीं किया गया है, जबकि उन पर वैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए अपनी मर्जी से 11 अतिरिक्त एईआरओ की अनधिकृत तैनाती का आरोप है।
इसे भी पढ़ें: Virat-Rohit के World Cup 2027 भविष्य पर MS Dhoni का बड़ा बयान, कहा- उम्र नहीं, Fitness देखो
निर्वाचन आयोग ने बताया कि 25 जनवरी 2026 के पत्र के जरिए 48 घंटे में अनुपालन करने के लिए कहा गया था। यह 21 सितंबर 2000 के उच्चतम न्यायालय के आदेश तथा 31 मई 2023 को जारी आयोग के निर्देशों का उल्लंघन है। इसके अलावा आयोग ने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर 27 अक्टूबर 2025 को जारी उसके निर्देशों के उल्लंघन के बावजूद तीन मतदाता सूची पर्यवेक्षकों अश्विनी कुमार यादव, रणधीर कुमार और स्मिता पांडे के तबादले अब तक रद्द नहीं किए गए हैं।
इस संबंध में 27 जनवरी 2026 को भेजे गए पत्र में 28 जनवरी को अपराह्न तीन बजे तक निर्देश का पालन करने के लिए कहा गया था। आयोग ने निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों और चुनाव अधिकारियों की नियुक्तियों पर भी चिंता जताई और कहा कि ये उसके निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं हैं।
न्यायालय के आदेशों की अवहेलना का आरोप
निर्वाचन आयोग ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि यह देरी न केवल आयोग के दिशा-निर्देशों का, बल्कि 21 सितंबर 2000 के उच्चतम न्यायालय के आदेश का भी उल्लंघन है। आयोग ने नाराजगी जताते हुए कहा कि 25 जनवरी को दिए गए '48 घंटे के अल्टीमेटम' को भी राज्य प्रशासन ने गंभीरता से नहीं लिया।
नियुक्तियों के मानकों पर सवाल
कार्रवाई के अलावा, आयोग ने निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों और चुनाव अधिकारियों की नियुक्तियों पर भी आपत्ति जताई है। ईसी का कहना है कि ये नियुक्तियां आयोग द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं हैं, जो चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता को प्रभावित कर सकती हैं।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
prabhasakshi




















