US-India डील को AAP ने बताया किसान और जनता पर महंगाई का बोझ, सरकार बोली- सबसे अच्छा समझौता
अमेरिका भारत व्यापार समझौते को लेकर सियासी पारा हाई है. एक तरफ सरकार इसे ऐतिहासिक समझौता बता रही है तो वहीं विपक्ष की ओर से डील को लेकर विरोध जताया जा रहा है. इसी कड़ी में आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने भी मंगलवार को एक बयान जारी किया. उन्होंने कहा कि ये दिन भारत के करोड़ों किसानों और आम जनता के लिए काला दिन है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने देश को विश्वास में लिए बिना अमेरिका के आगे सरेंडर कर दिया है और महंगाई व किसान बर्बादी की नींव रख दी है. संजय सिंह ने यह भी कहा कि 'हैरानी की बात यह है कि इस फैसले की जानकारी भारत सरकार ने नहीं, बल्कि अमेरिका के राष्ट्रपति ने ट्वीट करके दी.'
क्या बोले आप सांसद
आम आदमी पार्टी सांसद संजय सिंह ने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति ने सार्वजनिक रूप से बताया कि अब भारत रूस से तेल नहीं खरीदेगा, बल्कि अमेरिका और वेनेजुएला से तेल खरीदेगा. उन्होंने कहा कि वेनेजुएला का तेल घटिया गुणवत्ता वाला होता है, जिसे रिफाइन करना बेहद महंगा पड़ता है. यही नहीं उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका का तेल रूस की तुलना में कहीं ज्यादा महंगा है. आप सांसद के मुताबिक अमेरिका से तेल खरीदेंगे तो इसका सीधा असर भारत की जनता पर पड़ेगा. उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर ये डील की क्यों गई.
किसानों के लिए भी खड़ी होगी परेशानी
आप नेता संजय सिंह के मुताबिक इस डील के बाद किसानों को भी नुकसान उठाना पड़ेगा. सिंह का दावा है कि सरकार ने अमेरिका से आने वाले सभी कृषि उत्पादों पर शून्य शुल्क लगाने का निर्णय किया है. इसका मतलब है कि अमेरिका से आने वाला कपास, गेहूं, सब्जियां और अन्य कृषि उत्पाद टैक्स फ्री होंगे. इससे अमेरिकी कृषि उत्पाद भारतीय बाजार में सस्ते बिकेंगे और भारतीय किसानों की फसल कोई खरीदने वाला नहीं रहेगा.
सरकार ने बताया सबके फायदा का समझौता
वहीं केंद्र सरकार की ओर से इस डील को सबके फायदे वाली डील करार दिया गया है. केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने बकायदा प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए जवाब भी दिया कि आखिर ट्रंप ने इस डील के बारे में क्यों जानकारी दी. पीयूष गोयल ने बताया कि अमेरिका ने टैरिफ लगाया था और यह फैसला भी उन्हीं का था कि वे इसे घटाएंगे. जब उन्होंने टैरिफ घटाया तो स्वभाविक है कि उनको ही ये जानकारी दुनिया के देनी चाहिए. सरकार का तर्क साफ था कि इस समस्या की शुरुआत अमेरिका ने की थी इसका अंत भी अमेरिका ने ही किया है.
यही नहीं उन्होंने सरकार के सरेंडर वाले सवाल पर भी जवाब दिया. उन्होंने कहा कि कूटनीति में हमेशा शोर मचाना जरूरी नहीं है. जब अमेरिका ने 50 फीसदी टैरिफ लगाया तब भी काफी शोर मचा था, तमाम तरह की बातें होने लगी थीं. लेकिन सरकार ने संयम बरता और कोई जवाबी बयान नहीं दिया. इस बार भी सरकार संयम के साथ देश हित में बढ़ रही है.
जनता के अविश्वास और व्यवस्थागत खामियों के बीच पाकिस्तान की पोलियो समस्या बरकरार
इस्लामाबाद, 3 फरवरी (आईएएनएस)। तीन दशकों से अधिक समय तक चलाए गए आक्रामक उन्मूलन अभियानों के बावजूद पाकिस्तान में पोलियो की समस्या अब भी बनी हुई है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जनता के अविश्वास और व्यवस्थागत खामियों के कारण पोलियो उन्मूलन के प्रयास अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर पाए हैं।
द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की टी-मैगज़ीन की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने वर्ष 1994 में पहली बार पोलियो विरोधी अभियान शुरू किया था। इसके बावजूद पिछले 31 वर्षों में देश में कुल 14,206 पोलियो मामलों की पुष्टि दर्ज की गई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पोलियो से दिव्यांग हो चुके बच्चों के इलाज, पुनर्वास और दीर्घकालिक सामाजिक समावेशन के लिए सरकार द्वारा संचालित किसी प्रभावी प्रणाली के अभाव में देश में पोलियो पीड़ितों की एक “अदृश्य आबादी” तैयार हो गई है।
रिपोर्ट में कहा गया, “अब तक देश में पोलियो पीड़ितों के लिए न तो सार्वजनिक पुनर्वास केंद्र हैं, न ही व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम और न ही मनो-सामाजिक सहयोग की कोई व्यवस्था। इसके चलते परिवारों को महंगे निजी इलाज का सहारा लेना पड़ता है, जिसे वहन करना कई लोगों के लिए संभव नहीं है। संरचित सहयोग के अभाव में दिव्यांग बच्चे और वयस्क उपेक्षा और शोषण के शिकार बन रहे हैं तथा शिक्षा, रोजगार और सामाजिक भागीदारी में लगातार बाधाओं का सामना कर रहे हैं।”
नेशनल इमरजेंसी ऑपरेशंस सेंटर के आंकड़ों के अनुसार, पाकिस्तान में 1994 में पोलियो के सबसे अधिक 2,635 मामले सामने आए थे, जिसके बाद मामलों में धीरे-धीरे गिरावट दर्ज की गई।
हालांकि, वर्ष 2025 में पोलियो के मामलों में फिर से उछाल देखा गया। देशभर से कुल 30 मामले सामने आए, जिनमें सबसे अधिक 19 मामले खैबर-पख्तूनख्वा (केपी) से, नौ सिंध से, और एक-एक मामला पंजाब तथा गिलगित-बाल्टिस्तान से दर्ज किया गया। सबसे अधिक प्रभावित प्रांत खैबर-पख्तूनख्वा में उत्तर वज़ीरिस्तान, लक्की मरवत, टैंक, डेरा इस्माइल खान, लोअर कोहिस्तान, तोरघर और बन्नू से अधिकांश मामले सामने आए।
रिपोर्ट में कहा गया है कि दशकों से चल रहे सामूहिक टीकाकरण अभियानों के बावजूद पोलियो पाकिस्तान में अब भी फैल रहा है। इसका मुख्य कारण जनता में गहराई तक फैला अविश्वास और टीकाकरण के प्रति लगातार विरोध है। गलत सूचना, राजनीतिक हस्तक्षेप और सुरक्षा चुनौतियों के मेल ने पोलियो की बूंदों को विवाद का विषय बना दिया है, जिससे उन्मूलन प्रयास कमजोर पड़ गए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, जनता के विश्वास में आई कमी पोलियो के अब भी स्थानिक बने रहने का प्रमुख कारण है। इसके साथ ही सुरक्षा खतरों ने भी स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
इसके अलावा, संचार और जनसंपर्क रणनीतियों की कमजोरी तथा पर्यावरणीय निगरानी की कमी के कारण भी समस्या बनी हुई है। इन खामियों की वजह से कई प्रांतों के सीवेज नमूनों में अब भी पोलियो वायरस की मौजूदगी पाई जा रही है।
--आईएएनएस
डीएससी
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