Guru Pradosh Vrat 2026: अक्टूबर का पहला प्रदोष व्रत कब रखा जाएगा? जानें डेट और शुभ मुहूर्त
Guru Pradosh Vrat 2026: प्रदोष व्रत भगवान शिव की उपासना करने के लिए रखा जाने वाला महत्वपूर्ण व्रत है. पंचांग के अनुसार, प्रत्येक माह के शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत रखा जाता है. धार्मिक मान्यताओं में प्रदोष काल को शिव पूजन के लिए खास माना जाता है. कहा जाता है कि इस समय महादेव की आराधना करने से जीवन में सुख-समृद्धि और शांति आती है. अक्टूबर के महीने में भी प्रदोष के दो व्रत रखे जाएंगे. इस बार गुरुवार के दिन प्रथम प्रदोष व्रत रखा जा रहा है. इसलिए, इसे गुरु प्रदोष व्रत कहा जाता है. इस दिन महादेव के साथ-साथ आपको देवगुरु बृहस्पति का आशीर्वाद भी मिलता है. आइए जानते हैं गुरु प्रदोष की सही तारीख व मुहूर्त.
अक्टूबर में कब है गुरु प्रदोष व्रत?
द्रिक पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 7 अक्टूबर की रात 11 बजकर 16 मिनट से शुरू हो रही है और इसका समापन 8 अक्टूबर की रात 10 बजकर 15 मिनट पर समापन होगा. ऐसे में प्रदोष काल 8 अक्टूबर को रहेगा. इसलिए, इस दिन व्रत रखा जाने वाला है. इस बार प्रदोष व्रत 8 अक्टूबर 2026, गुरुवार को रखा जाने वाला है. गुरु प्रदोष व्रत को आध्यात्मिक उन्नति तथा धर्मज्ञान की प्राप्ति हेतु महत्वपूर्ण माना जाता है. भगवान शिव को तो यह दिन प्रिय है ही किन्तु देवगुरु बृहस्पति से सम्बन्धित होने के कारण इस दिन व्रत करने से ज्ञान, शिक्षा, धन, धर्म, तथा सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है.
क्यों खास है गुरु प्रदोष व्रत?
गुरु प्रदोष का व्रत विवाह, संतान, शिक्षक, ज्येष्ठ भ्राता, पिता और दान आदि जैसी चीजों का कारक भी माना जाता है. इस दिन प्रदोष व्रत रखने से व्यक्ति परोपकारी बनता है और सभी क्षेत्रों में उन्नति प्राप्त करता है. विद्यार्थियों के लिए भी इस व्रत को उत्तम माना जाता है.
प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, आठ अक्टूबर को शिव जी का पूजन करने के लिए प्रदोष काल का समय शाम 5 बजकर 59 मिनट से लेकर रात 8 बजकर 27 मिनट तक रहेगा. आप इस समय शिवालय जाकर या फिर घर में शिव जी का पूजन कर सकते हैं.
गुरु प्रदोष व्रत 8 अक्टूबर का पंचांग
ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 04:29 से लेकर सुबह 05:18 तक
प्रातः सन्ध्या- सुबह 04:54 मिनट से लेकर सुबह 06 बजकर 7 मिनट तक
अभिजित मुहूर्त- सुबह 11:37 से लेकर दोपहर 12:25 मिनट तक
गोधूलि मुहूर्त- शाम 05:55 से लेकर शाम 06 बजकर 20 मिनट तक
अमृत काल- दोपहर 03:01 से लेकर शाम 04:36 तक
प्रदोष व्रत में कैसे करें पूजा?
प्रदोष व्रत के दिन सुबह आपको जल्दी उठना है और स्नानादि करके साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें. इसके बाद शिव जी का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें. इसके बाद शिवलिंग का पंचामृत तथा गंगाजल से अभिषेक करें. पंचामृत बनाने के लिए दूध, दही, घी, शक्कर और शहद का इस्तेमाल करें. अभिषेक करने के बाद भगवान शिव को 11 बेलपत्र अर्पित करें, उन्हें बेल, धतूरा, आक का फूल, फल, सुपारी, लौंग, इलायची और धूप-दीप तथा अक्षत आदि सामग्रियां अर्पित करें. महादेव को खीर तथा अन्य मिष्ठानों का भोग लगाएं.
संध्या के समय दोबारा पूजा करें
प्रदोष व्रत के दिन आपको शाम के समय भी शिव जी की पूजा करनी चाहिए. प्रदोष काल से पहले स्नान करके साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें. शिव मंदिर या घर में ही शिव जी का पूजन करें. उनके सामने घी का दीया जलाए. शिव जी के मंत्रों का जाप करें, शिव चालीसा पढ़ें और अंत में शिव जी की आरती करें.
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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
केन्या में पहली बार इबोला की पुष्टि, डीआर कांगो से लौटे मरीज की मौत
नैरोबी, 6 अक्टूबर (आईएएनएस)। केन्या में पहली बार इबोला वायरस संक्रमण की पुष्टि हुई है। देश के स्वास्थ्य मंत्री एडेन डुआले ने बताया कि संक्रमित व्यक्ति की सोमवार देर रात इलाज के दौरान मौत हो चुकी है। वह केन्या का नागरिक था और हाल ही में डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) में रहकर शनिवार को नैरोबी लौटा था।
डुआले ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि मृतक के संपर्क में आए अब तक 28 लोगों की पहचान की गई है। इनमें उसके परिवार के सदस्य और स्वास्थ्यकर्मी शामिल हैं। अधिकारियों ने इन सभी पर निगरानी शुरू कर दी है ताकि संक्रमण के संभावित प्रसार का पता लगाया जा सके और जरूरत पड़ने पर तत्काल कदम उठाए जा सकें।
डीआरसी से केन्या आने के दौरान स्क्रीनिंग को लेकर उठते सवालों के बीच उन्होंने कहा कि इमिग्रेशन से गुजरने से पहले मरीज की जोमो केन्याटा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेकेआईए) पर पोर्ट हेल्थ सुविधा में सामान्य पब्लिक हेल्थ स्क्रीनिंग की गई थी।
स्वास्थ्य मंत्री ने लोगों से न घबराने की अपील करते हुए कहा कि बीमारी के प्रसार को रोकने के लिए सभी जरूरी व्यवस्थाएं मौजूद हैं।
केन्याई मीडिया हाउस स्टार के अनुसार, केन्या में इससे पहले इबोला संक्रमण का कोई मामला दर्ज नहीं हुआ था। ऐसे में देश में संक्रमण की पहली पुष्टि ने स्वास्थ्य अधिकारियों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। खास तौर पर इसलिए क्योंकि संक्रमित व्यक्ति हाल ही में डीआर कांगो से लौटा था, जहां इबोला का बड़ा प्रकोप जारी है।
डीआरसी इस समय अपने सबसे बड़े इबोला प्रकोप से जूझ रहा है। वहां संक्रमण के लिए इबोला वायरस का दुर्लभ बुंडीबुग्यो जिम्मेदार बताया गया है। इस प्रकोप की आधिकारिक घोषणा मई के मध्य में की गई थी, हालांकि माना जा रहा है कि संक्रमण इससे कई महीने पहले फैलना शुरू हो गया था।
डीआर कांगो में अब तक 8,000 से अधिक मामले सामने आने और 4,000 से ज्यादा लोगों की मौत होने की बात कही गई। संक्रमण को नियंत्रित करने के प्रयासों के बावजूद बीमारी का प्रसार चिंता का विषय बना हुआ है।
इस प्रकोप का असर पड़ोसी देश युगांडा में भी देखा गया था। वहां 20 मामले और दो मौत दर्ज की गई थीं। हालांकि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अगस्त में युगांडा को इबोला-मुक्त घोषित कर दिया था।
केन्या सरकार ने इस साल की शुरुआत में लाइकिपिया एयर बेस में इबोला सुविधा स्थापित करने की योजना बनाई थी। यह स्थान नैरोबी से करीब 125 मील दूर है। उस समय इस योजना को लेकर स्थानीय लोगों में तीखी प्रतिक्रिया सामने आई थी।
इबोला एक गंभीर और जानलेवा वायरल बीमारी है, जो संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों के सीधे संपर्क में आने से फैल सकती है। संक्रमण जीवित और मृत दोनों संक्रमित लोगों से हो सकता है। इसके प्रमुख लक्षणों में बुखार, उल्टी और दस्त शामिल हैं। गंभीर मामलों में आंतरिक और बाहरी रक्तस्राव भी हो सकता है।
केन्या के स्वास्थ्य अधिकारियों के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती 28 संपर्कों की निगरानी करना और यह सुनिश्चित करना है कि यदि उनमें संक्रमण के लक्षण सामने आते हैं तो उनकी तुरंत पहचान और जांच हो।
सरकार ने लोगों से घबराने के बजाय स्वास्थ्य अधिकारियों के निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
--आईएएनएस
केआर/
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