केन्या में पहली बार इबोला की पुष्टि, डीआर कांगो से लौटे मरीज की मौत
नैरोबी, 6 अक्टूबर (आईएएनएस)। केन्या में पहली बार इबोला वायरस संक्रमण की पुष्टि हुई है। देश के स्वास्थ्य मंत्री एडेन डुआले ने बताया कि संक्रमित व्यक्ति की सोमवार देर रात इलाज के दौरान मौत हो चुकी है। वह केन्या का नागरिक था और हाल ही में डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) में रहकर शनिवार को नैरोबी लौटा था।
डुआले ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि मृतक के संपर्क में आए अब तक 28 लोगों की पहचान की गई है। इनमें उसके परिवार के सदस्य और स्वास्थ्यकर्मी शामिल हैं। अधिकारियों ने इन सभी पर निगरानी शुरू कर दी है ताकि संक्रमण के संभावित प्रसार का पता लगाया जा सके और जरूरत पड़ने पर तत्काल कदम उठाए जा सकें।
डीआरसी से केन्या आने के दौरान स्क्रीनिंग को लेकर उठते सवालों के बीच उन्होंने कहा कि इमिग्रेशन से गुजरने से पहले मरीज की जोमो केन्याटा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेकेआईए) पर पोर्ट हेल्थ सुविधा में सामान्य पब्लिक हेल्थ स्क्रीनिंग की गई थी।
स्वास्थ्य मंत्री ने लोगों से न घबराने की अपील करते हुए कहा कि बीमारी के प्रसार को रोकने के लिए सभी जरूरी व्यवस्थाएं मौजूद हैं।
केन्याई मीडिया हाउस स्टार के अनुसार, केन्या में इससे पहले इबोला संक्रमण का कोई मामला दर्ज नहीं हुआ था। ऐसे में देश में संक्रमण की पहली पुष्टि ने स्वास्थ्य अधिकारियों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। खास तौर पर इसलिए क्योंकि संक्रमित व्यक्ति हाल ही में डीआर कांगो से लौटा था, जहां इबोला का बड़ा प्रकोप जारी है।
डीआरसी इस समय अपने सबसे बड़े इबोला प्रकोप से जूझ रहा है। वहां संक्रमण के लिए इबोला वायरस का दुर्लभ बुंडीबुग्यो जिम्मेदार बताया गया है। इस प्रकोप की आधिकारिक घोषणा मई के मध्य में की गई थी, हालांकि माना जा रहा है कि संक्रमण इससे कई महीने पहले फैलना शुरू हो गया था।
डीआर कांगो में अब तक 8,000 से अधिक मामले सामने आने और 4,000 से ज्यादा लोगों की मौत होने की बात कही गई। संक्रमण को नियंत्रित करने के प्रयासों के बावजूद बीमारी का प्रसार चिंता का विषय बना हुआ है।
इस प्रकोप का असर पड़ोसी देश युगांडा में भी देखा गया था। वहां 20 मामले और दो मौत दर्ज की गई थीं। हालांकि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अगस्त में युगांडा को इबोला-मुक्त घोषित कर दिया था।
केन्या सरकार ने इस साल की शुरुआत में लाइकिपिया एयर बेस में इबोला सुविधा स्थापित करने की योजना बनाई थी। यह स्थान नैरोबी से करीब 125 मील दूर है। उस समय इस योजना को लेकर स्थानीय लोगों में तीखी प्रतिक्रिया सामने आई थी।
इबोला एक गंभीर और जानलेवा वायरल बीमारी है, जो संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों के सीधे संपर्क में आने से फैल सकती है। संक्रमण जीवित और मृत दोनों संक्रमित लोगों से हो सकता है। इसके प्रमुख लक्षणों में बुखार, उल्टी और दस्त शामिल हैं। गंभीर मामलों में आंतरिक और बाहरी रक्तस्राव भी हो सकता है।
केन्या के स्वास्थ्य अधिकारियों के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती 28 संपर्कों की निगरानी करना और यह सुनिश्चित करना है कि यदि उनमें संक्रमण के लक्षण सामने आते हैं तो उनकी तुरंत पहचान और जांच हो।
सरकार ने लोगों से घबराने के बजाय स्वास्थ्य अधिकारियों के निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
--आईएएनएस
केआर/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
भारत में डेटा सेंटर्स का तेजी से विस्तार बढ़ा रहा बिजली, साइबर सुरक्षा और बुनियादी ढांचे से जुड़े जोखिम: रिपोर्ट
नई दिल्ली, 6 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), क्लाउड कंप्यूटिंग और डिजिटल सेवाओं की बढ़ती मांग के कारण डेटा सेंटर उद्योग तेजी से विस्तार कर रहा है। हालांकि, इस क्षेत्र में बिजली की उपलब्धता, साइबर सुरक्षा और बुनियादी ढांचे की मजबूती से जुड़े जोखिम भी बढ़ रहे हैं। यह जानकारी मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट में दी गई।
बीमा ब्रोकर कंपनी एऑन की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में स्थापित डेटा सेंटर क्षमता 2030 तक चार गुना से अधिक बढ़ सकती है। नई क्षमता के लिए कई परियोजनाओं पर पहले से ही काम चल रहा है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि बिजली की उपलब्धता अब यह तय करने में एक प्रमुख कारक बनती जा रही है कि नए डेटा सेंटर कहां स्थापित किए जा सकते हैं और परियोजनाएं कितनी तेजी से शुरू हो सकती हैं।
एआई से जुड़े बढ़ते वर्कलोड के कारण ऊर्जा की खपत बढ़ रही है और बिजली के बुनियादी ढांचे पर दबाव भी बढ़ रहा है।
एऑन के भारत में कमर्शियल रिस्क सॉल्यूशंस के मैनेजिंग डायरेक्टर और प्रमुख सुशांत सरिन ने कहा कि ग्रिड से जुड़ी बाधाओं और कनेक्शन में होने वाली देरी से निपटने के लिए डेवलपर्स ऑन-साइट बिजली उत्पादन, बैटरी स्टोरेज और हाइब्रिड ऊर्जा प्रणालियों जैसे वैकल्पिक ऊर्जा समाधानों पर तेजी से विचार कर रहे हैं।
सरिन ने कहा कि इन उपायों से डेटा सेंटर की मजबूती और आपूर्ति की निरंतरता बेहतर हो सकती है, लेकिन इनके साथ परिचालन, रखरखाव और आग से जुड़े जोखिम भी पैदा होते हैं।
कंपनी ने ऐसे शोध का हवाला दिया, जिसके अनुसार दुनियाभर में डेटा सेंटर की बिजली मांग 2030 तक 165 प्रतिशत बढ़ सकती है।
एऑन ने यह भी कहा कि एआई के नेतृत्व में हो रही वृद्धि डेटा सेंटर के भौतिक जोखिमों की प्रकृति को बदल रही है। इससे बिजली की अधिक क्षमता और कूलिंग की जरूरत बढ़ रही है। खासकर पानी की कमी वाले क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता एक बड़ी चिंता बनती जा रही है, जिससे डेटा सेंटर के लिए स्थान का चयन और अधिक जटिल हो गया है।
भौतिक जोखिमों के साथ-साथ साइबर खतरे भी डेटा सेंटर के संचालन से अधिक मजबूती से जुड़ते जा रहे हैं।
इसके अलावा, आधुनिक डेटा सेंटर आपस में जुड़े कंट्रोल सिस्टम, डिजिटल मॉनिटरिंग टूल्स और थर्ड-पार्टी वेंडर्स पर निर्भर करते हैं। ऐसे में साइबर हमलों से संचालन बाधित हो सकता है, संपत्तियों को नुकसान पहुंच सकता है और लंबे समय तक कारोबारी गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं।
एऑन ने कहा कि बीमा कंपनियां डेटा सेंटर के जोखिमों का आकलन करने के लिए तेजी से लाइफसाइकिल आधारित दृष्टिकोण अपना रही हैं। इसमें डिजाइन और निर्माण से लेकर बिजली की मजबूती, साइबर जोखिम और लंबे समय तक संचालन तक सभी पहलुओं का मूल्यांकन किया जा रहा है।
डेटा सेंटर क्षेत्र में बीमा कंपनियों की लगातार बढ़ती रुचि को दर्शाते हुए एऑन ने कहा कि उसके डेटा सेंटर लाइफसाइकिल इंश्योरेंस प्रोग्राम के तहत बीमा क्षमता 3.5 अरब डॉलर से बढ़कर 5 अरब डॉलर हो गई है।
कंपनी ने कहा कि डेटा सेंटर के लिए जोखिम की समग्र योजना बनाना, जिसमें बिजली, पानी, जलवायु और साइबर जोखिम का आकलन शामिल है, बेहद महत्वपूर्ण होगा क्योंकि भारत के डिजिटल और एआई लक्ष्यों में डेटा सेंटर की भूमिका लगातार बढ़ रही है।
--आईएएनएस
एबीएस
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