संविधान का पालन नहीं कर सकते तो भारत छोड़ दें:मेटा-वॉट्सऐप को सुप्रीम कोर्ट की फटकार, कहा- निजी डेटा शेयर करने की इजाजत नहीं देंगे
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को मेटा और वॉट्सऐप को उनकी प्राइवेसी पॉलिसी पर कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि हम आपको एक भी जानकारी शेयर करने की इजाजत नहीं देंगे। आप इस देश के अधिकारों के साथ खिलवाड़ नहीं कर सकते। CJI ने कहा, यदि आप हमारे संविधान का पालन नहीं कर सकते, तो भारत छोड़ दें। हम नागरिकों की निजता से समझौता नहीं होने देंगे। ये मामला वॉट्सऐप की 2021 प्राइवेसी पॉलिसी से जुड़ा है, जिसमें कंपटीशन कमीशन ऑफ इंडिया (CCI) ने नवंबर 2024 में मेटा पर 213.14 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया था। CJI सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पांचोली की बेंच ने IT मंत्रालय को भी याचिका में पक्षकार बनाने को कहा है। कोर्ट 9 फरवरी को अंतरिम आदेश देगा। कोर्ट ने कहा- प्राइवेसी पॉलिसी चतुराई से तैयार की जाती हैं चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा,'आप डेटा साझा करने के नाम पर इस देश के निजता के अधिकार के साथ खिलवाड़ नहीं कर सकते। हम आपको डेटा का एक भी शब्द साझा करने की अनुमति नहीं देंगे। या तो आप एक लिखित आश्वासन दें। आप नागरिकों के निजता के अधिकार का उल्लंघन नहीं कर सकते। पीठ ने कहा कि देश में निजता के अधिकार की सख्ती से रक्षा की जाती है और यह भी टिप्पणी की कि गोपनीयता की शर्तें इतनी चतुराई से तैयार की जाती हैं कि एक आम व्यक्ति उन्हें समझ ही नहीं पाता। यह निजी जानकारी की चोरी करने का एक शालीन तरीका है। हम आपको ऐसा करने की अनुमति नहीं देंगे। आपको एक आश्वासन देना होगा, अन्यथा हमें आदेश पारित करना पड़ेगा। सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कॉमर्शियल पर्पस के लिए यूजर के डेटा शेयर करने की "शोषणकारी" नीति की आलोचना की। कोर्ट रूम LIVE… मेहता: हमारा पर्सनल डेटा सिर्फ बेचा नहीं जाता, उससे पैसे कमाने के लिए इस्तेमाल भी किया जाता है। CJI: सड़क पर ठेला लगाने वाली महिला इन नियमों को कैसे समझेगी? क्या आपने सोचा है कि आप कितनी मुश्किल भाषा लिखते हैं? हर शर्त की जांच होनी चाहिए। CJI: मुझे अपना मोबाइल दिखाओ और मैं तुम्हें तुम्हारा मोबाइल दिखाऊंगा। यह प्राइवेट जानकारी चुराने का तरीका है। एड. अरुण कथपालिया: पूरा डेटा शेयर नहीं होता। सिर्फ कुछ खास डेटा शेयर होता है। CJI: आप अपना फायदा जानते हैं और यह भी जानते हैं कि आपने लोगों को ऐप का आदी बना दिया है। हर कोई इसका इस्तेमाल करता है। SG मेहता: यहां सिर्फ दो चॉइस हैं -लो या छोड़ दो। रोहतगी: क्या मैं कोर्ट को यह बताने के लिए एक पेज का एफिडेविट फाइल कर सकता हूँ कि हम क्या कर रहे हैं? कोर्ट इस पर विचार कर सकता है और फिर फैसला ले सकता है। जस्टिस बागची: जब हम DPDP एक्ट की जांच करते हैं, तो EU सिर्फ़ प्राइवेसी ही नहीं, बल्कि वैल्यू की भी जांच करता है। जब डेटा की प्राइवेसी खत्म हो जाती है, तो वे कहते हैं कि उसकी कोई वैल्यू नहीं रहती। कृपया इसकी जांच करें। --------------------- ये खबर भी पढ़ें… वॉट्सएप के एंड-टू-एंड एनक्रिप्शन पर सवाल:मुकदमे में दावा- मेटा आपकी प्राइवेट चैट्स देख सकता है; कंपनी ने आरोपों को फर्जी बताया वॉट्सएप की पेरेंट कंपनी मेटा एक बार फिर प्राइवेसी को लेकर आरोपों के घेरे में है। सैन फ्रांसिस्को की एक फेडरल कोर्ट में दायर नए मुकदमे में दावा किया गया है कि कंपनी यूजर्स के उन चैट्स को भी देख सकती है, जिन्हें वह एंड-टू-एंड एनक्रिप्टेड (E2E) बताकर पूरी तरह सुरक्षित होने का दावा करती है। पूरी खबर पढ़ें…
हमारी विरासत:पीढ़ियों से चली आ रही कांवड़ कला अब खत्म हो जाएगी, राजस्थान में सिर्फ 4 कारीगर बचे
जब घरों में टीवी या मोबाइल नहीं हुआ करते थे, तब गांव-गांव जाकर पौराणिक कथाएं सुनाने का काम कांवड़ कला करती थी। लकड़ी से तह होने वाला मंदिर (फोल्डेबल) बनाया जाता था। इन कांवड़ (मंदिरों) को लेकर जब कांवड़िया भाट समुदाय के लोग घर-घर जाते थे तो सभी एक साथ बैठकर गीतों के साथ रामायण, महाभारत और देवी-देवताओं की कथाएं सुनते थे। कांवड़ पूजनीय भी था और कीमती भी, लेकिन अब वही कला अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रही है। पूरे राजस्थान में इस कला के सिर्फ चार कारीगर बचे हैं। वह भी सिर्फ कला से भावनात्मक जुड़ाव और यादों को सहेजने के लिए। कांवड़ कला का मुख्य केंद्र चित्तौड़गढ़ से करीब 22 किमी दूर बस्सी गांव रहा है। आज बस्सी में एक भी ऐसी दुकान नहीं है, जहां कांवड़ बिकता हो, क्योंकि खरीदार नहीं है। इस कला से जुड़े ज्यादातर कारीगर अब पेंटिंग, फर्नीचर या दूसरे लकड़ी के काम करने लगे हैं। इस कला को सरकार की सराहना तो खूब मिली, लेकिन संरक्षण कभी नहीं मिला।
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