हमारी विरासत:पीढ़ियों से चली आ रही कांवड़ कला अब खत्म हो जाएगी, राजस्थान में सिर्फ 4 कारीगर बचे
जब घरों में टीवी या मोबाइल नहीं हुआ करते थे, तब गांव-गांव जाकर पौराणिक कथाएं सुनाने का काम कांवड़ कला करती थी। लकड़ी से तह होने वाला मंदिर (फोल्डेबल) बनाया जाता था। इन कांवड़ (मंदिरों) को लेकर जब कांवड़िया भाट समुदाय के लोग घर-घर जाते थे तो सभी एक साथ बैठकर गीतों के साथ रामायण, महाभारत और देवी-देवताओं की कथाएं सुनते थे। कांवड़ पूजनीय भी था और कीमती भी, लेकिन अब वही कला अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रही है। पूरे राजस्थान में इस कला के सिर्फ चार कारीगर बचे हैं। वह भी सिर्फ कला से भावनात्मक जुड़ाव और यादों को सहेजने के लिए। कांवड़ कला का मुख्य केंद्र चित्तौड़गढ़ से करीब 22 किमी दूर बस्सी गांव रहा है। आज बस्सी में एक भी ऐसी दुकान नहीं है, जहां कांवड़ बिकता हो, क्योंकि खरीदार नहीं है। इस कला से जुड़े ज्यादातर कारीगर अब पेंटिंग, फर्नीचर या दूसरे लकड़ी के काम करने लगे हैं। इस कला को सरकार की सराहना तो खूब मिली, लेकिन संरक्षण कभी नहीं मिला।
गांधी जी को कौन ले गया? रात को सही-सलामत थी प्रतिमा, सुबह मिली सिर्फ चप्पल
Australia Mahatma Gandhi Statue Stolen: ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न के रोविल इलाके में ऑस्ट्रेलियन इंडियन कम्युनिटी सेंटर से महात्मा गांधी की कांस्य प्रतिमा चोरी हो गई है. यह प्रतिमा ICCR की ओर से भेंट की गई थी और 2021 में तत्कालीन प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने इसका उद्घाटन किया था. पुलिस के मुताबिक, 12 जनवरी की रात तीन अज्ञात लोगों ने एंगल ग्राइंडर से प्रतिमा काटकर चुरा ली. मामले की जांच जारी है.
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