Expaliner: 'Jailer 2' में क्यों अंडरकवर हुआ 'टाइगर'? रजनीकांत की फिल्म के ट्रेलर से समझें पूरा गेम
Jailer 2 Explainer: साउथ सुपरस्टार रजनीकांत (Rajinikanth) एक बार फिर टाइगर मुथुवेल पांडियन बनकर बड़े पर्दे पर लौटने वाले हैं. उनकी मच अवेटेड फिल्म ‘जेलर 2’ का ट्रेलर (Jailer 2 Trailer) 5 अक्टूबर को रिलीज हो चुका है और इसने आते ही फैंस की एक्साइटमेंट को काफी बढ़ा दिया है. पहली पार्ट में रजनीकांत के किरदार रिटायर्ड जेलर मुथुवेल पांडियन ने एक बड़े मूर्ति तस्करी नेटवर्क का पर्दाफाश किया था, लेकिन इस बार कहानी उससे भी बड़े सिंडिकेट तक पहुंचने वाली है. इस बीच सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर टाइगर ने खुद को छिपाकर एक ड्राइवर का रूप क्यों लिया? तो चलिए समझते हैं, पार्ट 2 की कहानी-
जेलर 2 में टाइगर बना ट्राइवर
जेलर 2 के ट्रेलर की बात करे तो इसकी शुरुआत ही टाइगर की तलाश से होती है. सुराज वेंजारामूडु का किरदार निभा रहे दिलीप उसके बारे में जानकारी जुटाता दिखाई दिया. दूसरी तरफ मुथुवेल पांडियन एकदम अलग रूप में नजर आता है. वो एक ड्राइवर की तरह सामान्य जिंदगी जी रहा है और अपनी असली पहचान छिपाकर रखी है. लेकिन ट्रेलर से साफ संकेत मिलता है कि टाइगर ने ये रूप मजबूरी में नहीं बल्कि एक बड़े मिशन के तहत अपनाया है.
पहली फिल्म में जिस मूर्ति तस्करी नेटवर्क को टाइगर यानि रजनीकांत ने खत्म किया था, उसके पीछे एक और बड़ा नेटवर्क दिखाया गया है. यही वजह है कि इस बार टाइगर सीधे दुश्मनों से भिड़ने के बजाय उनके सिस्टम के अंदर तक पहुंचने की कोशिश कर रहा है. वो ये पता लगाना चाहता है कि असली ताकत किसके हाथ में है और इस पूरे खेल को कौन चला रहा है.
क्या होगी फिल्म की कहानी?
जेलर 2 की कहानी का कनेक्शन पहली फिल्म से ही जुड़ा हुआ है. साल 2023 में आई ‘जेलर’ में मुथुवेल पांडियन अपने परिवार को बचाने के लिए फिर से अपने पुराने खतरनाक अवतार यानी ‘टाइगर’ के रूप में लौटता है. वो भले ही रिटायर हो गया हो, लेकिन उसके अंदर का वो दम और लड़ने का अंदाज खत्म नहीं हुआ था. पहले पार्ट में वो एक बड़े मूर्ति तस्करी गिरोह से भिड़ता है और अपने परिवार को बचाता है और जेलर 2 की कहानी यहीं से आगे बढ़ने वाली है.
हालांकि इस बार टाइगदर के सामने सिर्फ एक अपराधी या छोटा गैंग नहीं होने वाला है. फिल्म के ट्रेलर में ‘Kalpaks Syndicate’ का जिक्र किया गया है, जो पहले वाले नेटवर्क से भी बड़ा और ताकतवर है. ऐसे में टाइगर के सामने असली खतरा तो सेकेंड पार्ट में आने वाला है.
जेलर 2 में टाइगर के नए दुश्मन
पुराने साथी भी देंगे टाइगर का साथ
इसके अलावा जहां जेलर के पार्ट 1 में रजनीकांत के साथ बड़े स्टार्स की मौजूदगी थी. वहीं, दूसरे पार्ट में भी ये फॉर्मूला जारी रहने वाला है. मोहनलाल (Mohanlal) और शिव राज कुमार (Shiva Rajkumar) फिर से अपने किरदारों में वापस लौट रहे हैं. इनके अलावा मिथुन चक्रवर्ती (Mithun Chakraborty) भी फिल्म का हिस्सा हैं. वहीं Ramya Krishnan, Yogi Babu और कुछ दूसरे कलाकार भी फ्रेंचाइजी से जुड़े पुराने किरदारों को आगे बढ़ाते नजर आएंगे.
एक्शन में भी दिखेगा बड़ा बदलाव
अगर ट्रेलर की बात करें तो ‘जेलर’ का एक्शन स्केल पहली फिल्म से बड़ा नजर आ रहा है. ट्रेलर में बंदूकें, स्नाइपर्स, धमाके और बड़े फाइट सीक्वेंस देखने को मिले हैं. टाइगर के किरदार में रजनीकांत एक बार फिर अपने पुराने अंदाज में लौटता दिखाई देता है. खास बात ये है कि इस बार एक्शन के साथ फिल्म में म दिलीप कुमार का डार्क ह्यूमर भी नजर आ रहा है, जो पहली फिल्म की पहचान था.बता दें, नेल्सन ने फिल्म का निर्देशन किया है.
वहीं, बता दें, फिल्म के एक्शन सीन्स को Chethan D’Souza ने तैयार किया है. वहीं विजय कार्तिक कन्नन ने फिल्म की सिनेमैटोग्राफी और आर. निर्मल ने एडिटिंग की है. इसके अलावा फिल्म का म्यूजिक एक बार फिर अनिरुद्ध रविचंदर ने दिया है. उनका म्यूजिक और बैकग्राउंड स्कोर फिल्म के एक्शन और सीन्स को और दमदार बनाने वाला है.
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क्या है ‘Jailer 2’ का पूरा गेम?
जेलर 2 के ट्रेलर को समझे तो पहले पार्ट में जहां टाइगर ने मूर्ति तस्करी के जिस नेटवर्क को खत्म किया था, उसके पीछे एक और बड़ा सिस्टम मौजूद है. वहीं, अब टाइगर उसी सिस्टम तक पहुंचना चाहता है. इसके लिए वो अपनी पहचान छिपाकर ड्राइवर बनकर रह रहा है और दुश्मनों की चाल पर नजर रख रह है. लेकिन जब उसके खिलाफ कई ताकतें एक साथ खड़ी होती है, ये ही फिल्म की कहानी को आगे बढ़ाएगी. बता दें, ये फिल्म 15 अक्टूबर को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है.
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प्लेग का खौफ बनाम हकीकत: रूस की घटना से फिक्र करने की कितनी जरूरत?
नई दिल्ली, 6 अक्टूबर (आईएएनएस)। रूस के साइबेरिया में एक एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट की महिला कर्मचारी की मौत ने लोगों को डरा दिया है। उसकी मौत के बाद करीब 200 लोगों पर पैनी नजर रखी जा रही है। दुनिया का ध्यान एक बार फिर उस बीमारी की ओर गया है, जिसे सदियों पहले ‘ब्लैक डेथ’ के नाम से जाना जाता था। सोशल मीडिया पर प्लेग फैलने और लैब से संक्रमण बाहर निकलने जैसी आशंकाओं ने चिंता बढ़ाई है। लेकिन मौजूदा वैज्ञानिक और आधिकारिक जानकारी की तस्वीर इससे कहीं अलग है। अमेरिका की ओर से भी कुछ सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
सबसे पहले यह स्पष्ट करना जरूरी है कि रूस में इस समय किसी बड़े प्लेग प्रकोप की पुष्टि नहीं हुई है। 28 वर्षीय लैब कर्मचारी की मौत निमोनिया से हुई, लेकिन उसके कारण का अभी पता नहीं चला है। रूसी स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, जांच में ऐसे कोई सबूत नहीं मिले हैं कि महिला के साथ लैब टेस्टिंग के दौरान प्लेग बैक्टीरिया से संबंधित कोई हादसा हुआ था। महिला जिस इरकुत्स्क एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट में काम करती थी, वहां संक्रमण से जुड़े किसी नए मामले की भी पुष्टि नहीं हुई है।
फिर करीब 200 लोगों को निगरानी में क्यों रखा गया? रॉयटर्स के अनुसार, इसका कारण बीमारी की पुष्टि से ज्यादा सावधानी है। महिला के संपर्क में आए लोगों की पहचान कर उन्हें मेडिकल निगरानी में रखा गया है। अस्पताल के कुछ हिस्सों को भी अलग किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति नियंत्रण में है। संपर्क में आए कुछ लोगों में कोविड-19 और राइनोवायरस संक्रमण मिला है, लेकिन अब तक प्लेग का कोई नया मामला सामने नहीं आया है।
इसके बावजूद यह घटना गंभीरता से क्यों ली जा रही है? इसकी वजह खुद प्लेग की प्रकृति है।
विश्व स्वास्थय संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, प्लेग येरसिनिया पेस्टिस नाम के बैक्टीरिया से होने वाली बीमारी है। यह बैक्टीरिया आमतौर पर छोटे जंगली स्तनधारियों और उनके पिस्सुओं में पाया जाता है। संक्रमित पिस्सू के काटने, संक्रमित ऊतक या शरीर के तरल पदार्थ के संपर्क और कुछ परिस्थितियों में संक्रमित व्यक्ति से निकलने वाले सांस के कणों के जरिए इंसान संक्रमित हो सकता है।
यही वह बिंदु है जहां ‘प्लेग’ शब्द सुनकर पैदा होने वाला डर और आज की वास्तविकता अलग-अलग हो जाती है।
प्लेग आज भी गंभीर बीमारी है, लेकिन यह वह बीमारी नहीं है जिसका इलाज मध्ययुगीन यूरोप में उपलब्ध नहीं था। आज इसके लिए प्रभावी एंटीबायोटिक दवाएं मौजूद हैं। समस्या यह है कि बीमारी का पता देर से चलने पर यह बहुत तेजी से जानलेवा हो सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, खासकर फेफड़ों को प्रभावित करने वाला न्यूमोनिक प्लेग बेहद गंभीर रूप है और इलाज नहीं मिलने पर तेजी से जानलेवा हो सकता है। लेकिन समय रहते पहचान और उपचार मिलने पर मरीज के बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
प्लेग के तीन प्रमुख रूप माने जाते हैं—ब्यूबोनिक, सेप्टीसीमिक और न्यूमोनिक। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक इनमें ब्यूबोनिक प्लेग सबसे आम है और आम तौर पर संक्रमित पिस्सू के काटने से होता है। न्यूमोनिक प्लेग फेफड़ों को प्रभावित करता है और यही वह रूप है जिसमें व्यक्ति से व्यक्ति संक्रमण फैलने की आशंका सबसे ज्यादा होती है।
रूस के साइबेरिया का संदर्भ भी महत्वपूर्ण है। यहां प्लेग का प्राकृतिक स्रोत पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। जंगली जानवरों और पिस्सुओं की आबादी में येरसिनिया पेस्टिस मौजूद रह सकता है। यानी प्लेग दुनिया से गायब नहीं हुआ है, बल्कि कुछ इलाकों में प्रकृति के भीतर मौजूद है और कभी-कभार इंसानों तक पहुंच सकता है। हालांकि, रूस में मानव संक्रमण दुर्लभ है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन की 29 सितंबर की रिपोर्ट भी बताती है कि 2019 से 2025 के बीच 10 देशों ने मानव प्लेग के संदिग्ध मामले रिपोर्ट किए और इनमें से छह देशों में संक्रमण की पुष्टि हुई। इस अवधि में कुल 3,847 संदिग्ध मामले और 423 मौतें दर्ज की गईं। ज्यादातर मामले कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य और मेडागास्कर से आए, जहां प्लेग कुछ इलाकों में स्थानिक बना हुआ है।
इससे एक बात साफ होती है—प्लेग इतिहास की किताबों में बंद बीमारी नहीं है, लेकिन यह भी सही नहीं है कि इसका कोई एक संदिग्ध मामला अपने आप वैश्विक महामारी का संकेत है।
रूस की मौजूदा घटना में सबसे महत्वपूर्ण सवाल अब यह है कि मृत महिला को आखिर कौन-सा संक्रमण हुआ था। इसकी पुष्टि के लिए प्रयोगशाला जांच जरूरी है। जब तक येरसिनिया पेस्टिस की मौजूदगी साबित नहीं होती, तब तक इसे प्लेग का पुष्ट मामला कहना जल्दबाजी होगी। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने उपलब्ध जानकारी के आधार पर आम आबादी के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिम को फिलहाल कम बताया है।
लैब दुर्घटना की आशंका ने भी इस मामले को और संवेदनशील बना दिया है। सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया कि महिला ने प्लेग बैक्टीरिया वाली टेस्ट ट्यूब गिरा दी थी। लेकिन रूसी स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा है कि उन्हें रोगजनकों को संभालने के दौरान ऐसी किसी दुर्घटना का प्रमाण नहीं मिला है। इसलिए फिलहाल ‘लैब लीक’ को तथ्य के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा।
--आईएएनएस
केआर/
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