अगस्ता वेस्टलैंड सेना के लिए फिर हेलिकॉप्टर सप्लाई करेगी:2021 में क्लीन चिट मिली; कंपनी पर भारतीय अफसरों को ₹360 करोड़ रिश्वत देने का आरोप था
इटली की कंपनी अगस्ता वेस्टलैंड क्लीन चिट मिलने के पांच साल बाद फिर भारत के रक्षा क्षेत्र में एंट्री करने जा रही है। यह वही कंपनी है जिसका नाम बहुचर्चित VVIP हेलिकॉप्टर कांड से जुड़ा था। इसने करीब एक दशक तक भारतीय राजनीति को झकझोर दिया था। अगस्ता की पैतृक कंपनी लियोनार्डो के साथ अडाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस की डील को अंतिम रूप दिया जा चुका है। अडाणी ग्रुप के अनुसार इसकी औपचारिक घोषणा मंगलवार को होगी। लियोनार्डो कभी फिनमैकेनिका के नाम से जानी जाती थी। क्या है अगस्ता वेस्टलैंड घोटाला? सियाचिन में सेना के लिए है हेलिकॉप्टरों की जरूरत सियाचिन में सैनिकों को रसद पहुंचाने के लिए हेलिकॉप्टर की जरूरत है। रक्षा मंत्रालय ने सेना के लिए 120 और वायु सेना के लिए 80 हेलिकॉप्टर की खरीद को मंजूरी दी थी। इससे पहले, जनवरी 2014 में सौदे के तीन हेलिकॉप्टरों की आपूर्ति हुई थी, पर कोर्ट केस के कारण उन्हें बोरे में लपेट कर रख दिया गया।
फिजिकल हेल्थ- शराब, सोडा से ज्यादा खतरनाक एनर्जी ड्रिंक्स:पीने से खराब होती किडनी, डॉक्टर से जानें किडनी को कैसे रखें हेल्दी
आजकल लोगों को सबकुछ फटाफट चाहिए। बाजार में इंस्टेंट एनर्जी के नाम पर मिल रहे एनर्जी ड्रिंक्स इसका ही नतीजा हैं। इनमें से ज्यादातर ड्रिंक्स में बहुत अधिक मात्रा में शुगर और कैफीन होता है। इसलिए इनको पीते ही तुरंत ऊर्जा का एहसास होता है। एनर्जी ड्रिंक्स में कैफीन, शुगर और प्रिजर्वेटिव्स होते हैं। सब मिलकर किडनी में इंफ्लेमेशन बढ़ाते हैं। साथ ही किडनी की टॉक्सिन फिल्टर करने की क्षमता को भी डैमेज करते हैं। साउथ डकोटा स्टेट यूनिवर्सिटी ने साल 2008 से लेकर 2020 तक एनर्जी ड्रिंक्स के किडनी पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर दुनिया भर में हुई स्टडीज को एक साथ रिव्यू किया। यह रिव्यू 15 से ज्यादा साइंटिफिक स्टडीज के हवाले से यह बताता है कि एनर्जी ड्रिंक्स पीने से किडनी पर काम का बोझ बढ़ जाता है। इससे लिवर और हार्ट को भी नुकसान होता है। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि ये ड्रिंक्स कई मायनों में शराब और सोडा से भी ज्यादा खतरनाक हो सकते हैं। इसलिए ‘फिजिकल हेल्थ’ में आज एनर्जी ड्रिंक्स से होने वाले नुकसानों की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट: डॉ. राजीव गोयल, सीनियर कंसल्टेंट, यूरोलॉजी, नारायणा हॉस्पिटल, गुरुग्राम डॉ. यासिर रिजवी, डायरेक्टर, नेफ्रोलॉजी, धर्मशिला नारायणा सुपरस्पेशिलिटी हॉस्पिटल, दिल्ली सवाल- क्या एनर्जी ड्रिंक्स किडनी के लिए शराब और सोडा से भी ज्यादा खतरनाक हैं? जवाब- हां, कई मामलों में ये ड्रिंक्स शराब और सोडा से भी ज्यादा खतरनाक हो सकते हैं, क्योंकि इनमें एक साथ बहुत ज्यादा हाई कैफीन, सिंथेटिक शुगर और केमिकल प्रिजर्वेटिव्स होते हैं। शराब किडनी को डिहाइड्रेट करती है, सोडा शुगर लोड बढ़ाता है, लेकिन एनर्जी ड्रिंक्स इन दोनों का कॉम्बिनेशन हैं। ये एक साथ डिहाइड्रेशन और ब्लड शुगर दोनों बढ़ाते हैं। शुगर लोड का मतलब है, शरीर में एक साथ बहुत अधिक शुगर पहुंचना। ये ड्रिंक्स किडनी पर फिल्ट्रेशन का अतिरिक्त दबाव भी डालते हैं। इससे किडनी सेल्स थक जाती हैं, इंफ्लेमेशन बढ़ता है और डैमेज का रिस्क भी बढ़ता है। सवाल- एनर्जी ड्रिंक्स में ऐसा क्या होता है, जो किडनी सेल्स के लिए टॉक्सिक बन जाता है? जवाब- इनमें हाई फ्रुक्टोज कॉर्न शुगर, कैफीन, टॉरिन (अमीनो एसिड), आर्टिफिशियल स्वीटनर और सोडियम बेंजोएट जैसे केमिकल होते हैं। ये किडनी सेल्स में ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस बढ़ाते हैं, जिससे सेल्स कमजोर हो जाती हैं। किडनी का काम खून से टॉक्सिन छानकर बाहर निकालना है, लेकिन इन केमिकल्स को बार-बार फिल्टर करने से किडनी थक जाती हैं। इससे सेल डैमेज, इंफ्लेमेशन और माइक्रो-इंजरी होती है, जो धीरे-धीरे क्रॉनिक किडनी प्रॉब्लम में बदल जाती है। सवाल- हाई फ्रुक्टोज कॉर्न शुगर किडनी में जाकर क्या नुकसान करती है? जवाब- हाई फ्रुक्टोज कॉर्न शुगर से शरीर में ये बदलाव होते हैं- सवाल- क्या एनर्जी ड्रिंक में मौजूद सिंथेटिक शुगर शरीर को धीरे-धीरे जहर की तरह नुकसान पहुंचाती है? जवाब- हां, सिंथेटिक शुगर से शरीर को ये नुकसान होते हैं- सवाल- केमिकल फैक्ट्री में तैयार ड्रिंक पीना किडनी के लिए कितना रिस्की है? जवाब- नेचुरल ड्रिंक्स शरीर में आसानी से पच जाते हैं। इसका मतलब है कि शरीर इन्हें आसानी से ऊर्जा और पोषक तत्वों में बदल लेता है। जबकि फैक्ट्री में बने ड्रिंक्स में दर्जनों सिंथेटिक केमिकल होते हैं। शरीर के पास इनको प्रोसेस करने के लिए कोई सिस्टम नहीं होता है। इसलिए इन्हें फिल्टर करने के लिए शरीर को बहुत अधिक मेहनत करनी पड़ती है। इसका सबसे अधिक बोझ किडनी पर पड़ता है। बार-बार ये ड्रिंक्स पीने से किडनी सेल्स में टॉक्सिसिटी बढ़ती है, जिससे इंफ्लेमेशन और नेफ्रॉन डैमेज (किडनी के फिल्टर यूनिट्स में डैमेज) शुरू हो जाता है। शुरुआत में लक्षण नहीं दिखते, पर धीरे-धीरे नुकसान होता रहता है। सवाल- क्या नियमित एनर्जी ड्रिंक लेने से किडनी में इंफ्लेमेशन बढ़ने लगता है? जवाब- हां, एनर्जी ड्रिंक में मौजूद केमिकल और हाई शुगर देखकर हमारा ब्रेन किडनी सेल्स को रिस्क का सिग्नल भेजता है। इसके बचाव में इम्यून सिस्टम इंफ्लेमेशन शुरू कर देता है। देखा जाए तो यह शरीर द्वारा सेल्फ डिफेंस में शुरू हुई एक प्रक्रिया होती है, लेकिन अगर इंफ्लेमेशन लंबे समय तक बना रहे तो यह क्रॉनिक हो जाता है। इससे फिल्टर यूनिट्स मोटी होने लगती हैं, ब्लड प्यूरिफिकेशन में समस्या होने लगती है और प्रोटीन लीकेज शुरू हो सकता है। लंबे समय तक इंफ्लेमेशन जारी रहे तो किडनी डैमेज हो सकती है। सवाल- किडनी इन ड्रिंक्स को बाहर निकालने के लिए ज्यादा काम क्यों करती है? जवाब- नेचुरल ड्रिंक्स और भोजन से बने वेस्ट को छानने के लिए किडनी को बहुत मेहनत नहीं करनी पड़ती है। जबकि एनर्जी ड्रिंक में मौजूद केमिकल और सिंथेटिक शुगर को फिल्टर करने के लिए किडनी को सामान्य से ज्यादा बार ब्लड साफ करना पड़ता है। सवाल- एनर्जी ड्रिंक्स में मौजूद कैफीन किडनी को कैसे नुकसान पहुंचाता है? जवाब- कैफीन ब्लड प्रेशर बढ़ाता है। इससे डिहाइड्रेशन होता है, जिससे खून गाढ़ा हो जाता है। गाढ़े खून को फिल्टर करना किडनी के लिए ज्यादा मुश्किल होता है। हाई ब्लड प्रेशर सीधे किडनी की फिल्टर यूनिट्स को नुकसान पहुंचाता है। लंबे समय तक कैफीन इनटेक से किडनी पर स्ट्रेस (हाई बीपी के कारण तनाव) बना रहता है, जो माइक्रो-डैमेज, प्रोटीन लीकेज और आगे चलकर क्रॉनिक किडनी डिजीज का कारण बन सकता है। सवाल- सोडियम बेंजोएट बेंजीन में बदलकर बॉडी के भीतर क्या खतरे पैदा कर सकता है? जवाब- सोडियम बेंजोएट विटामिन C या गर्म वातावरण में बेंजीन में बदल सकता है। बेंजीन एक कार्सिनोजेन है, जो सेल डीएनए को नुकसान पहुंचाता है। यह खून, लिवर और किडनी सेल्स में टॉक्सिसिटी पैदा करता है। किडनी को इसे बाहर निकालना पड़ता है, जिससे टॉक्सिक लोड कई गुना बढ़ जाता है। इससे सेल डैमेज, इंफ्लेमेशन और लंबे एक्सपोजर से कैंसर व किडनी फेल्योर तक का खतरा बढ़ सकता है। सवाल- अगर एनर्जी ड्रिंक्स ऊर्जा या विटामिन्स नहीं देते तो इन्हें पीने के बाद लोग एनर्जेटिक क्यों महसूस करते हैं? जवाब- कैफीन और स्टिमुलेंट ब्रेन के फटीग सिग्नल को ब्लॉक कर देते हैं। स्टिमुलेंट यानी ऐसी चीजें, जो दिमाग और शरीर को उत्तेजित (एक्टिव) कर देती हैं। शरीर थका रहता है, लेकिन दिमाग को वह महसूस नहीं होता। इससे झूठी फुर्ती और अलर्टनेस आती है, पर असली एनर्जी नहीं मिलती। मांसपेशियों और ऑर्गन की थकान बनी रहती है। शरीर अपनी लिमिट से ज्यादा काम करता है, जिससे अंदरूनी स्ट्रेस बढ़ता है। इसका नुकसान किडनी जैसे अंगों को ज्यादा झेलना पड़ता है क्योंकि उनके ऊपर काम का ओवरलोड होता है। सवाल- ब्रेन का फटीग सिग्नल ब्लॉक होने से शरीर पर क्या असर पड़ता है? जवाब- थकान का सिग्नल बंद होने से शरीर रेस्ट नहीं ले पाता। ओवरवर्क जारी रहता है। इससे हॉर्मोनल बैलेंस बिगड़ता है, ब्लड प्रेशर बढ़ता है और इम्यून सिस्टम कमजोर पड़ता है। शरीर के सभी रिपेयर प्रोसेस रुक जाते हैं। सवाल- फाइट ऑर फ्लाइट मोड में रहने से किडनी कैसे धीरे-धीरे कमजोर होने लगती है? जवाब- इस मोड में शरीर स्ट्रेस हाॅर्मोन रिलीज करता है, जिससे ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट बढ़ते हैं। हाई प्रेशर सीधे किडनी फिल्टर्स को डैमेज करता है। साथ ही ब्लड फ्लो का बैलेंस बिगड़ता है। किडनी लगातार हाई अलर्ट पर काम करती है, आराम नहीं कर पाती है। इससे रिपेयर धीमा पड़ता है और माइक्रो-डैमेज जारी रहता है और किडनी की फिल्ट्रेशन क्षमता घटती जाती है। सवाल- अगर कोई रोज एनर्जी ड्रिंक पीता रहा हो, तो किडनी बचाने के लिए उसे तुरंत क्या कदम उठाने चाहिए? जवाब- किडनी को बचाने के लिए करें ये काम- सवाल- थकान होने पर एनर्जी ड्रिंक्स के सुरक्षित विकल्प क्या हो सकते हैं? जवाब- एनर्जी के लिए नींबू पानी, नारियल पानी, छाछ, फल, स्प्राउट्स और किशमिश-अखरोट बेहतर विकल्प हैं। ग्राफिक में 10 सेफ एनर्जी ड्रिंक्स देखिए- इसके अलावा लाइफ स्टाइल में ये बदलाव भी एनर्जी लेवल बढ़ाते हैं। जैसे कि– सवाल- किडनी डैमेज के शुरुआती लक्षण कैसे पहचानें? जवाब- किडनी डैमेज के शुरुआती लक्षण बहुत स्पष्ट नहीं होते हैं। इसके लिए क्रिएटिनिन, यूरिन रूटीन और बीपी चेक करवा सकते हैं। इसके कुछ संकेत दिख सकते हैं- ……………… ये खबर भी पढ़िए फिजिकल हेल्थ- सिगरेट छोड़ दीजिए, मेमोरी अच्छी हो जाएगी: 45 साल के बाद छोड़ना भी फायदेमंद, स्मोकिंग से होतीं 10 बड़ी बीमारियां हाल ही में हेल्थ जर्नल 'लैंसेट हेल्दी लॉन्गेविटी' में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, 40 के बाद भी अगर आपने सिगरेट पीना छोड़ दिया तो आपकी याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता उन लोगों के मुकाबले बेहतर होगी, जो 40 के बाद भी सिगरेट पिए जा रहे हैं। इसलिए अभी भी देर नहीं हुई है। आगे पढ़िए…
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